
बोले पूर्णिया : दोगच्छी में नया पुल बनेगा तो संवर जाएगी लोगों की जिंदगी
पूर्णिया जिले के दोगच्छी पुल की जर्जर स्थिति ने लगभग 20 हजार लोगों का आवागमन जोखिमभरा बना दिया है। पुल के कई पिलर धंस चुके हैं और बाढ़ के समय यह पार करना खतरनाक हो जाता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार नई और मजबूत पुल का निर्माण करे ताकि उनकी जीवनशैली में सुधार हो सके।
- प्रस्तुति : सुमन कुमार

सीमांचल के पूर्णिया जिले के कसबा नगर परिषद क्षेत्र के दोगच्छी में कोसी नदी पर पुल नहीं होने से लगभग 20 हजार की आबादी का आवागमन जोखिमभरा बना हुआ है। नदी पर बना पुराना पुल अब जर्जर और हिलने लगा है, जिससे हादसे का डर बढ़ गया है। रात में पुल पार करना बेहद खतरनाक होता है क्योंकि कई पिलर धंस चुके हैं। सीमांचल में जहां सड़क और पुल निर्माण तेजी से हुआ है, वहीं दोगच्छी पुल की हालत में सुधार नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन का इस ओर ध्यान नहीं है, जनप्रतिनिधि भी समस्या से आंखें मूंदे हुए हैं। लोगों ने यह स्थिति अपनी नियति मान ली है। वर्ष 2004 की नाव दुर्घटना, जिसमें 13 लोगों की जान गई थी, आज भी याद है। नए पुल के अभाव में गांव का विकास और लोगों की बेहतर जिंदगी, दोनों ही प्रभावित हैं।
पूर्णिया जिले के कसबा नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत दोगच्छी स्थित कोसी नदी पर बना पुल आज जर्जरता की चरम स्थिति में है। बाढ़ के समय इस पुल से गुजरना लोगों के लिए भय और जोखिम से भरा होता है। वर्ष 2004 में पुल के अभाव में नाव पलटने से 13 महिलाएं और बच्चे कोसी धार में डूबकर मारे गए थे। उस भयावह घटना की स्मृति आज भी स्थानीय लोगों के मन में बस गई है। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में मातम और कोहराम का माहौल था। इसके बाद वर्ष 2006 में सत्ता परिवर्तन के उपरांत नाबार्ड की सहायता से स्क्रू पाइल पुल का निर्माण किया गया। कुछ वर्षों तक स्थिति सामान्य रही, लेकिन 2017 की भयंकर बाढ़ ने पुल की नींव हिला दी। कोसी की प्रचंड धारा में पुल का ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया और तब से यह पुल लगातार जर्जर अवस्था में बना हुआ है।वर्ष 2023 में आई भीषण बाढ़ ने स्थिति और खराब कर दी। कोसी नदी की धार तेज होने से पुल के कई पिलर धंस गए और सुरक्षा कारणों से उस पर आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई। बाढ़ कम होने के बाद नगर परिषद ने मरम्मत कर पुल को अस्थायी रूप से चलने योग्य बनाया, लेकिन वर्तमान में पुल का पूर्वी भाग फिर से धंस चुका है। स्थानीय लोगों को डर है कि यदि इस बार भी कोसी में भारी बाढ़ आई तो पुल का पूर्वी हिस्सा तेज बहाव में बह सकता है, जिससे करीब 20 हजार की आबादी प्रभावित होगी। पुल टूटने की स्थिति में दोगच्छी, दियारी, शिकारपुर, बसंतपुर, कुल्लाखास, सब्दलपुर, विश्वास टोला और कनवापाड़ा जैसे गांवों का संपर्क पूरी तरह टूट जाएगा।स्थानीय ग्रामीण बताते हैं कि सीमांचल क्षेत्र में दोगच्छी पुल जैसा संकट अकेला नहीं है। जिले के कई प्रखंडों में आज भी ऐसी नदियां और नाले हैं जहां स्थायी पुल-पुलिया का निर्माण नहीं हो सका है। बकरा और कोसी जैसी नदियों के किनारे बसे गांवों के लोग रोजमर्रा की बड़ी मुश्किलों से गुजरते हैं। बरसात के मौसम में तो कई गांव मुख्य सड़क संपर्क से कट जाते हैं और जीवन थम-सा जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और किसानों के लिए स्थिति सबसे दयनीय होती है। आपातकालीन हालात में बीमारों को समय पर अस्पताल पहुंचाना चुनौती बन जाता है।बरसात में जब पानी का स्तर बढ़ता है, तब ग्रामीण लकड़ी, नाव या अस्थायी चचरी पुलों के सहारे नदी पार करते हैं, जो कभी भी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। अनेक बार लोग पानी के तेज बहाव में बहने से बाल-बाल बचे हैं। किसान वर्ग पर इसका सबसे गहरा असर पड़ता है। खेतों से बाजार तक उत्पाद पहुंचाने में दोगुना समय और खर्च लगता है। परिवहन बाधित होने से कृषि उत्पाद समय पर बिक नहीं पाते और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। विद्यार्थियों की शिक्षा भी प्रभावित होती है। कई बच्चे स्कूल पहुंचने के इंतजार में घंटों फंसे रहते हैं, जबकि कुछ नदी पार करने के दौरान जोखिम उठाते हैं।
नदी पार इलाकों की ओर ध्यान देने की जरूरत
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार और प्रशासन शहरों में सड़क, रोशनी और अन्य सुविधाओं को लेकर तेजी से काम कर रहा है, लेकिन नदी पार इलाकों की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। यही उपेक्षा ग्रामीण विकास में सबसे बड़ी बाधा बन गई है। लोगों की मांग है कि गांवों को मुख्य सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए मजबूत और स्थायी पुल-पुलिया का निर्माण जल्द से जल्द किया जाए।पुल-पुलिया बनने से न केवल आवाजाही सुगम होगी, बल्कि यहां के लोगों का जीवनस्तर, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी सुधार आएगा।
हमारी भी सुनें
पुल इतना जर्जर हो गया है कि पुल का लोहे का पाया कभी भी सरक सकता है। पुल का पूर्वी भाग का पाया काफी दब गया है। लोगों को आवाजाही में काफी डर लगता है।
- फुलकेन
पुल पार करने के दौरान काफी हिलता है। ऐसा लगता है कि पुल कभी भी पाया सहित लुढ़क सकता है। पुल पूरी तरह से जर्जर हालत में आ गया है।
- अब्दुल सुभान
पुल इतना जर्जर हो गया है कि इस बार अगर बाढ़ का पानी आया तो बह सकता है। छोटे-छोटे वाहन लेकर पुल पार करने के दौरान पूरी तरह से हिलने-डोलने लगता है।
- मुजाहिद
वर्ष 2017 में ही पुल बाढ़ के तेज बहाव में टूट गया था। तब से लेकर अबतक पुल की ठोस मरम्मत नहीं हो सका है। तत्काल मरम्मत व नए पुल का निर्माण जरूरी है।
- रामप्रीत कुमार
अगर जर्जर पुल टूट गया तो करीब 20 हजार की आबादी प्रभावित होगी। 20 हजार आबादी का आवाजाही एक मात्र दोगच्छी पुल है। नया पुल की आवश्कता है।
- मनोज कुमार
पुल जर्जर अवस्था में है। किसानों को अपने खेत का अनाज इसी पुल होकर बाजार ले जाना पड़ता है। अगर पुल टूट जाये तो परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
- गुलाब चंद्र
हजारों लोग इस पुल होकर आवाजही करते हैं। अगर बाढ़ के समय पुल टूट गया तो आवाजाही में लोगों को परेशानी होगी। तब नाव का सहारा लेना पड़ेगा।
- कृष्ण कुमार चौरसिया
बाढ़ के समय आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है। लोग पैदल या फिर दो चक्का वाहन लेकर चलते हैं। कई बार विधायक व सांसद को कहा गया।
- मो. मुस्ताक
इस जर्जर पुल होकर कई क्षेत्र के लोग अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। वर्त्तमान समय में पुल के जर्जर रहने से भारी वाहनों का परिचालन नहीं हो पाता है।
- मो. रेहान
जर्जर पुल टूट जाए तो लोगों को अतिरिक्त पांच किलोमीटर की दूरी तय करना पड़ेगा। जो काफी दूर व परेशानियों से भरा हो सकता है।
- मो. शमशेर
पुल पूरी तरह से जर्जर हो चला है। नए पुल की मांग वर्षों से की जा रही है। किन्तु स्थानीय विधायक न ही सांसद ही ठोस पहल कर रहे है।
- दिलशाद अंसारी
पुल की मांग को लेकर पूर्व के विधायक को कई बार कहा गया था। अब वर्तमान विधायक नए पुल बनवाये जाने को लेकर जरूर ठोस पहल करेंगे, ऐसा विश्वास है।
- मो. मुर्तजा
जर्जर पुल रहने के कारण भारी वाहनों का परिचालन नहीं हो पा रहा है। जिससे पूर्वी क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
- मो. आसिक
नए विधायक जर्जर पुल के स्थान पर आरसीसी पुल बनवाये। बाढ़ से पूर्व पुल निर्माण हो जाए तो कठिनाई नहीं होगी। इससे लोगों को आवागमन करने में सहूलियत होगी।
- मो. जमशेद
कसबा मदरसा चौक से दोगच्छी तक सड़क जर्जर है। वहीं इस मार्ग का दोगच्छी पुल भी अंतिम सांस गिन रहा है। इस पर नए विधायक को ध्यान देने की जरूरत है।
- सोहेल आलम
बोले जिम्मेदार
दोगच्छी जर्जर स्क्रूपाईल पुल के स्थान पर नए आरसीसी पुल निर्माण को लेकर प्रयास किया जा रहा है। मंत्री से मिलकर जर्जर पुल की वर्तमान स्थिति से अवगत करवाया जाएगा। पुल की जर्जता को देखते हुए नए पुल की मांग जायज है। जल्द ही समस्या का समाधान होगा।
- नितेश कुमार सिंह, कसबा, विधायक
दोगच्छी पुल की जर्जता व नए पुल की मांग को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को आवेदन दिया गया है। जर्जर पुल के सामानन्तर नए आरसीसी पुल का निर्माण जरूरी है। निर्माण जल्द नहीं हुआ तो कभी भी जर्जर पुल भी बाढ़ के समय पानी के तेज बहाव में बह सकता है।
- हसमत अली उर्फ राही, पार्षद, नप, वार्ड- 13
शिकायत
1. स्क्रू पाईल पुल पूरी तरह हो गया है जर्जर, कई जगह पिलर धंसा गया है।
2. बाढ़ के समय पुल पार करना आमलोगों के लिए काफी खतरनाक है।
3. बाढ़ के समय पुल होकर बड़ी गाड़ियों का परिचालन बंद रहता है।
4. पुल के दोनों ओर का सम्पर्क सड़क भी पूरी तरह जर्जर है।
5. बाढ़ के दौरान हजारों लोगों के घर पानी में डूब जाते हैं। करीब 20 हजार की आबादी को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्य शुरू किए जाते हैं।
सुझाव
1. जर्जर पुल के स्थान पर जल्द नए आरसीसी पुल का निर्माण हो।
2. जब तक नए पुल का निर्माण नहीं होता है तब तक पुराने पुल की ठोस मरम्मत हो।
3. पुल के दोनों ओर सम्पर्क सड़क मरम्मती का कार्य पूर्ण करवाया जाए।
4. पुल की रेलिंग भी तत्काल मरम्मत हो ताकि लोग रात्रि समय पुल सुरक्षित पार कर सके।
5. पुल के पास रेनकट से बने गड्ढों को जल्द भरने का निर्देश दिया गया। गड्ढों के कारण यातायात में बाधा और दुर्घटना की आशंका बढ़ी है। संबंधित विभाग को मरम्मत कार्य तत्काल पूर्ण करने का आदेश जारी हुआ।

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