अब बूढ़ी मां की परवरिश कौन करेगा...
बसगाढ़ा हादसा: पूर्णिया पूर्व, एक संवाददाता। जब घर का एकमात्र कमाने वाला ही इस दुनिया से चला जाए तो पीछे छूटे परिवार का सहारा कौन बनेगा। यह सवाल हर

पूर्णिया पूर्व, एक संवाददाता।जब घर का एकमात्र कमाने वाला ही इस दुनिया से चला जाए तो पीछे छूटे परिवार का सहारा कौन बनेगा। यह सवाल हर किसी के मन में उठ रहा है। बसगाढ़ा सड़क हादसे में 32 वर्षीय पिकअप मालिक सह चालक चिंतामणी महतो की मौत के बाद यही स्थिति उनके परिवार की हो गई है। चिंतामणी महतो अपने पीछे 65 वर्षीय मां सीता देवी, पत्नी पिंकी देवी और तीन छोटे-छोटे बच्चे 9 वर्षीय कुमकुम कुमारी, 7 वर्षीय आदर्श कुमार और 5 वर्षीय अर्मिता कुमारी को छोड़ गए हैं। अब इन सबकी परवरिश कैसे होगी, यह सोचकर गांव के लोग भी चिंतित हैं।
मृतक चार भाइयों में सबसे छोटे थे। एक भाई की पहले ही सड़क हादसे में मौत हो चुकी है जबकि पिता का भी देहांत हो चुका है। ऐसे में पूरे परिवार की जिम्मेदारी चिंतामणी के कंधों पर ही थी। वह पिछले दस वर्षों से गाड़ी चलाकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। हाल ही में उन्होंने कर्ज लेकर एक पिकअप वाहन खरीदा था और उसी के सहारे अपने परिवार को बेहतर भविष्य देने का सपना देख रहे थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। रविवार की रात जब उनका शव मझुआ गांव पहुंचा, तो पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोगों की आंखें भी नम हो गईं। पंचायत समिति सदस्य गुड्डू महतो ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गौरा पंचायत के मझुआ और सुहवा गांव के सभी मृतक आश्रितों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
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