प्रवचनों में मिला सदाचार व गुरु महिमा का संदेश
बनमा ईटहरी प्रखंड के ईटहरी गांव में 62वां वार्षिक संतमत सत्संग अधिवेशन आयोजित हुआ। हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिसमें महिलाओं की उपस्थिति विशेष रही। महर्षि मेंही आश्रम के आचार्य भगीरथ, प्रमोदानंद और सत्यप्रकाश ने प्रवचन दिए, जिसमें मानव जीवन के उद्देश्य, भक्ति और गुरु की महत्ता पर चर्चा हुई।

सिमरी बख्तियारपुर, एक संवाददाता। बनमा ईटहरी प्रखंड के ईटहरी गांव में गुरुवार को दो दिवसीय सहरसा जिला संतमत सत्संग का 62वां वार्षिक अधिवेशन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हो गया। अधिवेशन में अनुमंडल क्षेत्र के तीनों प्रखंडों से हजारों की संख्या में सत्संग प्रेमियों की भीड़ उमड़ पड़ी। आयोजन स्थल पर विशेषकर महिला श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति ने माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। भागलपुर स्थित महर्षि मेंही आश्रम कुप्पाघाट से पधारे आचार्य भगीरथ महाराज, प्रमोदानंद महाराज एवं सत्यप्रकाश महाराज के प्रवचन आरंभ होते ही पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया।
महाराजों ने अपने ओजस्वी उद्बोधनों में मानव जीवन के उद्देश्य, भक्ति, सदाचार तथा समाज में आपसी प्रेम और सद्भाव के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रवचन के दौरान कहा गया कि जीवन में स्थायी सुख-शांति भौतिक साधनों से नहीं, बल्कि संत-सतगुरु के उपदेशों का पालन और सत्संग में सहभागिता से प्राप्त होती है। असुर स्वभाव एवं विकृत प्रवृत्तियों से दूर रहने की प्रेरणा देते हुए गुरु की महत्ता पर विशेष बल दिया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गुरु के बिना मनुष्य में सच्ची मनुष्यता का विकास संभव नहीं है। संत कबीर, महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज और गोस्वामी तुलसीदास के उदाहरणों के माध्यम से गुरु-भक्ति की व्याख्या की गई। श्रद्धालुओं ने प्रवचनों को श्रद्धा भाव से ध्यानपूर्वक सुना। आयोजन के समापन पर पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण देखा गया।
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