Hindi NewsBihar NewsReels lovers beware Mobile phones causing popcorn brain syndrome know symptoms
रील्स के शौकीन सावधान! मोबाइल बना रहा पॉपकॉर्न ब्रेन सिंड्रोम का शिकार, रोग के लक्षण समझिए

रील्स के शौकीन सावधान! मोबाइल बना रहा पॉपकॉर्न ब्रेन सिंड्रोम का शिकार, रोग के लक्षण समझिए

संक्षेप:

मोबाइल पर घंटों गुजारने वाले युवा पॉपकॉर्न ब्रेन सिंड्रोम का शिकार हो रहे हैं। मोबाइल पर लगातार बदलती जानकारी और तेज रफ्तार कंटेंट से दिमाग एक जगह टिक नहीं पाता और विचार पॉपकॉर्न की तरह फूटने लगते हैं, इससे मानसिक थकान, एकाग्रता की कमी होती है।

Nov 24, 2025 12:11 pm ISTSudhir Kumar लाइव हिन्दुस्तान, भागलपुर, वरीय संवाददाता
share Share
Follow Us on

अगर आप घंटों मोबाइल चलाते रहते हैं और रील्स देखते हुए लगातार स्क्रॉलिंग की आदत है और बार-बार एप्स बदलकर देखते रहते हैं तो ये आपकी सेहत के लिहाज से खतरे की घंटी है। मोबाइल पर घंटों गुजारने वाले युवा पॉपकॉर्न ब्रेन सिंड्रोम का शिकार हो रहे हैं। जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग के प्रोफेसर एंड हेड डॉ. कुमार गौरव बताते हैं कि इन दिनों ओपीडी में पॉपकॉर्न मोबाइल सिंड्रोम के मरीज मिल रहे हैं।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

इस साल जनवरी 2025 से लेकर अबतक (अक्तूबर 2025 तक) पॉपकॉर्न ब्रेन सिंड्रोम के 113 मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं। इनमें से ज्यादातर युवा होते हैं, जिनकी उम्र 25 से 45 साल के बीच होती है। ऐसे मरीजों में पॉपकॉर्न ब्रेन सिंड्रोम के लक्षण मिले तो सबसे पहले उन्हें डिजिटल उपवास यानी मोबाइल पर कम-से-कम वक्त गुजारने और सप्ताह में दो दिन बिना मोबाइल के गुजारने की सलाह दी गई।

ये भी पढ़ें:बारात में लड़की का दुपट्टा खींचने पर बवाल, 50 पर केस; दूल्हा बोला- गहने छीने

मानसिक थकान, एकाग्रता में कमी इसका मुख्य लक्षण

सदर अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज कुमार मनस्वी बताते हैं कि मोबाइल पर लगातार बदलती जानकारी और तेज रफ्तार कंटेंट से दिमाग एक जगह टिक नहीं पाता और विचार पॉपकॉर्न की तरह फूटने लगते हैं, इससे मानसिक थकान, एकाग्रता की कमी होती है। इसे ही पॉपकॉर्न ब्रेन सिंड्रोम कहते हैं। स्थिति गंभीर होने पर व्यक्ति ब्रेन फॉग का शिकार हो सकता है। इसमें ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, भ्रम, याददाश्त की समस्या (चीजें भूल जाना), मानसिक थकान, और धीमे या अस्पष्ट विचार शामिल हैं।

डिजिटल डिटॉक्सिंग करें

इसके अलावा व्यक्ति को निर्णय लेने में परेशानी, चिड़चिड़ापन और मानसिक रूप से भारीपन या सुस्त महसूस हो सकता है। बकौल डॉ. मनस्वी, ये समस्या बिगड़ी जीवनशैली व आदतों की देन है। मोबाइल उपयोग को सीमित करना यानी डिजिटल डिटॉक्स और दिमाग को आराम देने के लिए योग करना जरूरी है। यदि व्यक्ति को भूलने की समस्या है तो मनोचिकित्सक से मिलकर सलाह लेनी चाहिए।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

लगातार रील्स या पोस्ट को स्क्रॉल करने वालों में पॉपकॉर्न ब्रेन सिंड्रोम मिल रहा है। अगर किसी काम को करने में मन न लगे तो चिकित्सक से मिलकर सलाह ले लेनी चाहिए। डॉ. कुमार गौरव, हेड मनोरोग विभाग

ये भी पढ़ें:ऑर्केस्ट्रा डांसर से छेड़छाड़ पर बहा खून, रोक रहे युवक की चाकू गोदकर हत्या
Sudhir Kumar

लेखक के बारे में

Sudhir Kumar
टीवी मीडिया और डिजिटल जर्नलिज्म में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। क्राइम, पॉलिटिक्स, सामाजिक और प्रशासनिक मामलों की समझ रखते हैं। फिलहाल लाइव हिन्दु्स्तान में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर बिहार के लिए काम करते हैं। इससे पहले ईटीवी न्यूज/News18 में बिहार और झारखंड की पत्रकारिता कर चुके हैं। इंदिरा गांधी नेशनल ओेपन यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन में पीजी किया है। और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, Bihar Shapath Grahan, Bihar Election Result 2025, Bihar Chunav Result, बिहार चुनाव 2025 , Bihar vidhan sabha seats , बिहार चुनाव एग्जिट पोल्स और बिहार चुनाव 2025 की खबरें पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।