Pandit Dwij was an ardent writer a brilliant orator - पंडित द्विज एक अक्खड़ लेखक, शानदार वक्ता थे. DA Image
17 फरवरी, 2020|12:50|IST

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पंडित द्विज एक अक्खड़ लेखक, शानदार वक्ता थे.

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कलाभवन साहित्य सभागार में कवि व साहित्यकार और पूर्णिया महाविद्यालय के प्रथम प्राचार्य पंडित जनार्दन प्रसाद झा द्विज की 116 वीं जयंती मनाई गई। कलाभवन साहित्य विभाग की ओर से शुक्रवार को आयोजित इस समारोह में विधिवत शुरुआत पंडित जनार्दन प्रसाद झा द्विज के तैलचित्र पर पुष्पांजलि तथा दीप प्रज्ज्वलन कर की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में प्रो.अमरेन्द्र ठाकुर तथा विशिष्ट अतिथि प्रो. एएच दानिश उपस्थित थे। कलाभवन साहित्य विभाग की संयोजिका डॉ निरूपमा रॉय ने आगत अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. रामेश्वर मिश्र ने की। प्रो.अमरेन्द्र ठाकुर ने पंडित जनार्दन प्रसाद झा द्विज के साथ बिताए संस्मरणों को याद करते हुए कहा कि पंडित द्विज एक अक्खड़ लेखक, शानदार वक्ता थे। प्रो. एएच दानिश ने द्विज के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूर्णिया महाविद्यालय को सवांरने में उनकी अहम भूमिका रही है। प्रचार्य कुशल, रचनाकार मानव सजल, कथा साहित्य लोचन कविता के माध्यम से उन्होंने श्रद्धांजलि दी। जनार्दन प्रसाद झा की नतिनीद्वय शल्या झा ने जहां जगजननी के दर्शन, अर्चन से तन, मन, धन, अपना ही नही जगजीवन का संताप निवारण करना शीर्षक से काव्यपाठ किया, वही डॉ निरूपमा रॉय ने जनार्दन प्रसाद झा द्विज द्वारा रचित समीक्षात्मक संग्रह प्रेमचंद की उपन्यास कला को पुनः प्रकाशित कर पाठकों को उपलब्ध कराने की घोषणा की। कलाभवन साहित्य विभाग के पुस्तकालय में द्विज की कथा संग्रह, रचनाओं को संग्रहित करने का प्रयास साहित्य विभाग द्वारा की जाएगी। सुमित प्रकाश ने डॉ झा द्विज को याद करते हुए कहा कि उनके पूर्णिया महाविद्यालय के कार्यकाल के दौरान पूर्णिया महाविद्यालय में रहकर ही राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने रश्मिरथी की रचना की। पूर्णिया की साहित्य भूमि काफी उर्वर है। कलाभवन साहित्य विभाग से आग्रह करते हुए सुमित प्रकाश ने कहा कि आज के युवाओं को जनार्दन प्रसाद झा द्विज, लक्ष्मी नारायण सुधांशु, सतीनाथ भादुड़ी इत्यादि पूर्णिया के साहित्यकारों की रचनाएं सर्वसुलभ आसानी से उपलब्ध हो सके इसके लिए माकूल व्यवस्था करने की आवश्यकता है ताकि आज के युवा पूर्णिया के साहित्यिक विरासत को सहेज सके उनके बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी प्राप्त कर सके। इस मौके पर कवियत्री मंजुला उपाध्याय, साहित्यकार गौरीशंकर पूर्वोत्तरी, संजय सनातन, रामदेव यादव, गंगेश पाठक, मलय झा, प्रो. रामेश्वर मिश्र, प्रो केके चौधरी ने भी पंडित जनार्दन प्रसाद झा द्विज के व्यक्तित्व पर अपने विचारों को रखे। कार्यक्रम में मंच संचालन निशा प्रकाश ने किया। इस अवसर पर प्रो. रामेश्वर मिश्र, अमरेन्द्र ठाकुर, डॉ निरुपमा रॉय, शल्या झा, प्रो. एएच दानिश, डॉ निशा प्रकाश, अमरेन्द्र ठाकुर, गौरीशंकर पूर्वोत्तरी, मंजुला उपाध्य्याय, डॉ प्रेनिका वर्मा, जोशिता परमार, सुमित प्रकाश, डॉ शम्भू कुशाग्र, दिवाकांत झा, मलय झा, प्रो के के चौधरी, रामदेव यादव, संजय सनातन, प्रो विजया रानी, श्रीनिवास उपाध्य्याय इत्यादि उपस्थित थे।

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