कोसी क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने में सहायक कोसी महोत्सव धीरे धीरे खो रहा स्वरूप

Mar 09, 2026 01:28 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सहरसा
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सहरसा में कोसी महोत्सव के आयोजन के लिए पर्यटन विभाग ने 30 लाख रुपये का आवंटन किया है। यह महोत्सव मार्च में आयोजित होने की संभावना है और इसका उद्देश्य कोसी क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना है। हालांकि, महोत्सव का स्वरूप धीरे-धीरे भव्यता खो रहा है और अब यह दो दिवसीय हो गया है।

कोसी क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने में सहायक कोसी महोत्सव धीरे धीरे खो रहा स्वरूप

सहरसा, नगर संवाददाता। पर्यटन विभाग ने कोसी महोत्सव आयोजन के लिए 30 लाख रूपये का आंवटन दिया है। महोत्सव का आयोजन मार्च महीने में हीं संभावित है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में सहरसा जिलान्तर्गत कोसी महोत्सव, 2026 के आयोजन अवसर पर स्टेज, दीर्धा लाईट एवं साउण्ड, बैठने की व्यवस्था, बैरेकेडिंग आमंत्रण कार्ड मुद्रण, प्रचार-प्रसार, कलाकारों के चयन एवं मानदेय तथा अन्य विविध कार्यों के संपादन के लिए कुल तीस लाख रूपये आवंटन की स्वीकृति दी है। कोसी महोत्सव का आयोजन कोसी क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन द्वारा आयोजित किया जाता है।

कोसी महोत्सव का शुभारंभ कोसी क्षेत्र के सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने के लिए बिहार सरकार के कला संस्कृति विभाग ने वर्ष 2002 में किया था। तत्कालीन कला संस्कृति मंत्री अशोक कुमार सिंह के प्रयास से शुरू हुआ महोत्सव कभी राज्य के चर्चित महोत्सव में शामिल था। बीच में वर्ष 2005 एवं 06 में महोत्सव का आयोजन नहीं हो पाया। फिर वर्ष 07 एवं 08 में आयोजन हुआ। लेकिन कुसहा त्रासदी के कारण वर्ष 2009 में महोत्सव का आयोजन नहीं हुआ। उसके बाद से यह कार्यक्रम लगातार आयोजित होता रहा है। वर्ष 2007 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कोसी महोत्सव में शामिल हुए थे । खो रहा है भव्य स्वरुप :कोसी क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने में सहायक कोसी महोत्सव धीरे धीरे अपना भव्य स्वरूप खो रहा है। कभी राज्य के चर्चित महोत्सव में शुमार महोत्सव अब अवसान की ओर है। धीरे-धीरे महोत्सव के आयोजन में गिरावट आने लगी। पहले महोत्सव तीन दिनों का होता था । जिसमें कोसी क्षेत्र के सभी प्रतिभागियों की सहभागिता रहती थी। कई तरह के आयोजन होते थे। लेकिन महोत्सव अब दो दिवसीय हो गया है। जिससे स्थानीय कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन का सही मौका नहीं मिल पाता है। 2005-2006 में चुनाव सहित अन्य कारणों से इसका आयोजन नहीं हो सका। जिसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2007 में फिर से इस महोत्सव की शुरुआत की थी। कोसी महोत्सव के मंच से ही मुख्यमंत्री ने कोसी नदी में बलुआहा घाट पर उच्चस्तरीय पुल बनाने की घोषणा की। मंडन मिश्र कृषि महाविद्यालय की स्थापना भी इसी महोत्सव की देन है। 2008 में इस महोत्सव को राज्य सरकार के कैलेंडर में शामिल किया गया था।बड़े कलाकार हो चुके हैं शामिल :वर्ष 2002 के कोसी महोत्सव में कालबेलिया राजस्थानी समूह नृत्य, बीहू असमियां समूह नृत्य, छतीसगढ़ समूह नृत्य के अलावा मधुकर आनंद एवं स्थानीय कलाकारों का कार्यक्रम हुआ। वर्ष 2003 में गजल सम्राट पंकज उधास व लोक गायिका शारदा सिन्हा का कार्यक्रम हुआ। वर्ष 2004 में भजन सम्राट अनूप जलोटा, वर्ष 2007 में फिल्म गायिका विजया भारती का कार्यक्रम हुआ। वर्ष 2008 के महोत्सव मेंपार्श्व गायक मो अजीज, वर्ष 2010 के महोत्सव में कविता कृष्णमूर्ति, वर्ष 2011 में फिल्म गायिका वसुंधरा दास, अभिनेत्री एश्वर्या निगम, वर्ष 2012 के महोत्सव में प्ले बैक सिंगर कुमार सानू व बाली ब्रह्म भट्ट जैसे कलाकारों कोसी महोत्सव को चार चांद लगा चुके है।

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