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सीनेट सदस्यों के तेवर से सीनेट की बैठक का मिजाज रहा गर्म

हिन्दुस्तान टीम,पूर्णियाNewswrap
Thu, 28 Oct 2021 03:50 AM
सीनेट सदस्यों के तेवर से सीनेट की बैठक का मिजाज रहा गर्म

पूर्णिया। हिन्दुस्तान संवाददाता

स्थापना के करीब चार साल बाद हुई पूर्णिया विश्वविद्यालय के पहली एतिहासिक बैठक में सीनेट सदस्यों के तेवर से सीनेट की बैठक का मिजाज दोनों सत्र में गर्म रहा। नियम-परिनियमों का उल्लंघन के मामले में पूर्व कुलपति प्रो. राजेश सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को लेकर सीनेट सदस्यों ने आवाज उठायी। साथ ही छात्र-छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले मामले में भी कार्रवाई करने से पीछे हटने पर पूर्णिया विश्वविद्यालय के कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त की गयी। सीनेट सदस्यों ने स्पष्ट शब्दों में पूर्णिया विश्वविद्यालय के वित्तीय अनियमितता को लेकर आगाह किया और कहा कि अभी एक लोकायुक्त जांच चल रही है। यहीं हालात रहे तो और भी कई तरह के जांच होंगे। लोकायुक्त की जांच के उपरांत पूर्णिया विश्वविद्यालय के क्रियाक्लाप पर सवाल उठ गया है।

पहले सत्र में प्रश्नकाल में एमएलसी डॉ. संजीव कुमार सिंह के साथ सीनेट सदस्यों में राकेश कुमार,शमी इकबाल,शिवशंकर सरकार, डॉ. संजीव कुमार सिंह व अधिवक्ता राजीव शरण ने अपनी-अपनी बातों को सीनेट में गंभीरतापूर्वक रखा और विश्वविद्यालय के विकास के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाने की जरुरत पर बल दिया। इस क्रम में अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति, वित्तीय अनियमितता और शैक्षणिक अराजकता को लेकर सदन में सीनेट सदस्यों ने पूर्णिया विश्वविद्यालय प्रशासन को घेरने का प्रयास किया। सदन में सीनेट सदस्यों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली को लेकर खूब खरी-खोटी सुनाई। पहले सत्र में सीनेट सदस्यों के सवालों के सामने विश्वविद्यालय प्रशसन के पसीने छुटते नजर आये। विशेषकर सीनेट हॉल में महात्मा गांधी, राज्य के मुख्यमंत्री और राज्यपाल की तस्वीर नहीं होने पर गहरी नाराजगी जतायी और सदन में जोरशोर के साथ मामला उठाया। पहले सत्र में कुलपति के अध्यक्षीय संबोधन के उपरांत सीनेट सदस्यों को अपनी-अपनी बात सदन में रखने का मौका दिया गया। वहीं एमएलसी डॉ. संजीव कुमार सिंह ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की व्यवस्था पारदर्शी बनाने पर बल दिया और विश्वविदयालय के विकास के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन से साकारात्मक प्रयास करने की अपील की। उनके पूर्व कुलपति प्रो. राजेश सिंह के काल में नियम-परिनियमों की हुए उल्लंघन के मामले में छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ होने पर गहरी नाराजगी जतायी और सवाल किया कि पूर्व कुलपति प्रो. राजेश सिंह के खिलाफ लोकायुक्त की जांच चल रही है। लोकायुक्त जांच वित्तीय मामलों पर चल रही है, वही प्रो. राजेश सिंह ने सीमांचल के सैकड़ों छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया। आखिर इस मामले में वर्तमान विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा पूर्व कुलपति के खिलाफ मामला दर्ज क्यों नहीं करवाई जा रही है। क्यों आराजक स्थिति पैदा करने वाले प्रो. राजेश सिंह के खिलाफ वर्तमान विश्वविद्यालय प्रशासन प्राथमिकी दर्ज नहीं करवा रहा है। सीनेट सदस्य राकेश कुमार ने अतिथि शिक्षकों की बहाली में धांधली का मुद्दा उठाया और इस मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर ज्ञापन दिये जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी जतायी। राकेश कुमार ने महाविद्यालयों में पठन-पाठन के स्तर को लेकर दु:ख प्रकट करते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षक और प्राचार्य को अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन ईमानदारपूर्वक करना चाहिए। शिक्षक और प्राचार्य अगर अपने उत्तरदायित्व के प्रति सजग नहीं होंगें, तो महाविद्यालयों में पठन-पाठन का स्तर में सुधार कैसे संभव है। डॉ. संजीव कुमार सिंह ने कहा कि सीनेट की यह व्यवस्था भारत के अंदर स्थापित प्रजातंत्र के अधीन है और सभी की सामाजिक जिम्मेदारियां हैं। सीनेट से उन्होंने निवेदन किया कि वेतन संबंधित विषयों पर चिंतन करते हुए इनके भुगतान को सुनिश्चित किया जाए। सामाजिक व्यवस्था के तहत इस विषय पर जरूर चिंतन किया जाए कि गिरती हुई शिक्षा व्यवस्था, जो विगत 20- 25 वर्षों से हमारे सामने आया है। वर्तमान समय में संकल्प लें कि उत्तरोत्तर यहां शिक्षण व्यवस्था में कैसे गुणात्मक सुधार संभव है इस विषय पर चर्चा अवश्य करें। जितने भी कोचिंग संस्थान हैं ,उनकी वृद्धि सिर्फ इसलिए हो रही है कि उसके समानांतर में हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में सफलता हासिल नहीं कर पाए। उत्तरोत्तर शिक्षा कैसे सुदृढ़ हो व गुणात्मक वृद्धि कैसे हो इसको एजेंडे में लिया जाना चाहिए। सीनेट की बैठक प्रत्येक वर्ष तीन से चार होनी आवश्यक है। उन बैठकों के माध्यम से मॉनिटरिंग कैसे करें। इसके लिए कोई स्पेशल सेल बने और जो कुलपति के नियंत्रण में हो और उस सेल में सीनेट के कुछ लोगों को भी लिया जाना चाहिए जो समय-समय पर यह तय कर सकें कि गुणात्मक शिक्षा को हम आगे बढ़ा पा रहे हैं अथवा नहीं। सरकार के द्वारा राशि दी जाती है तो उन राशियों का जिन जिन कार्यों के लिए आवंटन होता है, कुलपति के स्तर पर यह सुनिश्चित होना चाहिए कि उन राशियों का व्यय नियमानुसार हो अर्थात उसके लिए उन सारे कागजात सारे रिकॉर्ड जो नियमावली में वर्णित है, उसका भी संधारण अत्यावश्यक है। शिवशंकर सरकार ने अतिथि शिक्षक की नियुक्ति का मामला के साथ वित्तीय अनियमितता और कॉलेजों में पठन-पाठन को लेकर सदन में सवाल उठाये। शमी इकबाल ने अल्पसंख्यक समुदाय के लिए छात्रावास बनाने के लिए डीएस कॉलेज में जमीन देने का प्रस्ताव रखा। साथ ही उर्दू को राज्य में दूसरी भाषा का दर्जा होने के बाद भी उर्दू व हिन्दी भाषा में प्रश्नपत्र नहीं होने पर आपत्ति जतायी। साथ ही उर्दू भाषा विषय में 17 शिक्षकों का पद रिक्त रहने की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की।

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