
कल पीके की जन सुराज छोड़ी, आज बीजेपी के साथ दिखे; भोजपुरी सिंगर रितेश पांडे बदलेंगे पाला?
प्रशांत किशोर की जन सुराज के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले भोजपुरी सिंगर रितेश पांडेय ने पार्टी छोड़ दी। लेकिन अगले ही दिन वे दिल्ली में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेव के साथ दिखे। जिसके बाद उनके भाजपा में जाने की चर्चा सियासी गलियारों में तेज हो गई है।
भोजपुरी सिंगर रितेश पांडे क्या नई सियासी पारी शुरू करने वाले हैं। इस बात की चर्चा तब तेज हो गई जब प्रशांत किशोर की जन सुराज छोड़ने के अगले ही दिन वे दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेव के साथ नजर आए। जिसके बाद सियासी गलियारों में इस बात अकटलें लगने लगी हैं कि क्या अब रितेश भाजपा का दामन थाम सकते हैं। हालांकि इस मुलाकात के बाद उनका कोई बयान नहीं आया है। लेकिन चर्चा जरूर तेज हो गई है।
आपको बता दें बिहार चुनाव से पहले ही रितेश पांडे ने पीके की जन सुराज पार्टी ज्वाइन की थी। जन सुराज के अभियान से जुड़े थे और जमीनी स्तर पर संगठन के कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने गांव-गांव संवाद, जन संपर्क और संगठन विस्तार के काम में भाग लिया था। जन सुराज के टिकट के रितेश पांडे रोहतास जिले की करगहर विधानसभा सीट चुनाव लड़े थे। लेकिन, वो चुनाव हार गए थे। करगहर से जेडीयू उम्मीदवार वशिष्ठ सिंह ने 35676 वोटों से जीत की थी। वैसे
आपको बता दें भोजपुरी स्टार रहे मनोज तिवारी भी पहले सपा के टिकट पर गोरखपुर से लड़े बाद में बीजेपी में आए। रवि किशन भी कांग्रेस के टिकट पर जौनपुर से लोकसभा लड़े, बाद में वे भी बीजेपी में शामिल हो गए। बीजेपी के भोजपुरी सुपरस्टार्स में दिनेश लाल यादव निरहुआ इकलौते नेता हैं, जो सीधे भाजपा में आए और आते ही आजमगढ़ से लोकसभा लड़े, लेकिन अखिलेश यादव से हार गए। बाद में इसी सीट पर 2022 के उप-चुनाव में धर्मेंद्र यादव को हराकर पहली बार सांसद बने।
जन सुराज छोड़ने को लेकर रितेश पांडेय ने कहा कि यह फैसला व्यक्तिगत और राजनीतिक कारणों से लिया है। रितेश पांडेय ने ये भी साफ किया कि प्रशांत किशोर के प्रयासों और जन सुराज के मूल विचारों के प्रति उनके मन में सम्मान है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में वे खुद को इस अभियान के साथ आगे नहीं देख पा रहे थे। उन्होंने भविष्य में क्या कदम उठाएंगे, इस पर फिलहाल खुलकर कुछ कहने से परहेज किया है। बिहार विधान सभा चुनाव में पीके की जन सुराज एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई थी। 90 फीसदी से ज्यादा प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। फिलहाल अब दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष के साथ रितेश पांडे की मुलाकात ने नई सियासी चर्चा छेड़ दी है।





