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6 अप्रैल, 2020|8:36|IST

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रेशमी धागा से तैयार परिधान से महिलाओं की बदल रही तकदीर व तस्वीर.

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मलबरी की खेती से तैयार कोकून एवं रेशमी धागा से तैयार परिधान की सामग्री महिलाओं की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल रही है। धमदाहा प्रखंड की दर्जनों पंचायतों में महिलाएं मलबरी की खेती कर रही हैं। कुकरौन पूर्व पंचायत के कौशिका मलबाड़ी की दीदी रीना कुमारी एवं नूतन देवी सहित दर्जनों ऐसी महिलाएं हैं जो मलबरी की खेती से आत्मनिर्भर हो रही हैं। रीना कुमारी कहती हैं कि 50 डिसमिल जमीन में जीविका परियोजना एवं मनरेगा के संयुक्त सहयोग से मलबरी के पौधे को लगाया जाता है तथा जीविका द्वारा एलएफडी कीड़ा को दिया जाता है। उसमें महिलाएं थोड़ी मेहनत कर साल भर में 30 से 35 हजार आराम से कमा लेती हैं। रीना कुमारी एवं नूतन देवी इस समय महिला उद्यमी मेला में अपने ही कोकून से तैयार सिल्क की साड़ी बेचने के लिए पटना गई हुई है। उन्होंने बताया कि विगत वर्ष 14 साड़ियां उन्होंने लाखों रुपए में बेचे। साड़ी को बनाने में उन्हें मालदा के कारीगरों से सूत कटाई एवं साड़ी के बिनाई में सहयोग लेना पड़ता है। हालांकि साड़ी बिनाई के इस काम में मालदा में दर्जनों कारीगर हैं। दो बार साड़ी बेचकर वापस आ चुकी रीना का आत्मविश्वास बढ़ गया है तो इस कार्य में पूर्व से लगे लोगों से मिलने का फायदा हुआ है। रीना की मानें तो 50 डिसमिल जमीन में एक क्विंटल 60 किलो बेहतरीन कोकून तैयार हो सकता है। रेशम साड़ी एवं दूसरे पहनावे का सामान बनाकर बेचना और आसान है तथा इससे आमदनी में बेहतरीन इजाफा होता है।

इसी तरह बनमनखी प्रखंड के कचहरी बलुआ पंचायत सहित विभिन्न स्थानों पर रेशम तैयार किया जाता है। रेशम का कपड़ा घूमने वाला मशीन नहीं रहने के कारण तत्काल कोकून तैयार करने के लिए दूसरे जिलों में जाना होता है। दीपा देवी जीविका महिला उत्पादक समूह वर्ष 2016 में सदस्य बनी उसके शहतूत का पौधा पुल डेढ़ कट्ठा में लगाई। सुमित्रा देवी अपना घर नहीं होते हुए भी मलबरी कीट पालन करती थी। अब अपना घर बनाई है।

.....धमदाहा की महिलाओं की देश में चर्चा, गर्व की बात : लेशी सिंह

विधायक लेशी सिंह ने धमदाहा विधानसभा क्षेत्र के समस्त लोगों की और से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि गर्व की बात है कि धमदाहा प्रखण्ड अधीन किशनपुर बलुआ पंचायत के कुकरौन नंबर 01 ग्राम की महिलाओं के द्वारा मलबरी की उत्कृष्ट खेती की जाती है जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से सबल एवं सशक्त हो रही हैं। बिहार सरकार में जब वह उद्योग मंत्री थी तभी मुख्यमंत्री कोसी मलबरी परियोजना आरम्भ हुआ था। इसमें पूर्णिया जिला को भी मेरे द्वारा जोड़ा गया था, जिसमें धमदाहा को प्राथमिकता दिया गया। पूर्णिया जिले में कुल 21 उत्पादक मलवरी केंद्र हैं जिसमें कुल एक दर्जन उत्पादक मलवरी केंद्र धमदाहा में हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के द्वारा मन की बात कार्यक्रम में धमदाहा प्रखण्ड के सुदूर इलाके किशनपुर बलुआ की महिलाओं के संबोधन से आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले इस क्षेत्र की महिलाओं के द्वारा मलबरी के पेड़ पर रेशम के कीड़ो से कोकून तैयार किया जाता था, जिसे दूसरे बड़े साहूकार को कम कीमत में बेचकर किसी तरह अपना जीवनयापन करती थीं। परन्तु वर्तमान में महिलाओं ने सरकार के सहयोग से आदर्श जीविका महिला मलबरी समूह बना कर उद्योग का रूप देकर आर्थिक रूप से खुद को सबल बना रही हैं जो निश्चित ही महिला सशक्तिकरण का जीता -जागता उदाहरण है।

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  • Web Title:Changing fate and picture of women with silk thread-ready apparel