बार एसोसिएशन चुनाव: रिश्तों, भरोसे और छवि की ‘दलील’

Apr 06, 2026 12:42 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, पूर्णिया
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पूर्णिया, कार्यालय प्रतिनिधि। कोर्ट की बहस में जहां अधिवक्ता कानून की धाराओं से जीत तय करते हैं, वहीं इस चुनाव में रिश्तों, भरोसे और छवि की ‘दलील’ ज

बार एसोसिएशन चुनाव: रिश्तों, भरोसे और छवि की ‘दलील’

पूर्णिया, कार्यालय प्रतिनिधि।कोर्ट की बहस में जहां अधिवक्ता कानून की धाराओं से जीत तय करते हैं, वहीं इस चुनाव में रिश्तों, भरोसे और छवि की ‘दलील’ ज्यादा मजबूत मानी जा रही है। यही वजह है कि इस बार बार परिसर में कानूनी दलीलों के साथ-साथ चुनावी समीकरण भी बराबर चर्चा में हैं। बार एसोसिएशन के चुनाव इस बार सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे बार परिसर में एक लोकतांत्रिक उत्सव का रूप लेते दिख रहे हैं। 1280 अधिवक्ता मतदाता इस बार नई कार्यकारिणी चुनेंगे और खास बात यह है कि कोर्ट की बहस के साथ-साथ अब रणनीति, संपर्क और समर्थन जुटाने की चुनावी बहस भी तेज हो गई है।

मतदाता सूची जारी होते ही अधिवक्ताओं के बीच हलचल बढ़ गई। आपत्तियों और अपील की प्रक्रिया ने कई नामों को चर्चा में ला दिया। अंतिम सूची आने के बाद अब हर वोट की अहमियत साफ दिख रही है।....नामांकन से बढ़ेगी सरगर्मी:सोमवार यानी 6 से 10 अप्रैल के बीच नामांकन दाखिल होंगे। इससे पहले संभावित उम्मीदवार अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं। कई अधिवक्ता वेट एंड वॉच की रणनीति अपनाए हुए हैं, ताकि अंतिम समय में समीकरण के अनुसार मैदान में उतर सकें। 18 अप्रैल को सुबह मतदान और शाम तक परिणाम आने से उत्सुकता चरम पर रहेगी। अधिवक्ता पूरे दिन न सिर्फ मतदान करेंगे, बल्कि मतगणना तक की हर हलचल पर नजर बनाए रखेंगे।....कोर्ट के गलियारों में बदलता माहौल:आमतौर पर जहां अधिवक्ता केस की तैयारी और बहस में व्यस्त रहते हैं, वहीं इन दिनों कोर्ट परिसर में छोटे-छोटे समूहों में बैठकर रणनीति बन रही है।सीनियर और जूनियर अधिवक्ताओं के बीच संपर्क बढ़ा है। चेंबर और बरामदों में किसे वोट देंगे जैसे सवाल आम हो गए हैं। यह चुनाव अधिवक्ताओं के आपसी नेटवर्क और पकड़ की असली परीक्षा बनता दिख रहा है। एक ओर अनुभवी और सीनियर अधिवक्ता, जिनके पास वर्षों का अनुभव और मजबूत पकड़ है। दूसरी ओर ऊर्जावान युवा चेहरे जो बदलाव और सक्रिय नेतृत्व की बात कर रहे हैं। इस संतुलन से चुनाव में नया रोमांच जुड़ गया है।....हर वोट के लिए पर्सनल कनेक्ट पर जोर:इस बार के चुनाव के लिए कुल मतदाता 1280 हैं। उम्मीदवार व्यक्तिगत संपर्क, फोन कॉल और मीटिंग, चाय पर चर्चा के जरिए समर्थन जुटाने में लगे हैं। यानी यह वन-टू-वन कैंपेन पर आधारित दिख रहा है। यह चुनाव सिर्फ पदाधिकारियों के चयन तक सीमित नहीं है। अधिवक्ताओं के मुताबिक, इससे बार में अनुशासन, अधिवक्ताओं की सुविधाएं, प्रशासन के साथ समन्वय जैसे मुद्दों पर भी असर पड़ेगा।...पदों की अहमियत और अनुभव की कसौटी:अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव समेत 11 श्रेणियों के पदों पर चुनाव होना है। इनमें अध्यक्ष के एक, उपाध्यक्ष के तीन, महासचिव एक, सहायक सचिव तीन, संयुक्त सचिव तीन, वरिष्ठ सदस्य पांच, कार्यकारिणी सदस्य सात सहित अन्य पद शामिल हैं। अनुभव की अनिवार्यता ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। खासकर अध्यक्ष और महासचिव पद को लेकर अधिवक्ताओं के बीच गहरी चर्चा है क्योंकि यही पद संघ की दिशा तय करते हैं। पदों के लिए अनुभव की अनिवार्यता तय की गई है। अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के लिए 20 वर्ष का अनुभव, महासचिव, कोषाध्यक्ष व अन्य प्रमुख पदों के लिए 10 वर्ष, वरिष्ठ सदस्य के लिए 25 वर्ष और कार्यकारिणी सदस्य के लिए 5 वर्ष का अनुभव जरूरी रखा गया हैचुनाव-शेड्यूल:-नामांकन दाखिल: 6 से 10 अप्रैल (सुबह 10:30 से शाम 4:00 बजे तक)-नामांकन की जांच: 11 अप्रैल-नाम वापसी: 13 अप्रैल-मतदान: 18 अप्रैल (सुबह 9:30 से शाम 4:30 बजे तक)-मतगणना व परिणाम: 18 अप्रैल को ही मतदान समाप्ति के बाद

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