छह स्वीकृत पद के स्थान पर एक चिकित्सक, महिला डॉक्टर एक भी नहीं
-फोटो : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र श्रीनगर। पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। पूर्णिया जिले के श्रीनगर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी सु

पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। पूर्णिया जिले के श्रीनगर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी और डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों के अभाव के कारण क्षेत्र के लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्वास्थ्य केंद्र आसपास के दर्जनों गांवों की बड़ी आबादी के लिए इलाज का प्रमुख सहारा है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण यहां आने वाले मरीजों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है। पीएचसी श्रीनगर में प्रतिदिन औसतन 130 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। मरीजों की इस बड़ी संख्या के बावजूद यहां स्वीकृत 6 एमबीबीएस डॉक्टरों के स्थान पर मात्र एक ही डॉक्टर कार्यरत हैं। डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को लंबी कतार में इंतजार करना पड़ता है, जिससे कई बार गंभीर मरीजों की स्थिति भी बिगड़ने लगती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाए, तो मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सकता है। सबसे बड़ी समस्या महिला मरीजों को हो रही है। पीएचसी में एक भी महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं है, जिसके कारण महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य समस्याएं खुलकर बताने में कठिनाई होती है। ग्रामीण परिवेश की महिलाएं पुरुष डॉक्टरों के सामने कई बार अपनी बीमारी बताने से हिचकिचाती हैं, जिससे उनका सही इलाज नहीं हो पाता। हालांकि यहां तैनात 28 एएनएम के माध्यम से महिलाएं अपनी समस्या बताकर प्राथमिक इलाज करा लेती हैं, लेकिन विशेषज्ञ परामर्श के अभाव में कई मामलों में परेशानी बनी रहती है। लोगों ने महिला डॉक्टर की जल्द से जल्द नियुक्ति की मांग की है。
जगह की कमी, एक समय में आधे दर्जन मरीजों को भर्ती रखना मुश्किल :
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-स्वास्थ्य केंद्र के भवन की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। नए भवन का निर्माण कार्य लगभग हो गया है, लेकिन फिनिशिंग का काम धीमी गति से चल रहा है, जिसके कारण अस्पताल अभी पुराने भवन में संचालित हो रहा है। पुराने भवन में मरीजों के बैठने, जांच कराने और इलाज कराने में काफी दिक्कत होती है। जगह की कमी के कारण एक समय में आधा दर्जन मरीजों को भी ठीक से भर्ती रखना मुश्किल हो जाता है। पीएचसी में दो आयुष डॉक्टर और एक दंत चिकित्सक भी तैनात हैं, जो अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा एक्स-रे, खून और पेशाब जांच की सुविधा भी उपलब्ध है, लेकिन तकनीकी कर्मियों की कमी के कारण इन जांच सुविधाओं का पूरा लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। कई बार मरीजों को जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है या फिर उन्हें निजी लैब का सहारा लेना पड़ता है, जिससे उनकी जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। ड्रेसर के अभाव की समस्या भी यहां गंभीर रूप से बनी हुई है। छोटे-मोटे घाव, चोट या अन्य प्राथमिक उपचार के लिए आने वाले मरीजों को तत्काल सेवा नहीं मिल पाती। कई बार नर्सिंग स्टाफ को ही अतिरिक्त जिम्मेदारी निभानी पड़ती है, जिससे कार्य का दबाव बढ़ जाता है और सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
बोले क्षेत्रवासी :
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-ग्रामीण केशव कुमार मंडल,राहुल कुमार गोस्वामी,सुमन कुमार झा, अभिनव मिश्रा,सानु जायसवाल, अखिलेश शर्मा, जब्बार खान,एखलाक आलम, अमित कुमार , सुमित कुमार, अभय कुमार ठाकुर, कन्हैया झा, अरुण सिन्हा, राजीव कुमार मेहता,आदि कई लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग नजर आती है। लोगों ने बताया कि पीएचसी में अगर पर्याप्त संख्या में डॉक्टर, महिला चिकित्सक, तकनीकी स्टाफ और अन्य कर्मियों की नियुक्ति हो जाए, तो क्षेत्र के हजारों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सकती है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पीएचसी श्रीनगर में सभी रिक्त पदों को जल्द भरा जाए और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति में सुधार होने से न केवल मरीजों को राहत मिलेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर भी बेहतर होगा।
बोले अधिकारी :
-प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा दिवाकर राजपाल ने बताया कि कमी के बारे में वरीय अधिकारी को सूचित किया गया है। यहां जो भी बुनियादी व्यवस्था है उसमें बेहतरीन स्वास्थ्य सेवा दी जा रही है।
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