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थैलेसीमिया रोगी के परिजन भटक रहे, हमें खून चाहिए

सदर अस्पताल में आने वाले थैलेसीमिया रोगी के परिजन खून के लिए भटक रहे हैं। हमें अपने बच्चे के लिए खून चाहिए। केनगर रामपुर के निवासी नाजमी खातुन अपने डेढ़ साल के पुत्र मो. अरशद के लिए खून चढ़ाने के लिए भटक रही हैं। सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में उसे अपने बच्चे के लिए खून मांगते हुए देखा गया। उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताई की बच्चे को थैलेसीमिया रोग है। हर एक से डेढ़ माह के बाद एक यूनिट खून लगता है। पति कमाने के लिए बाहर रहते हैं। घर में पुरुष सदस्य नहीं है। खुद तीन बार ब्लड दे चुके हैं। अब खून देने के लिए मेरे पास कोई रास्ता नहीं है। यहां कहा जा रहा है कि अभी खून की कमी है। इसलिए कोई न कोई व्यवस्था करनी होगी। वे शनिवार को तीन बजे तक खून के लिए दौड़ लगा रही थी। दरअसल जितनी परेशानी रोगी के परिजन को खून की है। उतनी हीं परेशानी रक्त संग्रह केन्द्र को भी है। जरूरत के हिसाब से रक्त का भंडार नहीं है। अभी पांच से दस यूनिट रक्त है। हालांकि विभाग के कर्मी बताते हैं कि अररिया जिले से 33 यूनिट रक्त आया है। एक-दो दिनों में कुछ परेशानी कम हो जाएगी।सिविल सर्जन डॉ. मधुसूदन प्रसाद ने बताया कि थैलेसीमिया के रोगी की संख्या के अनुपात में यहां रक्त संग्रह नहीं है। थैलेसीमिया रोगी को प्रत्येक माह रक्त की जरूरत होती है। कुल मिलाकर खपत के अनुरूप रक्त संग्रह नहीं हो पाता है। ऐसे में प्रत्येक दिन रक्त यूनिट की संख्या में कमी आ जाती है। रक्तदान शिविर तीन चार माह में एक बार लगता है। ऐसे में जब तक रक्त एक्सचेंज की सुविधा पर जोर नहीं होगा। यह समस्या लगी रहेगी। इसके लिए सामाजिक संस्थानों को भी आगे आना होगा।

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  • Web Title: Thalassemia s family is wandering we need blood in purnea