अगस्त 2024 में रेड, फरवरी 2026 में एफआईआर; बिजली विभाग में गड़बड़झाला की लिस्ट लंबी है

Sudhir Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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सरैया विद्युत सहायक अभियंता ओजैर आलम ने पारू मोहजम्मा गांव में पांच अगस्त 2024 बिंदेश्वर राय के यहां छापेमारी की थी। बिजली विभाग के अधिकारी व कर्मचारी इस छापेमारी को डेढ़ साल तक दबाए रखे।

अगस्त 2024 में रेड, फरवरी 2026 में एफआईआर; बिजली विभाग में गड़बड़झाला की लिस्ट लंबी है

बिहार के मुजफ्फरपुर में बिजली विभाग में छापेमारी और कार्रवाई में खेल उजागर हुआ है। एक केस में छापेमारी के डेढ़ साल बाद एफआईआर दर्ज कराने का मामला उजागर हुआ। कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें रेड के महीनों बाद केस दर्ज कराए गए। पुलिस एफआईआर में देरी का कारण पूछ रही है तो विभाग में हड़कंप मच गया है क्योंकि, इससे आरोपी को फायदा तो विभाग को नुकसान की संभावना है।

सरैया विद्युत सहायक अभियंता ओजैर आलम ने पारू मोहजम्मा गांव में पांच अगस्त 2024 बिंदेश्वर राय के यहां छापेमारी की थी। स्मार्ट मीटर बाइपास कर बिजली चोरी का मामला बताकर मीटर आदि जब्त किया गया। लेकिन, बिजली विभाग के अधिकारी व कर्मचारी इस छापेमारी को डेढ़ साल तक दबाए रखे। आरोप है कि मैनेज का खेल जब नहीं हुआ तो डेढ़ साल के बाद 16 फरवरी 2026 को एफआईआर दर्ज कराई गई।

एफआईआर में खेल

इसी तरह पारू के मधुरपट्टी में अनिल सिंह, शंकर राम, बहदीनपुर की गीता देवी के यहां बीते साल जून महीने में ऊर्जा चोरी को लेकर बिजली विभाग के अधिकारियों ने छापेमारी की। इसकी एफआईआर सात महीने बाद जनवरी 2026 में दर्ज कराई गई। ऊर्जा चोरी की एफआईआर में इस खेल से बिजली विभाग की छापेमारी पर सवाल उठ रहे हैं। विलंब से दर्ज किए गए मामलों का स्पष्ट कारण भी एफआईआर में नहीं बताई जा रहा है।

आरोपी को लाभ

नियम है कि जिस दिन बिजली चोरी की छापेमारी हो, उसी दिन एफआईआर दर्ज कराई जाए, ताकि ऊर्जा चोरी की वीडियो रिकॉर्डिंग ई-साक्ष्य एप पर अपलोड किया जा सके। छापेमारी के दिन ही एफआईआर दर्ज नहीं होने से बचाव पक्ष इसे कोर्ट में मुद्दा बना रहे हैं। छापेमारी को संदिग्ध श्रेणी का बताकर इससे राहत की मांग कर रहे हैं। साथ ही बिजली विभाग के ऊर्जा चोरी अभियान को लेकर हो रही छापेमारी ही संदिग्ध बन जा रही है।

रेड के दिन एक भी एफआईआर नहीं

इस साल जनवरी से लेकर अब तक बिजली चोरी की 250 से अधिक एफआईआर जिले के सभी थानों में दर्ज कराई गई है। लेकिन, एक भी एफआईआर छापेमारी के दिन दर्ज नहीं हुई। कोई एक सप्ताह के बाद तो कोई एक महीने के बाद दर्ज कराई गई है। एफआईआर में विलंब के पीछे कभी बिजली विभाग के अधिकारी तो कभी पुलिस की लेटलतीफी कारण बनी है। इससे कोर्ट में छापेमारी का वीडियो सही ढंग से पेश नहीं हो पा रहे हैं।

बोले एक्सपर्ट

नियम है कि जिस दिन छापेमारी की गई, उसी दिन संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज की जाए। यदि एफआईआर नहीं होती है तो उसका सनहा दर्ज हो और विलंब के कारण बताते हुए अगले दिन एफआईआर दर्ज कराई जाए। यदि एफआईआर में विलंब का कारण नहीं बताया गया है तो पूरी कार्रवाई संदिग्ध श्रेणी की बन जा रही है। इस पर सवाल उठना लाजमी है। -डॉ. संगीता शाही, एपीपी, व्यवहार न्यायालय, मुजफ्फरपुर

समीक्षा में उठे मुद्दे

वरीय पुलिस अधिकारियों ने इसको लेकर समीक्षा की है। इसमें विलंब से दर्ज की गई एफआईआर का स्पष्ट कारण एफआईआर के पेपर में ही अंकित करने का निर्देश दिया गया है।

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लेखक के बारे में

Sudhir Kumar

टीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।

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