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17 जनवरी, 2021|6:29|IST

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महानंदा नदी के भीषण कटाव से 100 साल पुराना आसज़ा ईदगाह का अस्तित्व समाप्त.

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प्रखंड से होकर बहने वाली कनकई व महानंदा दोनों प्रमुख नदियो से कटाव जारी है। इस कटाव की जद में आकर जहा एक ओर दर्जनो परिवार विस्थापित होते जा रहे है वही वर्षो पुराने धार्मिक स्थलों का भी कटाव के कारण अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है। गुरुवार की सुबह इसी नदी के प्रकोप से इसके मुहाने बसे कनफलिया पंचायत के अन्तर्गत आने वाला सौ साल पुराना आसजा ईदगाह भी नदी में विलीन हो गया। ईदगाह के इमाम मौलवी यूसुफ साहब ने बताया कि लगभग सौ साल पुराने इस ईदगाह का पक्कीकरण1996 में हुआ था। साल 2000 में मौलवी फरीद ने उन्हें इमामती सौंपा था। इस ईदगाह में आसजा गांव के अलावे इसके आसपास के आधा दर्जन से अधिक गांव गनफलिया, चुनामाड़ी, बौलान,अभयपुर, काशीबाड़ी, पांकी से भी लोग बड़ी शिद्दत के साथ आकर नमाज पढ़ते थे। वही पंचायत मुखिया प्रतिनिधि मो. अनजार, मौलवी मिन्नातुल्ला, काड़ी अवेश, मौलवी आसिफ, काड़ी एहतेशाम, मौलवी अब्दुस सलाम आदि ने बताया कि जिस तरह से कटाव हो रहा है उससे ईदगाह के बगल कब्रिस्तान का कुछ बचा भाग भी नदी में विलीन हो जाएगा। उसके बाद गांव काकटाव शुरू होगा। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन के माध्यम से जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर दिलाते हुए कटाव निरोधक कार्य किए जाने की मांग कर रहे हैं।

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  • Web Title:The 100-year-old Asza Idgah ceased to exist due to the erosion of the Mahananda River