
अनाथ लड़की सजनी के पिता बने डॉ. अनिल, हिंदू पद्धति से पिंकी गुप्ता ने किया कन्यादान
-फोटो-सामूहिक विवाह में कन्यादान करती हुई डॉ पिंकी गुप्ता। पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। पूर्णिया का कलाभवन विवाह परिसर में सनातन सेवक संघ और डॉ.
पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। पूर्णिया का कलाभवन विवाह परिसर में सनातन सेवक संघ और डॉ. अनिल कुमार गुप्ता व उनकी पत्नी पिंकी गुप्ता ने 11 जोड़ों का सामूहिक विवाह कराया। इस दौरान सोमवार की रात एक अनोखा विवाह और एक बेहत सुखद संयोग भी हुआ। विवाह कार्यक्रम में जहां हर जोड़े के माता-पिता कन्यादान करने के लिए मौजूद था। वहीं इस सामूहिक विवाह में एक बहुत ही निर्धन जोड़ा ऐसा भी था, जिसके न वर पक्ष से लोग थे और न ही कन्यादान करने के लिए वधू के माता-पिता और भाई ही मौजूद थे। वैदिक रीतियों के अनुसार हो रहे विवाह में जब कन्यादान और सिंदूर की रस्म का वक्त आया और लड़की के घर वालों की जरूरत पड़ी तब जाकर सबको यह पता चला कि शादी समारोह में उनका कोई नहीं है।

इस जोड़े के अकेले होने की जानकारी मिलने के बाद डॉ. अनिल कुमार गुप्ता और उनकी धर्मपत्नी पिंकी गुप्ता सामने आए और उन्होंने लड़की के माता-पिता बनने का निर्णय लिया। -कन्यादान करते हुए भावुक हुई पिंकी गुप्ता, कन्यादान करते हुए नम हुई आंखें : --- -वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जब शंख लेकर वर के हाथ में बेटी संजनी कुमारी का हाथ डॉक्टर अनिल कुमार गुप्ता और उनकी पत्नी पिंकी गुप्ता ने दिया तो दोनों की ही आंखे नम हो गई। कन्यादान करते वक्त पिंकी गुप्ता की आंखों से बह रहे आंसू न केवल सामाजिक समरसता का संदेश रहे थे बल्कि यह भी बता रहे थे कि बेटी किसी एक परिवार या व्यक्ति की नहीं होती। वह पूरे समाज की होती है। और उसकी गृहस्थी बसाने में पूरे समाज का योगदान होता है। कन्या जन्म देने वाले से ज़्यादा पुण्य का काम कन्या का विवाह करना होता है । डॉक्टर गुप्ता ने कहा कि बेटी का कन्यादान करके वे भावुक महसूस कर रहे हैं। वहीं पिंकी गुप्ता ने कहा कि कन्यादान करने का उन्हें ईश्वर ने जो अवसर दिया वे। इसके लिए वह सदा भगवान की आभारी रहेंगी। पिंकी गुप्ता ने कहा कि बेटी का घर बसे इससे बढ़कर मां-बाप के लिए और कोई सुखद अनुभूति नहीं होती।

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