सन 1870 का अमौर थाना : संसाधनों की कमी के बावजूद सेवा देने में बेहतर
-कोतवाली की रखवाली : अमौर, एक संवाददाता। पूर्णिया जिले के सुदूर अमौर थाना की स्थापना ब्रिटिश काल में साल 1870 में हुई थी। यह थाना इससे पूर्व कई वर्षों

अमौर, एक संवाददाता। पूर्णिया जिले के सुदूर अमौर थाना की स्थापना ब्रिटिश काल में साल 1870 में हुई थी। यह थाना इससे पूर्व कई वर्षों तक कैम्प के रूप में चल रहा था। अमौर थाना आज भी ब्रिटिश कालीन भवन में ही कार्यरत है। थाना भवन की हालत जर्जर है। अमौर थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने व जान जोखिम में डाल कर दूसरों को सुरक्षा देने वाले दर्जनों की संख्या मे कार्यरत पुलिसकर्मियों की जान जर्जर आवास के बीच असुरक्षित हैं। अमौर थाना परिसर में वर्तमान समय मे जितने भी आवासीय भवन हैं, उनमें कुछ को छोड़ दिया जाय तो सभी भवन वर्षों पुराने हैं।
इन जर्जर आवासीय भवनों के अधिकांश कमरों के छतों व दीवारों के प्लास्टर टूटकर गिर रहे हैं, तो कहीं बारिश होते ही छत टपकने लगती है। दिन में तो किसी तरह सतर्क पुलिसकर्मी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर लेते हैं, लेकिन जर्जर आवास में रात में कब हादसा हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। थाने में आगंतुक कक्ष या उचित बैठने की व्यवस्था न होने से आम फरियादियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उचित जगह न होने से शिकायतकर्ताओं, महिलाओं और बुजुर्गों को तो कभी कभी घंटों खड़े रहना पड़ता है। थाना को करीब छह एकड़ जमीन उपलब्ध है, इसके बावजूद इस थाने की चारदीवारी नहीं है।-एक कमरे में अंचल पुलिस निरीक्षक कार्यालय :---अमौर थाना के कार्यालय के एक कमरे में अंचल पुलिस निरीक्षक का कार्यालय है। बिहार पुलिस नियमों के अनुसार पुलिस अंचल में कई थाने आते हैं। इस तरह अमौर अंचल के अन्तर्गत आने वाले प्रमुख थानों में अमौर, रौटा,व अनगढ मुख्य रूप से शामिल है। पुलिस निरीक्षक अपने अंतर्गत आने वाले सभी थानों के मामलों, अनुसंधान और अपराध की रोकथाम की निगरानी करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में कई बार थानों के अलग भवन या स्वतंत्र सर्किल ऑफिस न होने के कारण, उन्हें मुख्य या पुराने थाना भवन के एक कमरे से काम करना पड़ता है।-चारों तरफ से नदियों से घिरा इलाका :----अमौर थाना क्षेत्र का भौगोलिक रूपरेखा जहां बहुत बड़ा है। वहीं चारो ओर से महानंदा,कनकई ,परमान, दास जैसे नदियों से घिरे रहने के पुलिस कर्मियों को कार्य मे बहुत परेशानी उठानी होती है। खासकर बरसात के दिनों में जब इन नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण नदियों के आर पार के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नाव या चचरी की व्यवस्था नहीं रहती है तो सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने या किसी भी आपराधिक घटनाओं के घटने की सूचना मिलने के बाबजूद भी घटनास्थल पर पहुँचने के लिए लंबी दूरी का रास्ता तय करना पड़ता है। हालाकि इन नदियों पर खाड़ी पुल ,रसैली पुल आदि निर्माण की दिशा में वर्षों से कार्य चल रहा है पर आज भी यह पुल निर्माण कार्य पूरा नहीं होने से कार्य प्रभावित होती आ रही है।-22 पंचायतों की सुरक्षा की जिम्मेदारी :----अमौर थाना पर प्रखंड क्षेत्र के कुल 22 पंचायतों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। हालांकि हाल ही में कार्यों को सुगम बनाने और अपराध नियंत्रण के लिए अमौर प्रखंड के कुछ क्षेत्रों को विभाजित कर खाड़ी ओपी गठित की गयी है। अमौर थाना में 112 की एक चार चक्का व एक दो चक्का वाहन है। जो लगतार क्षेत्र में घूमते रहते हैं। वहीं पेट्रोलिंग के लिए दो चार चक्का वाहन है। अमौर थाना में एक थानाध्यक्ष, एक अपर थानाध्यक्ष के अलावा 7 पुलिस अवर निरीक्षक, 3 सहायक अवर निरीक्षक, 2 पीटीसी व 47 चौकीदार कार्यरत है।-जब्त वाहन रखरखाव में परेशानी :---अमौर थाना में जब्त वाहनों के रख-रखाव की व्यवस्था नहीं है। थाना परिसर में विभिन्न कांडों में जब्त किए गए वाहन खुले आसमान के नीचे पड़े हुए हैं। वाहन शेड नहीं होने के कारण धूप, बारिश और बदलते मौसम की मार से ये वाहन धीरे-धीरे खराब होते जा रहे हैं। कई वाहन लंबे समय से यूं ही पड़े रहने के कारण कबाड़ में तब्दील होने लगे हैं।-अग्निशमन वाहन की लंबित मांग :---अमौर थाने का क्षेत्र बड़ा होने के कारण अधिक क्षमता वाले अग्निशमन वाहन की मांग वर्षों से लंबित है। क्षेत्र में आग लगने की स्थिति में छोटे वाहनों को बार-बार पानी भरने के लिए लौटना पड़ता है, जिससे बचाव कार्य में देरी होती है। उच्च क्षमता वाले वाहनों के शामिल होने से एक बार में अधिक पानी और फोम ले जाने की क्षमता से घटना पर तुरंत काबू पाया जा सकता है। बड़े पंपों के जरिए बहुमंजिला इमारतों या दूरदराज के इलाकों तक पानी आसानी से पहुंचाया जा सकता है।-हर वर्ष दर्ज होते हैं करीब 500 मामले:---अमौर थाना क्षेत्र की संवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां प्रतिवर्ष लगभग 500 मामले दर्ज होते हैं।-बोले अधिकारी:---थानाध्यक्ष संजय कुमार ने बताया कि नए थाना के निर्माण संबधी प्रारंभिक आवश्यक कार्यवाही पूरी करते हुए पूर्व के थानाध्यक्ष द्वारा इसे बिहार पुलिस भवन निर्माण विभाग को अधिकारियों के माध्यम से प्रेषित किया जा चुका है। थाना में संसाधनों की कमी सहित मूलभूत समस्याओं से वरीय अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


