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प्राचीन मंदिरों में शुमार रूपौली दुर्गा मंदिर

हिन्दुस्तान टीम,पूर्णियाPublished By: Newswrap
Mon, 11 Oct 2021 11:11 PM
प्राचीन मंदिरों में शुमार रूपौली दुर्गा मंदिर

जानकीनगर। एक संवाददाता

बनमनखी प्रखंड के पंचायत रूपौली दक्षिण में देवी दुर्गा का एक प्राचीन मंदिर स्थित है जो भूपेश्वरी भगवती के नाम से विख्यात है। इस मंदिर की ख्याति आसपास के गांव में ही नहीं बल्कि नजदीकी जिलों में भी है। यहां आजादी के पूर्व से ही नवरात्रि के अवसर पर पूजा-अर्चना एवं मेला का आयोजन होता आ रहा है। श्रद्धालुओं के लिए यह आस्था का प्रमुख स्थल है। यह ना सिर्फ अपनी रमणीक प्राकृतिक छटा के लिए प्रसिद्ध है बल्कि श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी प्रसिद्ध है। यह मंदिर 19वीं शताब्दी से ही ऐतिहासिक यात्रा कर फूस की कुटी से अपने इस दिव्य स्वरुप में पहुंचा है। यहां नवरात्रि के छठे दिन देवी की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है जिस का विशेष महत्व है। इस अवसर को देखने के लिए आसपास के गांव ही नहीं बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु आते हैं। इसी दिन मंदिर का कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। महानवमी के दिन यहां बलिप्रदान की प्रथा है। मंदिर परिसर में दुर्गा मंदिर के अलावा बूढ़ी माता का भी मंदिर है। परिसर में एक अत्यंत प्राचीन पीपल का पेड़ भी है। इस पेड़ की विशेषता है कि इसमें वर्ष में दो बार पतझड़ होते हैं। नवरात्रि के अवसर पर मंदिर प्रांगण में प्रवचन एवं जागरण का आयोजन किया जाता है जिसे देखने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

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