रमजान के दूसरे जुमा पर मस्जिदों में अमन चैन की दुआ मांगी

Feb 28, 2026 01:13 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, पूर्णिया
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बैसा और अमौर प्रखंड की मस्जिदों में रमज़ान उल मुबारक के दूसरे जुमा की नमाज़ अकीदत से अदा की गई। नमाजियों की भारी भीड़ ने इबादत की। इमामों ने रमज़ान की अहमियत बताई और समाज में भाईचारे और एकता को बढ़ावा देने की अपील की। नमाज के बाद अमन-चैन और खुशहाली के लिए दुआ की गई।

रमजान के दूसरे जुमा पर मस्जिदों में अमन चैन की दुआ मांगी

बैसा-अमौर, एक संवाददाता। बैसा और अमौर प्रखंड क्षेत्र की विभिन्न मस्जिदों में रमज़ान उल मुबारक के दूसरे जुमा की नमाज़ पूरे अकीदत और एहतराम के साथ अदा की गई। सुबह से ही मस्जिदों में नमाज़ियों की भीड़ उमड़ पड़ी। रोज़ेदारों ने वुजू कर पाक-साफ कपड़े पहने और बड़ी तादाद में अल्लाह की इबादत के लिए मस्जिदों का रुख किया। जुमा की नमाज से पहले इमामों ने अपने खुत्बे में रमज़ान के दूसरे अशरे, जिसे मगफिरत का अशरा कहा जाता है, की अहमियत बयान की। उन्होंने कहा कि रमज़ान सब्र, रहमत और आत्मशुद्धि का महीना है। रोज़ा इंसान को परहेजगार बनाता है और समाज में भाईचारे, हमदर्दी और आपसी मोहब्बत को बढ़ावा देता है।

उलेमाओं ने बताया कि रमजान इस्लामी साल का सबसे पवित्र और बरकतों भरा महीना है, जिसमें अल्लाह तआला अपने बंदों पर खास रहमतें नाजिल करता है, नेकी का सवाब कई गुना बढ़ा देता है और गुनाहों की माफी के दरवाज़े खोल देता है। रमज़ान को तीन अशरों में तकसीम किया गया है-पहला रहमत का, दूसरा मगिफिरत का और तीसरा जहन्नम से निजात का। दूसरे अशरे में तौबा और इस्तिगफार की खास अहमियत बताई गई। उलेमाओं ने युवाओं से अपील की कि वे कुरआन करीम को समझने और उस पर अमल करने की ओर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि रमजान गरीबों, यतीमों और जरूरतमंदों की मदद का भी महीना है। सदका, जकात और फितरा के जरिए समाज में बराबरी और भाईचारे को मजबूती मिलती है। नमाज के अंत में देश-दुनिया में अमन-चैन और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई। रमजान के दूसरे जुमा पर सौहार्द का दिया संदेश बायसी, एक संवाददाता। पवित्र माह-ए-रमजान के दूसरे जुमा पर बायसी अनुमंडल सहित आसपास के क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय के बीच खासा उत्साह देखा गया। नौवें रोजे के साथ दूसरे जुमा की नमाज अकीदत और खौफ-ए-खुदा के साथ अदा की गई। मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ी और इबादत का माहौल पूरी तरह रूहानी रंग में नजर आया। सुबह से ही मस्जिदों में चहल-पहल शुरू हो गई थी। रोजेदारों ने मस्जिदों की साफ-सफाई की और नमाज के लिए विशेष इंतजाम किए गए। अनुमंडल मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों की मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ रही। जामा मस्जिद समेत विभिन्न मस्जिदों में अकीदतमंदों का सैलाब उमड़ पड़ा। नमाज के बाद मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे और तरक्की के लिए दुआएं मांगी गईं। साथ ही जकात और सदका देने का सिलसिला भी जारी है। रमजान का महीना सौहार्द, भाईचारे और सामाजिक एकता का पैगाम देता है। रोजा केवल भूख-प्यास से परहेज का नाम नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण और आत्मअनुशासन का अभ्यास भी है। इस महीने में लोग बुराइयों से दूर रहकर नेक रास्ते पर चलने की कोशिश करते हैं। जुमा की नमाज के दौरान उलेमाओं ने तकरीर करते हुए कहा कि रमजान-उल-मुबारक बरकतों और रहमतों का महीना है। इस पाक माह में ज्यादा से ज्यादा इबादत कर नेकियां कमानी चाहिए और नमाज का पाबंद बनना चाहिए। मौलवी हसनैन रजा ने कहा कि रोजा इंसान के लिए अल्लाह का अनमोल तोहफा है। यह सब्र का महीना है, जिसमें बंदा सुबह से शाम तक अपनी ख्वाहिशों पर काबू रखता है। रोजा इंसान को भूख-प्यास और तकलीफ का एहसास कराता है, जिससे वह दूसरों के दर्द को समझ पाता है। उन्होंने कहा कि जो शख्स सच्चे दिल से रोजा रखता है, उसके लिए जन्नत की खुशखबरी है। रमजान के इस मुकद्दस महीने में बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं सभी इबादत में मशगूल हैं। कोई मस्जिदों में तो कोई अपने घरों में कुरान पाक की तिलावत कर रहा है। पूरे इलाके में इबादत, अनुशासन और भाईचारे का माहौल बना हुआ है।

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