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आरक्षण की सीमा रद्द किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण: राजद

पूर्णिया, हिंदुस्तान संवाददाता। पूर्णिया, हिंदुस्तान संवाददाता। बहुजन क्रांति मोर्चा के प्रमंडलीय प्रभारी सह राजद के वरिष्ठ नेता प्रोफ़ेसर आलोक...

आरक्षण की सीमा रद्द किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण: राजद
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हिन्दुस्तान टीम,पूर्णियाSun, 23 Jun 2024 01:01 AM
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पूर्णिया, हिंदुस्तान संवाददाता। बहुजन क्रांति मोर्चा के प्रमंडलीय प्रभारी सह राजद के वरिष्ठ नेता प्रोफ़ेसर आलोक कुमार ने बिहार में जाति आधारित गणना को आधार बनाकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग तथा अति पिछड़े वर्गों के आरक्षण की सीमा को 49.5% से बढ़ाकर 65% करने के निर्णय को रद्द किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय बताया । हालाँकि बिहार सरकार इस निर्णय के विरोध में सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया है । ज्ञात हो कि देश भर में 10% आबादी वाले सामान्य वर्ग के लोगों को 10% आरक्षण संविधान को बदलकर , सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ेपन में आर्थिक पिछड़ेपन को जोड़कर देश भर में एक सप्ताह के अंदर सरकारी सेवा एवं अन्य शैक्षणिक सेवाओं में लागू कर दिया गया । इस तरह के संविधान संशोधन के विरोध में कई रिट याचिका सुप्रीम कोर्ट में दर्ज की गई है । जिसकी सुनवाई नहीं हो रही है । भारत देश के तमिलनाडु राज्य सहित उत्तर पूर्व के कई राज्यों में 50 से 69 प्रतिशत तक एससी-एसटी एवं ओबीसी समुदाय को सामाजिक एवं शैक्षिणिक पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण का लाभ मिल रहा है। इन राज्यों में आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में डाल कर न्यायालय के हस्तक्षेप से दूर रखा गया है । वर्तमान केंद्र सरकार जाति आधारित गणना नहीं कराना चाह रही है। जाति आधारित गणना नहीं होने के कारण देश भर में सात दशक बीतने के बाद भी एससी एसटी और ओबीसी के सामाजिक शैक्षणिक एवं आर्थिक तस्वीर ज्ञात नहीं हो सका है।

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