Purnia News: पूर्णिया में पंद्रह दिवसीय लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य समापन
Purnia News: पूर्णिया में पंद्रह दिवसीय लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य समापन हुआ। इस समापन समारोह में जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने बिहार की लोककला के संरक्षण की आवश्यकता को बताया। कार्यशाला में प्रशिक्षुओं ने लोक संस्कृति से जुड़े प्रशिक्षण प्राप्त किए और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

Purnia News: बिहार की लोककला, लोकगीत एवं लोकनृत्य हमारी सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली विरासत पूर्णिया में पंद्रह दिवसीय लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य समापन पूर्णिया , वरीय संवाददाता। कला एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन पूर्णिया के तत्वावधान में आयोजित पंद्रह दिवसीय लोकगीत एवं लोकनृत्य प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में पूर्णिया के जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार उपस्थित थे।
समापन समारोह
समापन समारोह का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं प्रशिक्षुओं द्वारा प्रस्तुत आकर्षक लोकगीत एवं लोकनृत्य कार्यक्रमों के साथ हुआ। कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षुओं ने बिहार की समृद्ध लोक सांस्कृतिक परंपराओं से संबंधित विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा समापन समारोह में अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार की लोककला, लोकगीत एवं लोकनृत्य हमारी सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली विरासत हैं।
प्रशिक्षण का महत्व
इस प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाएं नई पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति से जोड़ने तथा विलुप्तप्राय लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने सभी प्रशिक्षुओं से अपनी प्रतिभा को निरंतर विकसित करने और लोककला की इस समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। समापन समारोह में प्रशिक्षुओं द्वारा प्रस्तुत लोकगीत एवं लोकनृत्य ने उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों में प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान, अभ्यास और लोक संस्कृति के प्रति उनकी रुचि स्पष्ट रूप से दिखाई दी। कार्यशाला का समापन लोककला एवं लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के संकल्प के साथ हुआ। इस अवसर पर अधिकारियों, कलाकारों, प्रशिक्षुओं एवं बड़ी संख्या में कला एवं संस्कृति प्रेमियों की उपस्थिति थी।


