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बनगांव: यहां मां भगवती का नित्य बदलता रहता है स्वरूप

हिन्दुस्तान टीम,सहरसाPublished By: Newswrap
Thu, 23 Sep 2021 04:51 AM
बनगांव: यहां मां भगवती का नित्य बदलता रहता है स्वरूप

कहरा | एक संवाददाता

बनगांव स्थित आदी शक्ति मां भगवती की स्वरूप नित्य बदलता रहता है। यहां नित्य श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। आश्विन तथा चैत माह के नवरात्रा में पूजा अर्चना के लिए यहां दूर दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। यहां सच्चे मन से पूजा अर्चना करने बालों का शीघ्र ही सभी मनोकामना पूरा होता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि कुआरी कन्या द्वारा यहां पूजा करने के बाद अच्छे घरों में ब्याह होता है। बनगांव में आदि शक्ति मां भगवती की काले रंग की दुर्लभ प्रतिमा है। इनके एक हाथ मे कमण्डल तथा दूसरा हाथ वर देते हुए है। जानकारों के अनुसार आदि शक्ति मां भगवती की यह वरदायिनी रूप है। क्षेत्र में ऐसा प्रतिमा कहीं नहीं है।

इतिहास: कहा जाता है कि यहां के अधिकांश लोग आदि शक्ति के उपासक थे। इनकी भक्ति से प्रसन्न हो 8-9 शताब्दी में मां भगवती ने ग्रामीण उपासकों को स्वप्न दी। इस सम्बंध में जानकारी दिए जाने के बाद ग्रामीणों द्वारा सिमरी बख्तियारपुर प्रखण्ड क्षेत्र के गोरदह चौर में कई दिनों तक खोजने के बाद यह प्रतिमा मिला। ततपश्चात प्रत्येक कदम पर छागर की बलि देते हुए यहां लाकर स्थापित किया गया। गांव के ही मसोमात बुचनी देवी द्वारा मां भगवती के लिए लाखों की लागत से पक्का भवन बनवाया गया।फिर 1989-1990 के दशक में ग्रामीणों द्वारा उक्त पक्का भवन की छत तोड़कर सार्वजनिक सहयोग से वर्तमान स्वरूप में मन्दिर बनवाया गया।

बलि की प्रथा है कायम: यहां पशु बलि की प्रथा आज भी कायम है। यहां वर्ष भर श्रद्धालुओं द्वारा भैंसा व छागर का बलि चढ़ाया जाता है। नवरात्रा में महासप्तमी के रात विशेष पूजा अर्चना कर अष्टमी को बलि दिए जाने वाले भैसा का पान किया जाता है। प्रथम भैंसा ग्रामीणों द्वारा गांव, क्षेत्र व देश के सलामती के लिए आपसी सहयोग से फिर मनौति पूरा होने बाले श्रद्धालुओं द्वारा महाअष्टमी के दिन यहां सेकड़ों छागर व दर्जनों भैंसा का बलि दिया जाता है।

क्विज प्रतियोगिता आयोजित: नवरात्रा में विजया दशमी के रात स्थानीय रेलवे के एक पदाधिकारी अजय झा के द्वारा क्षेत्र में सर्वप्रथम क्विज प्रतियोगिता की शुरुआत की गयी। जो निरन्तर प्रत्येक वर्ष उनके द्वारा आज भी यहां विजया दशमी के रात आयोजित की जाती है।इस प्रतियोगिता में प्रथम-द्वितीय,तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले दर्जनों छात्र अच्छे सम्मानजनक पदों पर आसीन हो देश की सेवा कर रहे हैं। स्थानीय पुजारी गौड़ीशंकर मिश्र के अनुसार सेकड़ों वर्ष पूर्व शुरू की गयी पूजन प्रणाली के अनुरूप आज भी पूजा अर्चना की जा रही है।

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