
पूर्णिया का मक्का: वरदान से संकट की ओर
पूर्णिया जिला मक्का उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन पिछले वर्ष मौसम की प्रतिकूलता और उचित मूल्य की कमी से किसान परेशान हैं। यहां मक्का की खेती लगभग एक लाख 14 हजार हेक्टेयर में होती है। किसान उचित मूल्य की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी आमदनी बढ़ सके।
पूर्णिया पूर्व, एक संवाददाता। पूर्णिया जिला लंबे समय से मक्का उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां मक्का की खेती रिकॉर्ड स्तर पर होती रही है और जिले का मक्का देश के कई राज्यों तक भेजा जाता है। बीते कुछ वर्षों में मक्का किसानों के लिए वरदान साबित हुई है, क्योंकि अन्य फसलों की तुलना में इसकी पैदावार अधिक होती है और बाजार भी सुलभ रहता है। जिले के किसानों को मक्का बेचने के लिए एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडियों में शुमार गुलाबबाग अनाज मंडी उपलब्ध है, जिससे विपणन की समस्या अपेक्षाकृत कम रहती है। खासकर धमदाहा अनुमंडल में जिले की सबसे अधिक मक्का खेती होती है।
यहां मार्च के अंतिम सप्ताह तक मक्का की कटाई शुरू हो जाती है और सबसे पहले धमदाहा क्षेत्र का मक्का गुलाबबाग मंडी पहुंचता है। हालांकि, पिछले वर्ष मक्का कटाई के समय मौसम ने किसानों का साथ नहीं दिया। लगातार नमी और प्रतिकूल मौसम के कारण मक्का की गुणवत्ता प्रभावित हुई, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसके साथ ही मंडियों में किसानों को मक्का का उचित मूल्य नहीं मिल सका। कई किसानों को कम दर पर मक्का बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। जानकारी के अनुसार, जिले में लगभग एक लाख 14 हजार हेक्टेयर भूमि में मक्का की खेती होती है। हालांकि पूर्णिया जिले के पूर्वी इलाके में जहां कभी बड़े पैमाने पर मक्का की खेती होती थी, वहां पिछले चार-पांच वर्षों में मखाना की खेती ने मक्का को पीछे छोड़ दिया है। बेहतर आमदनी और कम जोखिम के कारण किसान तेजी से मखाना की ओर रुख कर रहे हैं। ... कहते है किसान: अरविन्द यादव, शंकर मेहता, विक्की मेहता, अर्जुन मंडल, प्रमोद मंडल, अजीत रिषी, नीतीश कुमार, सदानंद महालदार, डब्बू भगत आदि किसानो का कहना है कि यदि मक्का की उचित कीमत नहीं मिली और मौसम की मार यूं ही जारी रही, तो आने वाले समय में मक्का की खेती में कमी आ सकती है। मक्का कि खेती के समय उर्वरक कि किल्लत और महंगे दर पर मक्का बीज खरीद कर खेती करते है लेकिन बाजार भाव नही मिलने पर बड़ी परेशानी होती है। किसानों के अनुसार मक्का का उत्पादन खर्च निकालने और लाभ सुनिश्चित करने के लिए प्रति क्विंटल कम से कम 2500 से 2800 रुपये की दर मिलना आवश्यक है। सरकार मक्का कि सरकारी दर लागू होनी चाहिए। तभी किसान मक्का कि खेती कर अपनी आमदनी बढ़ा सकती है। ..विशेषज्ञ की राय- विशेषज्ञों का मानना है कि मक्का खाद्य, पशु आहार और औद्योगिक उपयोग की महत्वपूर्ण फसल है। ऐसे में किसानों को मूल्य सुरक्षा, भंडारण सुविधा और मौसम से बचाव के लिए आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराना आवश्यक है। अन्यथा पूर्णिया जैसे मक्का उत्पादक जिले में यह फसल धीरे-धीरे संकट में आ सकती है। मक्का का खपत लगभग 60 से 70 प्रतिशत मक्का मुर्गी दाना, पशु चारा के लिए होती है। उसके अलावे कॉर्न स्टार्च, ग्लूकोज, एथेनॉल (बायोफ्यूल) शराब उद्योग, दवा और कॉस्मेटिक उत्पाद, कागज, कपड़ा और केमिकल उद्योग में खपत होती है। ..पूर्णिया का मक्का: यहां का मक्का बिहार के पटना, बेगूसराय, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी, कोलकाता, मालदा, झारखंड के रांची, धनबाद, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर, पंजाब व हरियाणा पशु आहार एवं इंडस्ट्री के लिए महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना: पोल्ट्री फीड और स्टार्च फैक्ट्रियों में जाती है। जानकार बताते है कि पिछले वर्ष से ही पूर्णिया सहित बिहार में मक्का कि दर में कमी का मुख्य कारण है कि यहां मक्का उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि जगह जाती थी लेकिन वहां भी बड़े पैमाने पर मक्का कि खेती होने के कारण यहां के मक्का का डिमांड घट गया है। जिसकी वजह से कीमत कम हुई है। ....बोले अधिकारी: जिला कृषि पदाधिकारी हरिद्वार प्रसाद चौरसिया ने बताया कि पूर्णिया में मक्का कि खेती बड़े पैमाने पर यानी लगभग एक लाख 14 हजार हेक्टेयर में होती है। किसानों को समय पर विभाग के द्वारा अनुदानित दर पर मक्का बीज उपलब्ध कराई जाती है। हमारे पंचायत कृषि सलाहकार, प्रखंड कृषि समन्वयक और जिले कि टीम खाद बीज उचित मूल्य पर किसानों उपलब्ध कराने के लिए लगातार तत्पर रहते हैं।

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