बीजेपी से नाराज आरके सिंह बागी हुए, अमेरिका का नाम लेकर मांगा मोदी से इस्तीफा

Mar 08, 2026 01:22 pm ISTNishant Nandan लाइव हिन्दुस्तान, पटना
share

आरके सिंह ने लिखा, ‘भारत 140 करोड़ आबादी का एक महान देश है। उसे किससे सामग्री खरीदनी है, इसके लिए किसी से इजाजत लेने की आवश्यकता नहीं है। परंतु खाड़ी युद्ध के बाद भारत को रूस से खरीदे जा रहे तेल की मात्रा बढ़ाने की जरुरत पड़ी तो वो अमेरिका के पास अनुमति मांगने गया।’

बीजेपी से नाराज आरके सिंह बागी हुए, अमेरिका का नाम लेकर मांगा मोदी से इस्तीफा

कभी एनडीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे आरके सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। बीजेपी से इस्तीफा देने वाले आरके सिंह ने अब पूरी तरह से बागी तेवर अपना लिए हैं। पूर्व सांसद ने अमेरिका का नाम लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस्तीफा मांगा है। आरके सिंह ने अपने एक फेसबुक पोस्ट में दावा किया कि अमेरिका ने भारत पर दबाव डाला कि वो रूस से तेल खरीदना बंद कर दे। आरके सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ की भी याद दिलाई है।

आरके सिंह ने फेसबुक पोस्ट में लिखा,'दुनिया में भारत के स्तर को इस नरेंद्र मोदी की सरकार ने इतना नीचे गिरा दिय है जितना मैंने अपने 50 साल की सेवा में कभी नहीं देखा। हम रूस से तेल खरीदते रहे हैं क्योंकि रूसी तेल सस्ता है और रूस हमारा मित्र है। रूस-यूक्रेन लड़ाई का बहाना बनाकर अमेरिका भारत पर दबाव डाला कि रूस से तेल खरीदना बंद करें और अमेरिका से तेल खरीदें। यूरोप लगातार रूस से तेल और गैस खरीदता रहा है और अमेरिका ने कभी उसपर दबाव नहीं डाला कि वह इसे बंद करे या कम करे। खुद अमेरिका भी रूस से कई तरह का सामान खरीदता रहा है और उसे रोकने की बात नहीं करता है। भारत ने इसपर कोई सवाल नहीं उठाया। यह कमजोरी क्यों?

अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया। अंतरराष्ट्रीय प्रथा के अनुसार भारत को भी अमेरिकी सामग्री, जिसमें डिजीटल सामग्री भी शामिल है, पर उतना ही टैरिफ लगाना चाहिए था। लेकिन भारत ने अमेरिका के नाजायज कदम के खिलाफ न कुछ कहा और न ही कोई जवाबी टैरिफ लगाया। इस कमजोरी का क्या कारण है?

भारत 140 करोड़ आबादी का एक महान देश है। उसे किससे सामग्री खरीदनी है, इसके लिए किसी से इजाजत लेने की आवश्यकता नहीं है। परंतु खाड़ी युद्ध के बाद भारत को रूस से खरीदे जा रहे तेल की मात्रा बढ़ाने की जरुरत पड़ी तो वो अमेरिका के पास अनुमति मांगने गया। भारत जैसे महान देश के लिए यह एक शर्मिंदगी की बात है। अमेरिका ने सिर्फ 30 दिन के लिए अनुमति दी। भारतवासियों का सिर शर्म से झुक गया।

क्या हम अमेरिका के गुलाम हो गए हैं? प्रधानमंत्री अमेरिका से घबराते हैं, इसका क्या कारण है? कांग्रेस का कहना है कि एपस्टीन फाइलों में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी और अनिल अंबानी के साथ-साथ प्रधानमंत्री का भी नाम है और उसी के कारण अमेरिका प्रधानमंत्री से जो कहता है वही वे करते हैं। अर्थात प्रधानमंत्री ब्लैकमेल हो रहे हैं। क्या इसमें कोई सच्चाई है? यदि इसमें कोई सच्चाई है तो देश को शर्मिंदा करने के बजाए प्रधानमंत्री को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।'

Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News और Bihar News के साथ-साथ Patna News, Muzaffarpur News, Bhagalpur News और अन्य बड़े शहरों की ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।