खोजी जा रही जिले की दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपि, होगा डिजीटल संरक्षण
पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले में दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपि खोजी जा रही है। इन पांडुलिपि का डिजीटल संरक्षण क

पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता।जिले में दुर्लभ प्राचीन पांडुलिपि खोजी जा रही है। इन पांडुलिपि का डिजीटल संरक्षण किया जायेगा। इसके लिए जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने प्राचीन पांडुलिपि विरासत के संरक्षण के लिए लोगों को आगे आने की अपील की है। जिलाधिकारी ने कहा है कि वैसे व्यक्ति अथवा संस्था जिनके पास पुरानी पांडुलिपि है। वे पांडुलिपि के सर्वेक्षण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। जिला पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि पाण्डुलिपियों का तात्पर्य कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र कपड़ा, धातु आदि पर हाथ से लिखे गए ग्रन्थ जो न्यूनतम 75 वर्ष प्राचीन हों। ये पांडुलिपि किसी भी भाषा और लिपि में हो सकते हैं।
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी पंकज कुमार पटेल ने बताया कि संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा संचालित ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत लोगों को भी इस महत्वपूर्ण पहल से जोड़ा जा रहा है। देशभर में बिखरी हुई दुर्लभ पांडुलिपियों को चिन्हित कर डिजिटल संरक्षण करना समय की जरूरत है। इसके लिए ज्ञान भारतम प्लेटफॉर्म से ऑनलाइन सर्वे चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत की जो समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर रही है। इन धरोहरों को सहेजना उसे संभालकर रखने की जरूरत है। इसलिए इनकी पांडुलिपि को डिजीटल संरक्षण करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है। इस तरह के डिजीटल संरक्षण के बाद लोग घर बैठे इसे जान पायेंगे कि हमारी देश की समृद्व संस्कृति किस रूप में रही है। इसकी सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व किस रूप में है। इसके लिए जगह जगह संपर्क किया जा रहा है। इससे छिपी हुई सांस्कृतिक धरोहर और पहचान सामने आयेगी। इससे लोग जान पायेंगे कि किस तरह की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान पहले हमारी रही है। इसमें सभी सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से जुड़े लोगों को आगे आने की जरूरत है जिससे पांडुलिपि विरासत का संरक्षण में सहूलियत हो सके। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने बताया कि इसके लिए पुराने संस्थान और स्थलों का भ्रमण कर जानकारी एकत्र की जा रही है।
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