Hindi NewsBihar NewsSaharsa NewsCelebration of Guru Ravidas Jayanti Cultural Events Mark 649th Anniversary
संत रविदास के दोहे से मिल रही जीवन जीने की दिशा

संत रविदास के दोहे से मिल रही जीवन जीने की दिशा

संक्षेप:

सहरसा में रविवार को कला, संस्कृति एवं युवा विभाग और जिला प्रशासन ने संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 649 वीं जयंती मनाई। कार्यक्रम में जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों ने संत की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। वक्ताओं ने रविदास जी के आदर्शों और उनके भक्ति आंदोलन के महत्व पर प्रकाश डाला। सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया।

Feb 02, 2026 12:36 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, सहरसा
share Share
Follow Us on

सहरसा, नगर संवाददाता। कला, संस्कृति एवं युवा विभाग तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की 649 वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।कई कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।सदर अस्पताल मोड़ स्थित संत रविदास मंदिर में अवस्थित संत की प्रतिमा पर जिलाधिकारी दीपेश कुमार,उप विकास आयुक्त गौरव कुमार,सिविल सर्जन सहित अन्य पदाधिकारियों ने माल्यार्पण किया। महान संत के कृत्यों का स्मरण किया गया एवं उनके कार्यों से सीख लेने की सलाह दिया गया । वक्ताओं ने कहा कि रविदास उर्फ रैदास अपनी भक्ति आंदोलन के जरिए समाज के भेदभाव को दूर करने का संकल्प लिया था।आम

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

जनमानस को मन की ताकत को समझाते हुए अपने दोहों के माध्यम से सीख दी।जो आज भी लोगों को जीवन जीने की सही दिशा प्रदान कर रही है।मौके पर मंदिर पुजारी विनो दास, अध्यक्ष चंदेश्वरी राम, सचिव माहेश्वरी राम, सदस्य फूलेश्वर राम, संजय राम, विश्वनाथ राम, विवेक कुमार, पंकज राम, मनोज राम, जगदीश राम, विक्की राम, रविंद्र राम, चेतन राम, महेंद्र राम, चंदन राम, भजन गायक कमला दासीन, नरेश कुमार सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रियांशी वर्मा मैथिली की टीम एवं शहनाई वादक महेंद्र राम, चेतन राम, सुमित राम, चंदन कुमार ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन : प्रेक्षागृह में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन डीडीसी गौरव कुमार, सीएस डॉ राजनारायण प्रसाद, कला संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा झा एवं शैलेंद्र स्नेही ने किया। संचालन शिक्षक आनंद झा ने किया।डीडीसी ने कहा कि संत रविदास के जीवन दर्शन एवं मानवीय गुण को देखते उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं।जब समाज असमानता भेदभाव छुआछूत जैसे कुरीतियों से ग्रस्त था तो संत ने उसे मिटाकर समरस समाज बनाने का आह्वान किया। उनके दोहे, भजन से प्रेरणा मिलती है। प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार समान गरिमा आदर्श स्थापित करते सर्व समावेशी समाज बनाया।श्रम की गरिमा का मार्ग प्रशस्त किया। मनुष्य की पहचान कर्म से होती है। संत रविदास के आदर्श को जीवन में अवश्य उतारे। उन्होंने युवाओं से कोसी की संस्कृति को विश्व स्तरीय पहचान देने के लिए सहयोग की अपील किया।जिला संस्कृति पदाधिकारी ने कहा कि कोसी की संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करने के लिए कला संस्कृति विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किया जा रहा है। लुप्त हो रही संस्कृति को अक्षुण्ण रखने के लिए प्रयासरत है।नारदी भजन एवं रसन चौकी, शहनाई, ढोल, पिपही का गायन एवं वादन कर संरक्षण व संवर्धन किया जा रहा है। मौके पर संत द्वारा लिखित मन चंगा तो कठौती में गंगा नाटक शशि सरोजिनी मंच के कलाकारों द्वारा मंचन किया गया।