प्राथमिकी के 15 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, आशा पर सवाल बरकरार
फॉलोअप: धमदाहा, एक संवाददाता। फर्जी अस्पताल में प्रसव कराने के गंभीर मामले में प्राथमिक दर्ज होने के पंद्रह दिन बाद भी संबंधित आशा को चयन मुक्त नहीं

धमदाहा, एक संवाददाता। फर्जी अस्पताल में प्रसव कराने के गंभीर मामले में प्राथमिक दर्ज होने के पंद्रह दिन बाद भी संबंधित आशा को चयन मुक्त नहीं किए जाने को लेकर अब सवाल तेज हो गए हैं। क्षेत्र की महिलाओं को गुमराह कर कथित रूप से एक फर्जी अस्पताल में ले जाकर सिजेरियन से प्रसव कराने के आरोप के बावजूद अब तक ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से लोग हैरान हैं। गौरतलब है कि अनुमंडल मुख्यालय में ‘धमदाहा अस्पताल’ नाम से संचालित एक फर्जी संस्थान का खुलासा उस समय हुआ, जब अनुमंडल पदाधिकारी अनुपम कुमार, अंचलाधिकारी रविंद्र नाथ और अनुमंडलीय अस्पताल धमदाहा के तत्कालीन उपाधीक्षक डॉ. मनोज कुमार ने संयुक्त रूप से जांच की थी।
जांच के दौरान कुंवाड़ी गांव से लाई गई दो प्रसूताओं और नगर पंचायत क्षेत्र के ढोकवा गांव की एक प्रसव पीड़िता ने अधिकारियों के समक्ष बयान दिया था कि उन्हें संबंधित आशा द्वारा ही उक्त फर्जी अस्पताल में लाया गया। पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि सिजेरियन प्रसव के लिए 30 हजार रुपये की बात तय की गई थी, जिसमें पूरी भूमिका आशा की थी। इन आरोपों के आधार पर धमदाहा अस्पताल के अधीनस्थ दो आशा पर फर्जी अस्पताल में लाकर सिजेरियन कराने और धोखाधड़ी के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। इस संबंध में पूछे जाने पर अस्पताल की प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. नेहा भारती ने बताया कि दोनों आशा को चयन मुक्त करने के लिए प्रबंधन की ओर से दो दिसंबर 2025 को ही सिविल सर्जन पूर्णिया को पत्र भेज दिया गया है।

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