
15 सितंबर तक लंबित चुनावी कार्य करें पूर्ण : प्रमंडलीय आयुक्त
सहरसा में आगामी विधानसभा आम चुनाव-2025 की तैयारियों के लिए प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित हुई। आयुक्त ने सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी कार्य समय पर पूरे...
सहरसा, नगर संवाददाता। आगामी विधानसभा आम चुनाव-2025 को लेकर प्रशासनिक तैयारियों को गति देने के उद्देश्य से कोसी प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार की अध्यक्षता में शनिवार को प्रमंडलीय सभागार में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। आयुक्त ने पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि समय पर काम पूरा करें नहीं तो कार्रवाई होगी। बैठक की शुरुआत में प्रमंडलीय आयुक्त ने निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों और समयबद्ध कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की आत्मा निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव है। ऐसे में निर्वाचन की हर तैयारी को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ निर्धारित समयसीमा के भीतर पूर्ण करना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि 15 सितंबर तक सभी लंबित कार्य हर हाल में पूरे कर लिए जाएं, अन्यथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। बैठक में सहरसा, सुपौल और मधेपुरा जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी समेत निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अन्य अधिकारी मौजूद रहे। मतदान केंद्रों पर न्यूनतम सुविधा की स्थिति: समीक्षा के दौरान बताया गया कि सहरसा जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों में स्थित मतदान केंद्रों पर आश्वस्त न्यूनतम सुविधा से जुड़े कार्य पूरे कर लिए गए हैं। इसमें पेयजल, शौचालय, रैम्प, विद्युत आपूर्ति जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को शामिल किया गया है। संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी, सेक्टर पदाधिकारी और निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी द्वारा इन कार्यों का सत्यापन भी पूरा कर लिया गया है। हालांकि, सुपौल जिले के कुछ मतदान केंद्रों और मधेपुरा जिले के एक मतदान केंद्र पर अब भी न्यूनतम सुविधा उपलब्ध कराने का कार्य अधूरा है। इस पर आयुक्त ने नाराजगी जताई और निर्देश दिया कि संबंधित पदाधिकारी इन शेष कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूर्ण कराएं। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा कोई भी कार्य लंबित रहना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीएपीएफ आवासन स्थलों पर तैयारी: चुनाव के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती एक अहम पहलू है। इस क्रम में सहरसा जिले में 62 भवन, सुपौल में 61 भवन और मधेपुरा में 86 भवन सीएपीएफ आवासन हेतु चिन्हित किए गए हैं। आयुक्त ने बताया कि सहरसा में अधिकांश कार्य शिक्षा विभाग की पहल से पूरे हो चुके हैं, शेष कार्य एक सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। वहीं सुपौल और मधेपुरा के आवासन स्थलों पर लंबित कार्यों को तत्काल पूरा करने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया। आयुक्त ने यह भी कहा कि इन भवनों पर पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि चुनाव के दौरान सीएपीएफ को किसी तरह की असुविधा न हो। परिवहन योजना पर विशेष जोर: चुनाव के दौरान वाहनों की उपलब्धता और उनके सुचारु संचालन का विशेष महत्व होता है। बैठक में परिवहन योजना पर विस्तृत चर्चा हुई। आयुक्त ने संबंधित जिलों को निर्देश दिया कि वे निर्वाचन प्रयोजनार्थ आवश्यक वाहनों की संख्या और प्रकार का आकलन करें तथा उसका प्रतिवेदन रूट प्लान के साथ अविलंब प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि वाहनों की व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही से निर्वाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, इसलिए इस कार्य को भी प्राथमिकता दी जाए। निविदा प्रक्रिया और चुनावी सामग्रियां: निर्वाचन प्रक्रिया में उपयोग होने वाली सामग्रियों की उपलब्धता की समीक्षा भी बैठक में की गई। सहरसा जिले ने जानकारी दी कि पांच निविदा कार्यों में से चार पूरे हो चुके हैं, जबकि एक कार्य प्रगति पर है। सुपौल और मधेपुरा में निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तथा वर्क ऑर्डर निर्गत करने की प्रक्रिया जारी है। आयुक्त ने कहा कि चुनावी सामग्रियां समय पर उपलब्ध कराना आवश्यक है, इसलिए संबंधित विभाग इसकी सतत निगरानी करें। मतदान कर्मियों की उपलब्धता: चुनाव संचालन के लिए पर्याप्त संख्या में मतदान कर्मियों और पीठासीन अधिकारियों की उपलब्धता जरूरी है। आयुक्त ने निर्देश दिया कि सभी जिले अपने-अपने स्तर पर आवश्यक संख्या का आकलन कर शीघ्र प्रतिवेदन उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि कर्मियों की कमी से चुनाव प्रक्रिया बाधित हो सकती है, इसलिए इस दिशा में अभी से ठोस तैयारी होनी चाहिए। विधि-व्यवस्था और सुरक्षा पर सख्ती: चुनाव के दौरान विधि-व्यवस्था की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण होती है। बैठक में सीसीए , लंबित एनबीडब्लू, शस्त्र लाइसेंस और दुकानों के सत्यापन जैसे बिंदुओं पर जिलावार विस्तृत समीक्षा की गई। आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन किया जाए और शस्त्र जमा कराने की कार्रवाई सख्ती से सुनिश्चित की जाए। सहरसा, सुपौल और मधेपुरा के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया गया कि वे संवेदनशील एवं अति संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां विशेष सतर्कता बरतें। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने में कानून-व्यवस्था की स्थिति सर्वोच्च प्राथमिकता पर होनी चाहिए। निर्वाचक सूची पुनरीक्षण की समीक्षा: विशेष गहन पुनरीक्षण-2025 के अंतर्गत जिलेवार निर्वाचकों की संख्या, दस्तावेज अपलोडिंग और नोटिस निर्गत करने की स्थिति की भी समीक्षा हुई। आयुक्त ने कहा कि जिन कार्यों में विलंब है, उन्हें अविलंब पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम छूटने न पाए और सभी कार्य नियमानुसार पारदर्शी तरीके से किए जाएं। अधिकारियों को चेतावनी: बैठक में प्रमंडलीय आयुक्त ने सख्त लहजे में कहा कि निर्वाचन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी तत्परता और जिम्मेदारी से करें। चुनाव लोकतंत्र का पर्व है और इसे सफल बनाने की जिम्मेदारी हम सबकी है। बैठक में उपस्थित अधिकारी: समीक्षा बैठक में सुपौल जिलाधिकारी सावन कुमार, मधेपुरा जिलाधिकारी तरनजोत सिंह, सहरसा एसपी हिमांशु, सुपौल एसपी सरथ आरएस, मधेपुरा एसपी डॉ. संदीप सिंह, उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सह आयुक्त सचिव दिनेश लाल दास सहित प्रमंडल स्तर एवं जिला स्तर के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने अपने-अपने जिले से संबंधित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने का आश्वासन दिया।

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