पूर्णिया में सिमटती जा रही गेहूं की खेती, लागत व समस्याओं से जूझ रहे किसान
पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। पूर्णिया जिले में कभी बड़े पैमाने पर होने वाली गेहूं की खेती अब धीरे-धीरे सिमटती जा रही है। करीब बीस साल पहले जिले

पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता।पूर्णिया जिले में कभी बड़े पैमाने पर होने वाली गेहूं की खेती अब धीरे-धीरे सिमटती जा रही है। करीब बीस साल पहले जिले के लगभग हर इलाके में गेहूं की खेती व्यापक स्तर पर होती थी, लेकिन बदलते समय, बढ़ती लागत और घटते मुनाफे के कारण किसान अब इस फसल से विमुख होते जा रहे हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि कई किसान केवल अपने घरेलू उपयोग के लिए ही सीमित मात्रा में गेहूं की खेती कर रहे हैं। इस संबंध में किसानो का कहना है कि गेहूं की खेती में लागत के मुकाबले लाभ कम होता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ता है।
खेती में बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और दवाओं की कीमत लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा मौसम की अनिश्चितता भी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। समय पर बारिश नहीं होना या अत्यधिक ठंड और पाला पड़ना फसल को नुकसान पहुंचाता है। गेहूं की खेती में सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से भी किसान परेशान रहते हैं। डीजल से चलने वाले पंपसेट के उपयोग में अधिक खर्च आता है, जिससे लागत और बढ़ जाती है। वहीं, बिजली की अनियमित आपूर्ति भी सिंचाई कार्य को प्रभावित करती है। कई किसानों ने बताया कि खेत की जुताई से लेकर कटाई तक मजदूरी दर में वृद्धि ने भी खेती को महंगा बना दिया है। एक एकड़ में गेहूं की खेती करने में औसतन 15 हजार से 18 हजार रुपये तक की लागत आती है। जिसमे उन्नत बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी का खर्च शामिल होता है। वहीं यदि मौसम अनुकूल रहा और फसल अच्छी हुई, तो प्रति एकड़ 15 से 18 क्विंटल तक उपज प्राप्त होती है। लेकिन कई बार मौसम की मार और कीट-रोग के कारण उत्पादन घटकर 12-15 क्विंटल तक रह जाता है। गेहूं की फसल सामान्यतः 110 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है। नवंबर-दिसंबर में बुवाई के बाद मार्च अप्रैल में इसकी कटाई होती है। हालांकि समय पर बुवाई और उचित देखभाल से ही बेहतर उत्पादन संभव हो पाता है।....बोले अधिकारी:इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी हरिद्वार प्रसाद चौरसिया ने बताया कि वर्तमान में पूर्णिया जिले में लगभग 10 हजार एकड़ भूमि में गेहूं की खेती की गई है। उन्होंने कहा कि यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं और सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रशिक्षण एवं योजनाओं का लाभ उठाएं, तो गेहूं की खेती लाभदायक साबित हो सकती है।इस संबंध में जिला सहकारिता पदाधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि कि सरकार द्वारा 2585 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीदारी की जा रही है। जिले को 72 एमटी गेहूं खरीदारी का लक्ष्य दिया गया है, जिसमे अब तक मात्र 13 एमटी गेहूं की ही खरीदारी हो सकी है, जो लक्ष्य के मुकाबले कम है। लेकिन धीरे धीरे धान खरीदारी करने का लक्ष्य को प्राप्त कर लिया जाएगा।...बोले किसान:इस संबंध में किसान ब्रज किशोर भारती ने बताया कि किसानों को समय पर उचित मूल्य, सिंचाई सुविधा, सस्ती खाद-बीज और तकनीकी मार्गदर्शन मिले, तो गेहूं की खेती को फिर से बढ़ावा मिल सकता है। इसके लिए सरकारी स्तर पर जागरूकता अभियान और समर्थन तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है। इस संबंध में किसान सुमित कुमार ने बताया कि पूर्णिया में गेहूं की खेती कई चुनौतियों से घिरी हुई है। यदि इन समस्याओं का समाधान समय रहते नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में गेहूं का उत्पादन और भी घट सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
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