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मेडिकल कॉलेज के प्रसव कक्ष का एसओपी बनेगा

-नवजात शिशु मृत्यु दर पर में कमी को लेकर एक्शन प्लान तैयार पूर्णिया, वरीय संवाददाता। पूर्णिया में नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाने को लेकर एक्शन...

मेडिकल कॉलेज के प्रसव कक्ष का एसओपी बनेगा
हिन्दुस्तान टीम,पूर्णियाFri, 01 Dec 2023 01:15 AM
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पूर्णिया, वरीय संवाददाता।
पूर्णिया में नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाने को लेकर एक्शन प्लान तैयार कर लिया गया है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, दिल्ली से ईनक्लीन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली, एम्स पटना, मेडिकल कॉलेज पूर्णिया एवं यूनिसेफ के सहयोग से पूर्णिया जिले को भारत में नवजात शिशु मृत्यु दर को सिंगल डिजिट में लाने के लिए एक्सपर्टी के द्वारा एक्शन प्लान तैयार किया गया है। नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए प्रसव कक्ष का एसओपी तैयार किया जायेगा। स्टैंटर्ड आपरेटिंग प्रोटोकाल (एसओपी) के मातहत कार्य किए जाएंगे। जिलाधिकारी कुंदन कुमार के मुताबिक भारत में केवल दो जिले को नवजात शिशु मृत्यु दर के कारणों का पता लगाने और इसे कम करने के लिए शोध करने हेतु चिह्नित किया गया है। इसमें एक छत्तीसगढ़ राज्य का बीजापुर और दूसरा बिहार राज्य का पूर्णिया जिला है। यह हमारे लिए एक अवसर है कि हम साथ मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं को सामुदायिक स्तर पर सुदृढ करने हेतु कार्य करें। ताकि सभी किशोरी, गर्भवती महिला एवं बच्चों को लाभ मिल सके तथा नवजात शिशु मृत्यु दर में आवश्यक कमी लाई जा सके। प्रसव कक्ष के लिए एक्सपर्टीज को एसओपी तैयार करने के लिए कहा गया है। एसओपी के तहत निर्धारित होगा कि किस मरीज को किसे डील करना है। एक प्रोटोकॉल होगा। मरीज के आने के साथ वेट, बीपी, पल्स चेक होगा। डॉक्टर तैनात होंगे। इमरजेंसी और अर्जेट मरीज पर फोकस होगा। ताकि सीरियस केस मिस न हो।

...बताया गया कहां है गैप, आगे क्या होगा रणनीति :

नवजात शिशु मृत्यु दर के कारणों को ढूंढा गया। स्टिल बर्थ ऑडिट की गयी। पता लगाया गया कि जन्म के तुरंत बाद या जन्म से पहले डेथ का कारण क्या है। कहां गैप है, उसे बताया गया। गैप को खत्म करने की कोशिश के तहत अब आगे का एक्शन प्लान तैयार किया गया है। यूनिसेफ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में पटना से लेकर दिल्ली तक से आए अधिकारियों ने ट्रेनिंग दी। हर पहलू पर बारीकी से चर्चा की गयी। नवजात शिशु मृत्यु दर के मुख्या कारण एनीमिया, हाइटपरटेंशन, इंफेक्शन, आनुवंशिक बीमारी बताया गया। अर्ली स्टेज पर इसकी खोज कर ट्रीटमेंट की बात कही गयी। इस दौरान मरीज के सोशियो इकोनामिक कंडीशन को भी देखा जायेगा। मरीज के हेल्थ स्टेटस की भी पड़ताल की जायेगी। हाई रिस्क प्रगनेंसी वाले मरीज की पहचान कर तुरंत प्रखंड स्तर से मेडिकल मेडिकल कालेज भेजा जायेगा। ऐसे मरीजों की लगातार ट्रैकिंग की जाएगी।

...पूर्णिया से आउटकम देंगे तो देश स्तर पर होगा बदलाव :

पूर्णिया से आटकम देंगे तो देश स्तर पर बड़ा बदलाव होगा। हर डिलेवरी रूप का एसओपी होना चाहिए। अगर एक्सपर्ट डील नहीं करेगा तो मरीजों की जान जाएगी। इससे बचने के लिए एसओपी जरूरी है। प्रत्येक मरीज की जांच हो। प्रसव के समय डॉक्टर मौजूद हों। बाकी स्टाफ प्रशिक्षित हों। आखिर एक मरीज की जिंदगी का सवाल होता है। इसके लिए सभी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर संस्थागत प्रसव सुनिश्चित की जाए। अभी जिले में कुल 504 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को चिह्नित किया गया है। उन सभी को नियमित प्रसव पूर्व जांच करते हुए उनके संस्थागत प्रसव कराने पर जोर दिया जा रहा है। जिससे कि महिलाऐं और बच्चे बिल्कुल स्वस्थ रह सकें।

...पूर्णिया जिला का स्टिल बर्थ रेट 13 :

स्वास्थ्य विभाग द्वारा नवजात शिशु कार्य योजना का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2023 तक 0 से 28 दिनों तक के बच्चों के मृत्यु दर में कमी लाना है। वर्तमान में एसआरएस डाटा के अनुसार बिहार राज्य का नवजात शिशु मृत्यु दर 21 एवं स्टिल बर्थ रेट 19 है। इसमें पूर्णिया जिला का स्टिल बर्थ रेट 13 है। नवजात शिशु कार्य योजना का मुख्य उद्देश्य इसमें कमी लाते हुए इसे 10 करना है।

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