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हिंदी न्यूज़ बिहार सहरसा‘आनंद मोहन को लेकर दिया गया बयान भ्रामक

‘आनंद मोहन को लेकर दिया गया बयान भ्रामक

हिन्दुस्तान टीम,सहरसाNewswrap
Mon, 06 Dec 2021 03:52 AM
‘आनंद मोहन को लेकर दिया गया बयान भ्रामक

सहरसा | नगर संवाददाता

पूर्व सांसद लवली आनंद ने बयान जारी कर कहा है कि बिहार के प्रभारी गृह मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने आनंद मोहन को लेकर सदन में जो वक्तव्य दिया है वह भ्रामक और गुमराह करने वाला है। 2012 में लाया गया कोई एमेनमेंट या जेल मैनुअल 2007 में सजाप्राप्त बंदी पर लागू नहीं होता। हम इसके खिलाफ कोर्ट तो जाएंगे ही।

उन्होंने कहा कि जनतंत्र में जनता की अदालत सबसे बड़ी अदालत है। इसे जनता की अदालत में भी मजबूती से उठाएंगे और पूरे मामले देश व्यापी मुहिम का हिस्सा बनाएंगे।उन्होंने कहा कि सेक्शन 432 (सीआरपीसी ) और सेक्शन 55( आईपीसी ) राज्य सरकार को परिहार देने का अधिकार देती है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला 3 अगस्त 2021 को ये कहता है कि 14 साल पूरा कर चुके उम्र कैद के कैदियों को सरकार रिहा करें। तीन फरवरी को जस्टिस कौल और जस्टिस रॉय के बेंच से सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिया गया कि आजीवन कारावास की सजा पाए गए कैदियों को परिहार का अधिकार है। सभी राज्य सरकार को यह आदेश जारी किया गया कि टाइम लाइन तय करके कैदियों को छोड़ा जाए। लगातार कोरोना से पूर्व और कोरोना के बाद कई राज्यों को उम्र कैद वाले कैदियों के रिहाई का निर्देश दिया,परन्तु बिहार में ऐसा नहीं होने से सैकड़ों की संख्या में कैदी जेलों में निरुद्ध हैं। जो अपनी निर्धारित सजा पूरी कर चुके हैं। समय पर राज्य परिहार बोर्ड की बैठक नहीं करने के वजह से सभी इस अधिकार से वंचित हैं। पटना हाई कोर्ट के जस्टिस नवनीति प्रसाद सिंह एवं जस्टिस विकाश जैन की बेंच ने रवि प्रताप मिश्रा बनाम स्टेट ऑफ बिहार के केस में सरकार को यह आदेश दिया कि चाहे जुर्म कितना भी जघन्य क्यों न हो, कैदी को उसके परिहार के अधिकार से वंचित नहीं रखा जा सकता।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का आचरण कोई निष्पक्षता और पारदर्शिता का नहीं है। राजनीतिक नफा-नुकसान पर आधारित है,जो नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है।विधायक चेतन आनंद ने कहा कि दिल्ली, हिमाचल, पंजाब, महाराष्ट्र , तेलांगना जैसे कई प्रांतों में जहां सजायाफ्ता बंदियों को हर तीन महीने पर नियमित 15 दिनों का फर्लो का प्रावधान है, वहीं वर्ष में एक बार 21 दिनों के पेरोल का भी नियम है। पर बिहार में अपनी या वृद्ध मां -पिता की बीमारी, परिजनों की मौत और लड़का-लड़की शादी तक में कोई नियमितता नहीं है। यही कारण है कि कई बार मांगने के बाद भी मेरे पिता जी को साढ़े 14वर्षो के अंतराल में कभी पेरोलनहीं मिला यह सरकार की मंशा दिखाने को काफी है।

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