Purnia News: महानंदा नदी के भीषण कटाव से आसजा कब्रिस्तान संकट में
Purnia News: बैसा, एक संवाददाता। बैसा प्रखंड के पूर्वी क्षेत्र से होकर बहने वाली महानंदा नदी का कटाव लगातार भयावह रूप लेता जा रहा है।

Purnia News: बैसा, एक संवाददाता। बैसा प्रखंड के पूर्वी क्षेत्र से होकर बहने वाली महानंदा नदी का कटाव लगातार भयावह रूप लेता जा रहा है। कंफलिया पंचायत के आसजा गांव के समीप नदी की तेज धारा ने वर्षों पुराने कब्रिस्तान को अपनी जद में ले लिया है। कटाव के कारण कब्रिस्तान का बड़ा हिस्सा नदी में समा चुका है, जबकि शेष भाग भी खतरे में है। स्थिति यह है कि गांव अब कटाव स्थल से महज करीब सौ मीटर की दूरी पर रह गया है, जिससे ग्रामीणों में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय ग्रामीणों की चिंता
स्थानीय ग्रामीण अनवर, मोहम्मद नौमान, कुर्बान, शरीफ, जावेद, आविद, अब्दुस सत्तार, जफीक तथा जमशेद सहित अन्य लोगों ने बताया कि महानंदा नदी का कटाव लगातार गांव की ओर बढ़ रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कटावरोधी उपाय नहीं किए गए तो कब्रिस्तान के बचे हुए हिस्से के साथ-साथ आसजा गांव की दो हजार से अधिक आबादी भी गंभीर संकट में पड़ सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि हर दिन नदी का रुख देखकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। स्थानीय समाजसेवी शराफत हुसैन ने बताया कि लगभग तीन वर्ष पूर्व इस क्षेत्र में कटाव निरोधक कार्य कराया गया था। उस समय लोगों को उम्मीद जगी थी कि अब समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा, लेकिन महानंदा की तेज धारा के सामने सुरक्षा कार्य टिक नहीं सका और धीरे-धीरे ध्वस्त हो गया। इसके बाद से हर बरसात में कटाव की समस्या और अधिक गंभीर होती जा रही है।
कब्रिस्तान का महत्व
ग्रामीणों का कहना है कि कब्रिस्तान केवल धार्मिक और सामाजिक आस्था का केंद्र ही नहीं है, बल्कि गांव के इतिहास और विरासत से भी जुड़ा हुआ है। इसके लगातार नदी में विलीन होने से लोगों की भावनाएं भी आहत हो रही हैं। वहीं गांव के समीप कटाव पहुंचने से कई परिवारों के सामने विस्थापन का खतरा भी उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं जल संसाधन विभाग से अविलंब स्थायी कटावरोधी कार्य शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकेगी।
जल संसाधन विभाग की प्रतिक्रिया
इस संबंध में जल संसाधन विभाग के कनीय अभियंता सादिक अहमद ने बताया कि कटाव प्रभावित स्थल का निरीक्षण कर लिया गया है। स्थिति की विस्तृत जानकारी उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर से आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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महानंदा एवं परमान नदी के जलस्तर में कमी,
-कनकई नदी के जलस्तर में वृद्धि लगातार जारी,
बायसी, एक संवाददाता। नेपाल की तराई में बारिश में कमी एवं सीमांचल के जिलों में लगातार हो रही बारिश के बाद भी महानंदा एवं परमान के जलस्तर में कमी हुई है। वहीं कनकई नदी के जलस्तर में वृद्धि जारी है। एसडीएम अभिषेक रंजन ने बताया कि अनुमंडल क्षेत्र में प्रशासन द्वारा नदियों के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। जलस्तर में कमी हुई है। वहीं महानंदा उप प्रमंडल पूर्णिया केंद्रीय जल आयोग क्षेत्र के अधिकारी अभिषेक लकड़ा ने बताया कि महानंदा एवं परमान नदी के जलस्तर में कमी हुई है एवं कनकई नदी के जलस्तर में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि किशनगंज जिले के तैयबपुर में महानंदा का डेंजर लेवल 66.000 है, जबकि शनिवार की शाम पांच बजें 64.650 मीटर था जो 24 घंटे में जलस्तर में वृद्धि के बाद रविवार को 64.710 मीटर पर पहुंच गया है। दूसरी और पूर्णिया जिले के डेगराह घाट में डेंजर लेवल 35.650 मीटर है। शनिवार की शाम पांच बजे 35.030 मीटर था जो खतरे के निशान के नीचे था। 24 घंटे में रविवार को जलस्तर में कमी के बाद 34.780 मीटर पर पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल के चरघरिया में कनकई नदी का डेंजर लेवल 46.080 मीटर है, शनिवार को 45.540 मीटर था। 24 घंटे में जलस्तर में वृद्धि के बाद रविवार को 45.610 पर पहुच गया खतरे के निशान के काफी नीचे है। वहीं अररिया जिले में परमाण नदी का डेंजर लेवल 47.000 है। जलस्तर में कमी होने से 45.470 मीटर पहुंच गया है जो खतरे के निशान से नीचे है।
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रौटा से चन्नी जानेवाली जर्जर सड़क की मरम्मत कार्य शुरू
बैसा, एक संवाददाता। बैसा प्रखंड क्षेत्र के रौटा पंचायत अन्तर्गत रौटा से चांदनी चौक होते हुए चन्नी गांव जाने वाली जर्जर सड़क पर रविवार को मरम्मत कार्य शुरू होता देखकर स्थानीय ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी लौट आयी है। कार्य स्थल पर मौजूद रौटा पंचायत मुखिया प्रतिनिधि अतिकुर रहमान ने बताया कि इस जर्जर सड़क के कारण इस मार्ग से आवागमन करने वाले राहगीरों की हो रही थी। विभागीय अधिकारियों के समक्ष लगातार मरम्मत कराने का की बात जोरदार तरीके से उठायी जा रही थी। रविवार को ग्रामीण कार्य विभाग ने जर्जर सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्सों में बेड मिशाली डालकर गड्ढों की भराई का कार्य करना शुरू कर दिया है। स्थानीय समाजसेवी जयकुमार भगत, आजाद, संतोष कुमार, फरतुल, शमीम आलम, तनवीर आलम ने बताया कि इस सड़क में दर्जनों जगह छोटे बड़े गड्ढों बनने से राहगीरों, स्कूली बच्चों तथा वाहन चालकों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है तथा दोपहिया वाहन चालकों को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है। लोगों ने विभाग से शीघ्र ही स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है ताकि भविष्य में उन्हें भविष्य में जलजमाव और बदहाल सड़क की समस्या से निजात मिल सके। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि विभाग उनकी वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करेगा।


