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हिंदी न्यूज़ बिहार पूर्णियामुरीदों की मुराद पूरी करती है मां काली कुशहा वाली

मुरीदों की मुराद पूरी करती है मां काली कुशहा वाली

हिन्दुस्तान टीम,पूर्णियाNewswrap
Tue, 26 Oct 2021 03:52 AM
मुरीदों की मुराद पूरी करती है मां काली कुशहा वाली

बनमनखी। संवाद सूत्र

सहरसा- पूर्णिया एनएच के समीप अवस्थित कुशहा काली स्थान का अपना एक महात्म्य है। कहते हैं कि हर मुरादें मां काली कुशहा वाली पूरी करतीं हैं। तभी तो उत्तरोत्तर श्रद्धालुओं की तादाद में के दरबार में बढ़ती जा रही है। यूं तो सप्ताह के हर मंगलवार और शनिवार को मां काली की विशेष पूजा के लिए भक्तों की अच्छी संख्या यहां उमड़ती है। परन्तु काली पूजा को श्रद्धालुओं का सैलाब यहां उमड़ता है। खासकर काली पूजा की रात मंदिर के संस्थापक सेवा निवृत्त कार्यपालक अभियंता प्रकाश चन्द्र सिंह समेत दूर-दराज से लोग पहुंचकर शक्ति की अधिष्ठात्री मां काली की विशेष पूजा रात भर पूरी आस्था से करते हैं। स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोगों का काफी सहयोग काली पूजा के दौरान रहता है। जिससे पूजा पर सामाजिक सद्भाव का रंग यहां खूब दिखता है।

दक्षिणावर्त पद्धति से होती है पूजा

शक्ति की अधिष्ठात्री मां काली की पूजा यहां दक्षिणावर्त पद्धति से की जाती है। स्थापना काल से मंदिर से जुड़े समाज सेवी अनिल चौधरी ने बताया कि मंदिर की स्थापना से पूर्व यहां स्थानीय आदिवासी समुदाय के द्वारा माता की पूजा-अर्चना हो रही थी। वर्ष 1989 में बनमनखी के तत्कालीन सहायक अभियंता प्रकाशचन्द्र सिंह ने स्वप्न से मिली प्रेरणा के अनुरूप यहां मंदिर निर्माण की नींव डाली। समाज मे लब्ध प्रतिष्ठ विद्वान पंडित महानंद झा के सानिध्य मे मा काली की स्थाई मूर्ति की स्थापना के लिए अनुष्ठान कर यहां दक्षिणावर्त पूजा पद्धति की शुरूआत की गई। इससे पूर्व सौ साल से ऊपर की अवधि से यहां स्थानीय आदिवासी समुदाय के लोगो की ओर से मां काली की पूजा-अर्चना की परंपरा रही थी।

दुर्घटना जोन के रूप मे प्रसिद्ध था स्थान

मंदिर के महात्म्य का अंदाजा इससे लगता है कि मंदिर निर्माण से पूर्व स्थली दुर्घटना जोन के रूप मे प्रसिद्ध थी। अनिल चौधरी बताते हैं कि आए दिन यहां सड़क हादसे में जानमाल की क्षति की खबर आती रहती थी। मंदिर की स्थापना के साथ यहां हादसों पर ब्रेक सा लग गया। मसलन राहगीर यहां मां का आशीर्वाद प्राप्त कर आगे का रास्ता तय करना श्रेयस्कर मानते हैं। राहगीरों के अलावा मां काली मे आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थली आस्था का महत्वपूर्ण केन्द्र बना हुआ है। मंदिर के पुजारी सुशील गोसाईं बताते हैं कि यहां की ख्याति का ही प्रभाव है कि कोसी और सीमांचल के श्रद्धालुओं के साथ-साथ अब तक झारखंड, बंगाल यहां तक कि नेपाल से चलकर मां दरबार में हाजरी लगाई है। कई भक्तों ने मनोकामना पूर्ण होने पर दुबारा मां का दर्शन किया है।

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