
चार दशकों से आस्था का केंद्र है थाना चौक का दुर्गा मंदिर
सहरसा में 22 सितंबर से दुर्गा पूजा की शुरुआत हो रही है। पूजा की तैयारी जोरशोर से चल रही है, जिसमें देवी-देवताओं की प्रतिमा और भव्य पंडाल का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। थाना चौक का दुर्गा मंदिर...
सहरसा, नगर संवाददाता। आगामी 22 सितंबर से दुर्गा पूजा की शुरुआत हो रही है। पूजा की तैयारी जोरशोर से चल रही है। देवी-देवताओं की प्रतिमा और भव्य पंडाल का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।शहर में करीब दस जगहों पर स्थित मंदिर में दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है। स्थायी और अस्थायी प्रतिमा स्थापित कर देवी की अराधना की जाती है।शहर के थाना चौक पर स्थित सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति द्वारा करीब चालीस दशकों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है।शहर के मुख्य हिस्से में बने मां दुर्गा मंदिर में श्रध्दालुओं की सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है।सदर
थाना गेट के सामने वर्ष 1985 में सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश लाल व गोपाल जी के द्वारा मां दुर्गा के पुजा की परंपरा शुरू हुई।जो लगातार 4 दशकों से जारी है।कुछ वर्षों तक झोपड़ीनुमा मंदिर में पूजा होने के बाद 90 के दशक में छत दार मंदिर की स्थापना हुई।जिसका धीरे धीरे विस्तार होता गया।90 के दशक में तत्कालीन थानाध्यक्ष एनपी सिंह के सहयोग से पूजा समिति के द्वारा मंदिर स्थापना में काफी अहम भूमिका निभाई गयी।थाना चौक का दुर्गा मंदिर भक्तों के आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।थाना चौक मंदिर में मां दुर्गा सहित अन्य देवी-देवताओं की मिट्टी की प्रतिमा का एक अलग हीं आकर्षण रहता है।मंदिर के बाहरी भाग व विशालकाय पंडाल मंदिर को भव्यता प्रदान करता है।मंदिर का पट खोलते ही मां के दर्शन, महिलाओं द्वारा खोईंछा भरने के साथ ही प्रसाद चढ़ाने के लिए काफी भीड़ जमा होती है।यहां बंगाल व अन्य जगहों के कलाकारों द्वारा मिट्टी की मूर्ति स्थापित कर पूजा होती है।दूर्गा पूजा के अलावा आम दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रदालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। मंदिर से है थाना चौक की पहचान :सार्वजनिक दुर्गा समिति द्वारा आयोजित किए जाने वाले दुर्गा पूजा के दौरान थाना चौक स्थित दुर्गा मंदिर में सबसे ज्यादा भीड़ जमा होती है।थाना चौक की पहचान भी दुर्गा मंदिर से ही होती है।शहर के मुख्य बाजार में होने के कारण यहां श्रध्दालुओं की सबसे ज्यादा भीड़ होती है।थाना चौक सार्वजनिक दूर्वा पुजा समिति द्वारा तैयार किए जाने वाला विशालकाय पंडाल पूजा और मेला का सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र बना रहता है।इस बार भी मेला और पुजा आयोजन की तैयारी जोरो पर है।विशाल पंडाल का निर्माण किया जा रहा है। मां के मिट्टी की मूर्ति का निर्माण तेजी से हो रहा है।आने वाले समय स्थायी रूप से संगमरमर की प्रतिमा स्थापित करने की भी योजना है। 22 सितंबर – प्रतिपदा (मां शैलपुत्री) 23 सितंबर –द्वितीया (मां ब्रह्मचारिणी) 24 सितंबर – तृतीया (मां चंद्रघंटा) 26 सितंबर – चतुर्थी (मां कूष्मांडा) 27 सितंबर – पंचमी (मां स्कंदमाता) 28 सितंबर – षष्ठी (मां कात्यायनी) 29 सितंबर – सप्तमी (मां कालरात्रि) 30 सितंबर – अष्टमी (मां महागौरी) 1 अक्टूबर – नवमी (मां सिद्धिदात्री) 2 अक्टूबर – विजयादशमी

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