कटिहार मोड़ पर सोमवार को फिर चला बुलडोजर
-अतिक्रमण हटाओ अभियान के लिए बढ़ी सख्ती पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। शहर में अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का अभियान लगातार जारी है। सोमवार को एक बार

पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। शहर में अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन का अभियान लगातार जारी है। सोमवार को एक बार फिर कटिहार मोड़ से लेकर बगुला चौक तक सड़क के दोनों किनारों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। यहां चार दिन पहले भी ताबड़तोड़ बुलडोजर चले थे। सोमवार को नगर निगम और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने बुलडोजर की मदद से फुटपाथ और सड़क किनारे लगाए गए अस्थायी दुकानों, ठेलों और अवैध संरचनाओं को हटाया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। करीब एक महीने से शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और व्यस्त मार्गों पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा रहा है।
प्रशासन का दावा है कि अतिक्रमण के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं, जिससे आए दिन जाम की स्थिति बनती है और दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। कटिहार मोड़ और बगुला चौक जैसे इलाके पहले से ही अत्यधिक भीड़भाड़ वाले हैं, जहां फुटपाथ और सड़क पर दुकानें लगने से पैदल यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि अभियान की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अतिक्रमण हटाने के महज 24 घंटे के भीतर ही फुटपाथ दुकानदार दोबारा सड़क पर लौट आते हैं। सोमवार की कार्रवाई के दौरान भी यह मुद्दा सामने आया। दुकानदारों का कहना है कि फुटपाथ ही उनकी रोजी-रोटी का एकमात्र साधन है। यदि वे सड़क किनारे दुकान नहीं लगाएंगे तो उनके परिवार के सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा हो जाएगा। इसी कारण वे प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद दोबारा उसी स्थान पर आ जाते हैं। दूसरी ओर अधिकारियों का कहना है कि शहर को व्यवस्थित और जाममुक्त बनाने के लिए अतिक्रमण हटाना जरूरी है। बार-बार चेतावनी देने और समझाने के बावजूद दुकानदारों द्वारा नियमों की अनदेखी की जा रही है। प्रशासन का तर्क है कि सड़क और फुटपाथ आम जनता के उपयोग के लिए हैं न कि निजी कारोबार के लिए। सूत्रों के अनुसार अब प्रशासन ने अब केवल हटाने की कार्रवाई तक सीमित न रहते हुए अर्थदंड लगाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। बार-बार अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों और ठेला चालकों पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके लिए सूची तैयार की जा रही है और निगरानी बढ़ाने की योजना है, ताकि दोबारा अतिक्रमण करने वालों की पहचान आसानी से हो सके। अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक दंड से ही इस समस्या पर स्थायी नियंत्रण पाया जा सकता है।

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