
काला कपड़ा और मास्क पहनने वाली पुष्पम प्रिया, बिहार चुनाव में फिर ठोकी ताल; कितना असर
पुष्पम की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीतिक रही है। उनके दादा प्रोफेसर उमाकांत चौधरी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उनके चाचा विनय कुमार चौधरी जदयू के नेता हैं।
बिहार की राजनीति में एक नया चेहरा उभर रहा है। ब्रिटेन से पढ़ाई करके लौटीं पुष्पम प्रिया चौधरी ने फिर ताल ठोकी है। वह पूर्व जदयू विधायक विनोद कुमार चौधरी की बेटी हैं और अपने राजनीतिक दल 'द प्लूरल्स पार्टी' से बिहार विधानसभा चुनाव में उतर रही हैं। दरभंगा से चुनाव लड़ रही पुष्पम ने 2020 में इस पार्टी की स्थापना की और तब खुद को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी घोषित किया था। काले कपड़ों और मास्क में नजर आने वाली पुष्पम ने वादा किया कि वे मास्क तभी हटाएंगी, जब कोई चुनाव जीत लेंगी। प्लूरल्स पार्टी इस बार सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिसमें आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

पुष्पम प्रिया की राजनीतिक यात्रा पारंपरिक बिहारी राजनीति से अलग है, जो जाति और धर्म के इर्द-गिर्द घूमती है। उनकी पार्टी का नाम प्लूरल्स यह दर्शाता है कि सभी जाति और धर्म के लोग एक साथ शासन करें। पुष्पम ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा, 'प्लूरल्स का मतलब है कि सभी लोग, चाहे किसी भी जाति या धर्म के हों, एकजुट होकर विकास के लिए काम करें।' उन्होंने अपनी काली पोशाक के बारे में कहा कि नेता सफेद क्यों पहनते हैं? मुझे नहीं पता, इसलिए मैं काला पहनती हूं। वह पढ़े-लिखे नेताओं की जरूरत पर जोर देती हैं।
राजनीति से जुड़े हुए परिवार के लोग
पुष्पम की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी राजनीतिक रही है। उनके दादा प्रोफेसर उमाकांत चौधरी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उनके चाचा विनय कुमार चौधरी जदयू के नेता हैं और 2020 में बेनीपुर से विधायक चुने गए। पुष्पम ने दरभंगा में स्कूली शिक्षा पूरी की और पुणे से ग्रेजुएशन किया। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर्स की डिग्री हासिल की। राजनीति में आने से पहले वे बिहार सरकार के पर्यटन और स्वास्थ्य विभागों में सलाहकार के रूप में काम कर चुकी हैं।
पिछले चुनाव में भी ठोकी थी ताल
2020 में द प्लूरल्स पार्टी के गठन के बाद पुष्पम प्रिया ने सभी प्रमुख अखबारों में विज्ञापन दिया था। इसके जरिए उन्होंने अपनी मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवारी की घोषणा कर दी। तब उनकी पार्टी 148 सीटों पर ही चुनाव लड़ पाई थी। इस बार 'सिटी' चुनाव चिह्न के साथ उनकी पार्टी पूरे दमखम से मैदान में है। वह राष्ट्रीय राजनीति पर अखिलेश यादव को राहुल गांधी से अधिक गंभीर नेता बताती हैं। उन्होंने नीतीश कुमार को अब तक का सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री भी करार दिया। प्रशांत किशोर को रणनीतिकार की भूमिका तक सीमित रहने की सलाह देती हैं। यह देखना होगा कि बिहार में 2025 के चुनाव में उनकी पार्टी कितना असर डाल पाती है।





