Purnia News: जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में पांच वर्षों से हो रहा रुद्राभिषेक
Purnia News: जलालगढ़, एक संवाददाता। जलालगढ़ वासियों पर भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा मानी जाती है। यही वजह है कि जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में पिछले पांच वर्षों से लग

Purnia News: जलालगढ़, एक संवाददाता। जलालगढ़ वासियों पर भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा मानी जाती है। यही वजह है कि जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में पिछले पांच वर्षों से लगातार रुद्राभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। मंगलवार को भी मंदिर परिसर में विधि-विधान के साथ भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा जलेश्वरनाथ का जलाभिषेक, शृंगार, आरती और दर्शन किया। भगवान शिव का शृंगार इस दिन सालासर बालाजी के स्वरूप में किया गया, जो श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पंडित जयप्रकाश दाधीच ने बताया कि भगवान शिव को आशुतोष कहा जाता है। इसका अर्थ है कि वे बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता हैं। मान्यता है कि भगवान शिव अपने भक्तों की भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होकर उन्हें मनोवांछित वरदान प्रदान करते हैं。
रावण से लेकर अर्जुन तक ने की महादेव की आराधना:
पंडित जयप्रकाश दाधीच ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि धार्मिक कथाओं में अनेक ऐसे प्रसंग मिलते हैं, जहां देवता, ऋषि, मनुष्य और असुर तक भगवान शिव की कठोर तपस्या कर उनसे वरदान प्राप्त कर चुके हैं। मान्यता के अनुसार लंका के राजा रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। शिव की आराधना में उसने अपने सिर तक अर्पित किए और भगवान से वरदान प्राप्त किया। इसी भक्ति से जुड़ी कथा में शिव तांडव स्तोत्र की रचना का भी उल्लेख मिलता है। उन्होंने बताया कि महाभारत की कथाओं में भी भगवान शिव की आराधना के कई प्रसंग हैं। अर्जुन ने तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था। भगवान शिव ने किरात के रूप में उसकी परीक्षा लेने के बाद उसे पाशुपत अस्त्र प्रदान किया था। इसी तरह भीष्म की तपस्या और भगवान शिव से प्राप्त इच्छामृत्यु के वरदान का भी धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है।
बालाजी स्वरूप में हुआ बाबा का शृंगार:
जलेश्वरनाथ महादेव मंदिर में मंगलवार को भगवान भोलेनाथ का विशेष शृंगार सालासर बालाजी के स्वरूप में किया गया। आकर्षक शृंगार के बाद मंदिर में आरती की गई। श्रद्धालुओं ने बाबा के दिव्य स्वरूप का दर्शन किया और भगवान शिव से सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। मंदिर में रुद्राभिषेक और आरती के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं का कहना था कि जलेश्वरनाथ महादेव की आराधना में शामिल होकर उन्हें विशेष आध्यात्मिक अनुभूति होती है। पिछले पांच वर्षों से लगातार चल रहे रुद्राभिषेक को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं में भी विशेष उत्साह देखा गया।


