कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ में मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण संपन्न, मिला प्रमाण पत्र
जलालगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र में मशरूम उत्पादन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया और सभी को प्रमाण पत्र दिए गए। कार्यक्रम में मशरूम के पोषण मूल्य, महत्व और रोजगार सृजन की संभावनाओं पर चर्चा की गई। प्रशिक्षिका ने विभिन्न प्रकार के मशरूम के उत्पादन की तकनीक सिखाई।

जलालगढ़, एक संवाददाता। कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ परिसर में मशरूम उत्पादन विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का बुधवार को समापन हो गया। यह प्रशिक्षण 8 जून से शुरू हुआ था जिसमें 25 महिला एवं पुरुष प्रतिभागियों ने भाग लिया। समापन अवसर पर सभी प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। प्रशिक्षण कार्यक्रम में केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. के. एम. सिंह ने मशरूम के पोषण मूल्य, दैनिक जीवन में इसके महत्व तथा रोजगार सृजन की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मशरूम में प्रचुर मात्रा में विटामिन, मिनरल एवं प्रोटीन पाए जाते हैं, जो सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए लाभदायक हैं।
इसके नियमित सेवन से कुपोषण जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलती है तथा कई गंभीर बीमारियों से बचाव में भी यह सहायक माना जाता है। प्रशिक्षण की प्रशिक्षिका एवं कीट वैज्ञानिक अनामिका कुमारी ने प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार के मशरूम की जानकारी देते हुए ऑयस्टर, बटन एवं दूधिया मशरूम के वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन की तकनीक सिखाई। उन्होंने प्रायोगिक प्रशिक्षण के माध्यम से मशरूम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया तथा मशरूम स्पॉन तैयार करने की विधि की भी जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों ने बताया कि प्रशिक्षण का उद्देश्य युवा किसानों, महिलाओं एवं प्रगतिशील किसानों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना तथा उनकी आय में वृद्धि के लिए आधुनिक कृषि आधारित उद्यमों को बढ़ावा देना है।
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