निजी जानकारी लीक करने वाला एप बनाया, 1.94 लाख यूएस डॉलर कमाया
-तीन दोस्त मिलकर निजी डाटा कर रहा था शेयर, पूर्वी चंपारण का युवक एक शामिल पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। ओपन साइट से लोगों के निजी डाटा शेयर के माम

पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। ओपन साइट से लोगों के निजी डाटा शेयर के मामले का पुलिस ने पूरी तरह खुलासा कर दिया है। ईओयू, एसटीएफ एवं पूर्णिया पुलिस के 36 घंटे के संयुक्त ऑपरेशन में मामले का चौंकाने वाला खुलासा हुआ। इस बावत एक प्रेस वार्ता के दौरान एएसपी आलोक रंजन ने बताया कि इतिहास विषय से स्नातक कर रहा एक छात्र एप डेवलप कर साइबर अपराध की घटना को अंजाम दे रहा था। जिसे पूछताछ के बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मुफस्सिल थाना के डिमिया छतरजान पंचायत अन्तर्गत श्रीनगर सहनी टोला निवासी 20 वर्षीय राकेश कुमार मंडल के रूप में की गई है।
पुलिस ने उसके घर से नौ मोबाइल, एक महंगी कंपनी का टैब, एक महंगी कंपनी का मार्क बुक एवं दो लैपटॉप सहित 2.80 लाख रूपये कैश तथा विभिन्न बैंकों के पासबुक एवं एटीएम कार्ड आदि बरामद किया है। इसी दौरान गिरफ्तार राकेश मंडल का संपर्क पूर्वी चंपारण जिले के गोविंदगंज थानान्तर्गत लौरिया निवासी नवल पांडेय के पुत्र रोहन कुमार एवं एक अन्य रौनक कुमार मिश्र के संपर्क में आया। तीनों साथियों ने मिलकर लोगों की निजी जानकारी लीक करने वाले एप का आविष्कार कर साइबर अपराध को अंजाम देना शुरू किया। जिससे इसने विदेशी मुद्राओं की क्रिप्टो करेंसी अर्जित करना शुरू किया। बताया जा रहा है कि उसके विभिन्न वॉलेट में जमा करीब 1.94 लाख यूएस डॉलर पाये गये हैं। क्रिप्टो कैरेंसी के एक्सचेंज के लिए एक अन्य एप को डेपलप करने में लगा था। पुलिस को अब तक गिरफ्तार शातिर के सीधे विदेशी लिंक की जानकारी नहीं मिली है। पुलिस गिरफ्तार युवक के सहयोगियों के सत्यापन के साथ उसके अन्य लिंकेज को खंगालना शुरू कर दिया है। ----- -ऑनलाइन गेमिंग एप को प्रमोट करने से शुरू किया धंधा: -जांच एजेंसी (शर्ट इन) के जरिए साइबर थाना को गोपनीय सूचना मिली कि एक एप के जरिए लोगों के निजी डाटा को लीक किया जा रहा है। यह एप भारतीय मोबाइल धारकों के मोबाइल नंबर सर्च करने उनकी पूरी निजी जानकारी यथा नाम, पता, आधार नंबर आदि प्रदर्शित कर रहा है। पुलिस की संयुक्त टीम की जांच में बात सही पायी गई एवं पता चला कि इसके डाटाबेस में मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर द्वारा कानून प्रवर्तन एजेंसी को दिए जाने वाले सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड्स के डाटा से मिलता- जुलता डाटा संचित है। यह ओपन सोर्स पर माजूद रहने के कारण इस एप के जरिए लोगों की निजी जानकारी आसानी से प्राप्त की जा सकती थी। पुलिस ने जांच के बाद छात्र को हिरासत में लेकर पूछताछ करना शुरू किया। परन्तु शातिर कई घंटे तक अपनी जबान बंद रखी। जिसके बाद उसके पिता एवं बड़े भाई को मुफस्सिल थाना लाकर पूछताछ की गई। पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आई कि शातिर ने अपने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित गेमिंग एप को प्रोमोट कर धंधे की शुरूआत की। इसी दौरान वह कई लोगों के संपर्क में आया।
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