राज्यसभा चुनाव में लॉटरी का गजब संयोग, ‘लव-कुश’ के बैलट से निकला भाजपा का दलित सांसद

Mar 17, 2026 02:30 pm ISTRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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Shivesh Ram BJP Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव में बिहार से एनडीए के 5वें कैंडिडेट शिवेश राम की जीत में दूसरी वरीयता का जादू चला। ये वोट नीतीश कुमार, नितिन नवीन और उपेंद्र कुशवाहा के बैलट से निकले।

राज्यसभा चुनाव में लॉटरी का गजब संयोग, ‘लव-कुश’ के बैलट से निकला भाजपा का दलित सांसद

Shivesh Ram BJP Rajya Sabha Election: गुमनाम कार्यकर्ता को मौन के साथ पार्टी की राजनीति को आगे बढ़ाने के इनाम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) समय पर मौका और पद देकर चौंकाती रहती है। बिहार में भाजपा के दलित नेता और राज्यसभा के नवनिर्वाचित सांसद शिवेश राम उसी कड़ी में एक नाम हैं। शिवेश की जीत में एक मजेदार राजनीतिक संयोग भी दिखा। शिवेश के वोट में पहले किस कैंडिडेट की दूसरी वरीयता का वोट गिना और जोड़ा जाए, इसे लेकर दो बार लॉटरी करनी पड़ी। बिहार की राजनीति में ‘लव-कुश’ के तौर पर स्थापित नीतीश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा का नाम लॉटरी में निकला और उनके बैलट को पहले गिना गया। नितिन नवीन को नीतीश और रामनाथ ठाकुर को कुशवाहा के बराबर पहली वरीयता के वोट मिले थे, इसलिए अधिकारियों को बराबर वोट वालों में पहले कौन तय करने के लिए लॉटरी करनी पड़ी।

राज्यसभा चुनाव के दौरान 5वीं सीट के लिए शिवेश राम और एडी सिंह के बीच लड़ाई में मतगणना का चरणवार हिसाब लाइव हिन्दुस्तान पर पहले भी दिया गया है। सहूलियत के लिए संक्षेप में समझ लीजिए कि पहली वरीयता के मतों की गिनती में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अमरेंद्रधारी सिंह उर्फ एडी सिंह से 700 वोट से पीछे शिवेश राम दूसरी वरीयता के मतों की गिनती से कैसे जीत गए। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष और सीएम नीतीश कुमार, भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बैलट से निकले सेकंड प्रिफरेंस के वोट से ही शिवेश राम की जीत सुनिश्चित हुई।

बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं। इसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के 202 हैं, जबकि इंडिया गठबंधन यानी महागठबंधन के 35 और इन दोनों गठबंंधनों से अलग 6 एमएलए हैं। राजद और कांग्रेस के कुल 4 विधायक फैसल रहमान, मनोहर प्रसाद सिंह, मनोज बिश्वास और सुरेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने वोट नहीं डाला, जो शिवेश राम के पक्ष में गया। कुल 239 वोट गिरे। राज्यसभा के चुनाव नियमों के मुताबिक 239 वोट पर जीत का कोटा 3984 तय हुआ। पहली वरीयता के एक मत की कीमत 100 गिनी जाती है। एनडीए ने अपने विधायकों में पहली वरीयता के मतों का बंटवारा इस तरह किया था कि नीतीश और नितिन को 44-44, कुशवाहा और रामनाथ को 42-42 और शिवेश को 30 वोट मिले।

पहली वरीयता की गिनती में नीतीश और नितिन नवीन को 4400-4400 वोट आए और 3984 का कोटा पार करने के कारण दोनों पहले राउंड में ही जीत गए। उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर के पास 4200-4200 वोट थे और ये दोनों भी कोटा से ज्यादा वोट लाने के आधार पर पहले चक्र में जीत गए। शिवेश के पास 30 विधायकों के समर्थन के कारण 3000 वोट था, जो जीत के लिए जरूरी वोट से कम था। राजद के एडी सिंह को 37 विधायकों ने वोट दिया तो उनके पास 3700 वोट थे, लेकिन ये भी जीत के कोटा से नीचे थे। एडी सिंह को राजद और कांग्रेस के 3 और विधायकों ने वोट दे दिया होता तो वो 4000 वोट लाकर जीत जाते। लेकिन एनडीए के चुनाव प्रबंधन ने इस लेकिन को राजद के नेता तेजस्वी यादव और उनके अरबपति कैंडिडेट एडी सिंह के लिए अफसोस में बदल दिया।

एनडीए के 172 विधायकों ने शिवेश राम को दूसरी वरीयता का वोट दिया

एनडीए ने नीतीश, नितिन, उपेंद्र और रामनाथ को पहली वरीयता के वोट देने वाले 172 विधायकों से बिना किसी चूक और भूल के शिवेश राम को दूसरी वरीयता का वोट दिलवाया था। राज्यसभा की 5 में 4 सीट का विजेता तय हो चुका था। 5वीं सीट पर कोटा पूरा नहीं करने के कारण दूसरी वरीयता के मतों की गिनती हुई, जिससे शिवेश और एडी सिंह में किसी एक की जीत होनी थी।

नीतीश कुमार और नितिन नवीन के पास 4400-4400 वोट थे तो पहले किसके बैलट पेपर से दूसरी वरीयता के वोट गिनें, ये सवाल पैदा हुआ। लॉटरी से नीतीश का नाम निकला। नीतीश के 4400 वोट में कोटा 3984 घटा दिया गया। इससे निकले 416 नंबर में वोट देने वाले विधायकों की संख्या 44 से भाग देने पर 9.45 आया। नीतीश के बैलट पर दूसरी वरीयता के एक वोट का मूल्य 9 आया।

नियम के मुताबिक अब 9 को दूसरी वरीयता का वोट शिवेश को देने वाले विधायकों की संख्या यानी 44 से गुणा कर दिया गया। नंबर आया 396। शिवेश के 3000 वोट में सीधे 396 जुड़ गया। वोट हो गया 3396। नीतीश के बाद 4400 वोट वाले नितिन नवीन के बैलट की दूसरी वरीयता जोड़ी गई तो वहां से भी 396 वोट आया। शिवेश के 3396 में जुड़कर वोट बढ़कर 3792 पर पहुंच गया। शिवेश अब एडी सिंह से आगे हो गए, क्योंकि दूसरी वरीयता का वोट उनको नहीं मिला था और वह 3700 पर ही अटके थे। लेकिन गिनती जारी रही क्योंकि शिवेश को कोटा 3984 हासिल नहीं हुआ था।

रामनाथ ठाकुर का बैलट छूने की नौबत ही नहीं आई; नीतीश, नितिन और कुशवाहा के बैलट में दूसरी वरीयता के वोट से ही जीत गए शिवेश राम

इसके बाद 4200-4200 वोट लाने वाले उपेंद्र कुशवाहा और रामनाथ ठाकुर में पहले किसके बैलट से सेकंड प्रिफरेंस के वोट गिने जाएं, इसके लिए फिर लॉटरी हुई। इस बार कुशवाहा का नाम आया। कुशवाहा के बैलट पर दूसरी वरीयता के एक वोट का मूल्य तय करने के लिए चुनाव नियमों के तहत गणना हुई और नंबर आया 5। इसे वोट देने वाले 42 विधायकों से गुणा करके नंबर निकला 210। ये 210 सीधे शिवेश के 3792 में जुड़ा और उनका कुल वोट 4002 पर पहुंच गया। शिवेश 3984 का कोटा लांघकर 4002 वोट के साथ विजयी घोषित हो गए। रामनाथ ठाकुर का बैलट गिना नहीं गया, लेकिन उनको पहली वरीयता का वोट देने 42 विधायकों ने भी अगर शिवेश को दूसरी वरीयता का वोट दिया है तो उसे जोड़कर नंबर 4212 हो जाता। कुशवाहा के बैलट की गिनती से ही शिवेश की जीत के साथ 5 सीट का विजेता मिल गया, इसलिए गिनती रोककर विजेता घोषित कर दिए गए।

Ritesh Verma

लेखक के बारे में

Ritesh Verma
रीतेश वर्मा पत्रकारिता में 25 साल से अलग-अलग भूमिका में अखबार, टीवी और डिजिटल में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण के साथ बिहार में 5 साल तक जिला स्तर की प्रशासनिक और क्राइम रिपोर्टिंग करने के बाद रीतेश ने आईआईएमसी, दिल्ली में दाखिला लेकर पत्रकारिता की पढ़ाई की। एक साल के अध्ययन ब्रेक के बाद रीतेश ने विराट वैभव से दोबारा काम शुरू किया। फिर दैनिक भास्कर में देश-विदेश का पेज देखा। आज समाज में पहले पन्ने पर काम किया। बीबीसी हिन्दी के साथ आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के तौर पर जुड़े। अखबारों के बाद रीतेश ने स्टार न्यूज के जरिए टीवी मीडिया में कदम रखा। रीतेश ने टीवी चैनलों में रिसर्च डेस्क पर लंबे समय तक काम किया है और देश-दुनिया के विषयों पर तथ्यपरक जानकारी सहयोगियों को आगे इस्तेमाल के लिए मुहैया कराई है। सहारा समय और इंडिया न्यूज में भी रीतेश रिसर्च का काम करते रहे। इंडिया न्यूज की पारी के दौरान वो रिसर्च के साथ-साथ चैनल की वेब टीम के हेड बने और इनखबर न्यूज पोर्टल को बतौर संपादक शुरू किया। लाइव हिन्दुस्तान के साथ एडिटर- न्यू इनिशिएटिव के तौर पर पिछले 6 साल से जुड़े रीतेश फिलहाल उत्तर प्रदेश और बिहार की खबरों और दोनों राज्यों की टीम को देखते हैं। और पढ़ें
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