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15 अगस्त, 2020|4:43|IST

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टेमी के साथ मधुश्रावणी पर्व संपन्न

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गुरुवार को अग्निपरीक्षा के प्रतीक टेमी के साथ मधुश्रावणी का त्योहार श्रद्धा और भक्तिमय माहौल में सम्पन्न हुआ। आखिरी पूजा को लेकर सुबह से ही व्रतियों में उल्लास देखा गया।

मधुश्रावणी पूजन वाले आंगनों से सुबह से ही त्योहार के लिए बने विशेष लोकगीत की आवाज से आसपास का वातावरण गुंजायमान होता रहा। मैना पंचमी से शुरू मधुश्रावणी के तेरहवें दिन नवब्याहता अपने ससुराल से आये परिधानों सहित आभूषणों को पहन तथाकथित सोलहो श्रृंगार कर पूजा किया। अंतिम दिन पति के साथ नवब्याहताओं ने नए मैना के पत्ता पर नए मिट्टी के हाथी पर गौरी के साथ मिट्टी से ही बने नए नाग, नागिन की पूजा की। कथकहनी द्वारा अंतिम कथा के रूप में राजा सुवर्ण, चन्द्रकर, राजा कीकर आदि का कहानी व्रतियों को सुनाया गया। उसके बाद ससुराल से आये रुई के टेमी को जलाकर व्रतियों के ठेंघुना पर दागा गया। इसे लोग पुराने जमाने में होने वाले अग्निपरीक्षा का अल्प रूप मानते है। पूजा के बाद सुहागिनों के भोज की परंपरा का निर्वहन भी आजतक किया जा रहा है। वैसे कोरोना संक्रमण के कारण इसबार भोज परम्परा निर्वहन से लोग परहेज करते देखे गए।

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  • Web Title:Madhusravani festival ends with Tammy