
कृषि सखियों को प्राकृतिक खेती का मंत्र, जलालगढ़ के कृषि विज्ञान केंद्र में पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
जलालगढ़ में कृषि विज्ञान केंद्र में सोमवार से पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। यह कार्यक्रम प्राकृतिक खेती के अंतर्गत आयोजित किया गया है, जिसका उद्देश्य किसानों और महिलाओं को कम...
जलालगढ़, एक संवाददाता। कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ में सोमवार से कृषि सखियों के लिए पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों और महिलाओं को कम लागत में, पर्यावरण अनुकूल और पोषणयुक्त खेती की तकनीक से जोड़ना है। प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. के. एम. सिंह और संयुक्त कृषि निदेशक मनोज कुमार ने संयुक्त रूप से किया। मौके पर जिला उद्यान पदाधिकारी राहुल कुमार, सहायक निदेशक (कृषि रसायन) निशांत कुमार सहित कई अधिकारी और कृषि सखियां मौजूद थीं। डॉ. के. एम. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्णिया जिले में कीटनाशकों के असंतुलित प्रयोग से जहां मृदा की उर्वरता घट रही है, वहीं पर्यावरण प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़े हैं।

इसका समाधान केवल प्राकृतिक खेती को अपनाने में है। उन्होंने कहा कि कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली यह तकनीक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हरित भारत के सपने को साकार करने में अहम भूमिका निभा सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण के बाद कृषि सखियां प्राकृतिक खेती की तकनीक को अपने गांवों तक ले जाकर हरित पूर्णिया के लक्ष्य को साकार करने में योगदान देंगी। ....कृषि सखियों की भूमिका: संयुक्त कृषि निदेशक मनोज कुमार ने कृषि सखियों को अपने-अपने गांव में महिलाओं को प्राकृतिक खेती की जानकारी देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कृषि सखियां ही इस अभियान की असली वाहक हैं, जो गांव-गांव प्राकृतिक खेती का संदेश लेकर जाएंगी। जिला उद्यान पदाधिकारी राहुल कुमार ने सब्जी, हल्दी, अदरक, केला और पपीता जैसी बागवानी फसलों में प्राकृतिक खेती अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस पद्धति से उत्पादित फल-सब्जियां अधिक पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक साबित होंगी। वहीं सहायक निदेशक (कृषि रसायन) निशांत कुमार ने मृदा को स्वस्थ रखने के लिए रासायनिक खादों की जगह प्राकृतिक विकल्पों के उपयोग पर जोर दिया। ....प्रशिक्षण का स्वरूप: यह प्रशिक्षण सैद्धांतिक और प्रायोगिक, दोनों स्तरों पर दिया जाएगा। प्रतिभागियों को जीवामृत, धनजीवा और अमृत धारा जैसे प्राकृतिक खेती के घटकों की जानकारी दी जाएगी और उनका प्रयोग कर दिखाया जाएगा। इस प्रशिक्षण में पूर्णिया जिले के विभिन्न प्रखंडों श्रीनगर, जलालगढ़, के नगर, धमदाहा, भवानीपुर, रूपौली, कसबा, डगरूआ और बनमनखी की कृषि सखियां भाग ले रही हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. गोविंद कुमार, डॉ. अतिश सागर, डॉ. संगीता कुमारी, डॉ. राबिया परवीन, अनामिका कुमारी, संतोष कुमार, अजीत कुमार और संजय कुमार सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे। रावे कार्यक्रम के अंतर्गत छात्रों ने भी प्रशिक्षण में सक्रिय भागीदारी की।

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