Hindi NewsBihar NewsPurnia NewsAncient Banyan Tree in Vishnupur Village A Center of Devotion for Goddess Kali
आस्था का प्रतीक: विष्णुपुर का 300 वर्ष पुराना बरगद का पेड़ और मां काली मंदिर

आस्था का प्रतीक: विष्णुपुर का 300 वर्ष पुराना बरगद का पेड़ और मां काली मंदिर

संक्षेप:

अमौर प्रखंड के विष्णुपुर गांव में तीन सौ वर्ष पुराना बरगद का पेड़ मां काली की आस्था का केंद्र है। हर वर्ष यहां भव्य सजावट के साथ काली मंदिर में पूजा-अर्चना होती है। यह परंपरा नवविवाहिता के खोइछा खोलने...

Mon, 20 Oct 2025 01:23 AMNewswrap हिन्दुस्तान, पूर्णिया
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अमौर, एक संवाददाता। अमौर प्रखंड के विष्णुपुर गांव में स्थित लगभग तीन सौ वर्ष पुराना बरगद का पेड़ आज भी मां काली की अखंड आस्था और श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। इस पवित्र वृक्ष के समीप स्थित काली मंदिर में हर वर्ष की भांति इस बार भी भव्य सजावट के साथ मां काली की प्रतिमा स्थापित की जा रही है। कार्तिक मास में यहां विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं, जहां दूर-दराज से श्रद्धालु आकर माथा टेकते हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा करीब तीन सौ वर्ष पूर्व शुरू हुई थी जब रानीगंज हांसा से आई एक नवविवाहिता विष्णुपुर गांव के स्वर्गीय मुकुंद झा के घर आईं।

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मैथिल परंपरा के अनुसार दुल्हन अपने आंचल में खोइछा लेकर आई थीं जिसे गोंसाई घर में खोलना था। मगर लाख प्रयासों के बावजूद खोइछा नहीं खोल पाया। अगले दिन एक धार्मिक प्रवृत्ति की वृद्ध महिला ने बताया कि उन्हें रात में मां काली का स्वप्न आया। उन्होंने निर्देश दिया कि खोइछा घर के सामने स्थित छोटे बरगद के नीचे खोला जाए और वहीं उनकी स्थापना की जाए। इसके बाद ग्रामीण महिलाओं ने स्नान कर नए वस्त्र पहनकर बरगद के नीचे पूजा की और दुल्हन को बैठाकर अनुष्ठान प्रारंभ किया तो खोइछा स्वयं खुल गया। उसमें से निकली सामग्री को मां काली का स्वरूप मानकर वहीं स्थापित किया गया। तभी से यह स्थान आस्था का केंद्र बन गया। प्रारंभ में बरगद के नीचे केवल मिट्टी का छोटा पिंडाल और घास-फूस का मंदिर था। समय के साथ इसे टीन छत वाले मंदिर में बदला गया और वर्तमान में भव्य मंदिर का निर्माण कर सुंदर रूप दिया गया है। आज यह स्थल केवल एक धार्मिक स्थान नहीं, बल्कि भक्तों की अटूट श्रद्धा और लोकविश्वास का जीवंत प्रतीक है। कार्तिक मास में लगने वाली पूजा और मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।