4 लाख मुआवजा देकर रफा-दफा नहीं करें, अशोक धाम भगदड़ की जवाबदेही तय करे सरकार: प्रशांत किशोर
लखीसराय पहुंचे बांकपुर एमएलए प्रशांत किशोर ने अशोक धाम भगदड़ में 7 लोगों की मौत पर सम्राट चौधरी सरकार पर निशाना साधा। कहा कि 4 लाख मुआवजा देने भर से काम नहीं चलेगा। सरकार इस घटना की जवाबदेही तय करे।

Prashant Kishor at Lakhisarai: बांकीपुर के नवनिर्वाचित सह जन सुराज पार्टी के संयोजक प्रशांत किशोर उर्फ पीके मंगलवार को लखीसराय पहुंचे। पीके ने लखीसराय सदर अस्पताल जाकर अशोक धाम भगदड़ में घायलों से मुलाकात की और उनका हाल चाल जाना। उसके बाद पीके मृतक के परिजनों से मिलने के लिए उनके घर पहुंचे। प्रशांत किशोर ने कहा कि चार-चार लाख देकर खानापूर्ति से काम नहीं चलेगा। भगदड़ी की जवाबदेही तय करना होगा। इतनी बड़ी घटना के बावजूद किसी भी कर्मी या अधिकारी पर अबतक कोई कार्रवाई नहीं की गई। पीके ने स्थानीय विधायक विजय कुमार सिन्हा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह को भी लपेटा।
प्रशांत किशोेर ने कहा कि सरकारी अस्पताल में इलाज की व्यवस्था नहीं होने से घायल मरीजों के परिजन उन्हें प्राइवेट नर्सिंग होम में ले गए। एक निजी नर्सिंग होम में दो घायल आईसीयू में भर्ती हैं। यह हादसा प्रशासन की मुस्तैदी नहीं रहने की वजह से हुआ। लेकिन, अभी तक किसी हवलदार पर भी ऐक्शन नहीं हुआ। मुआवजा का ऐलान कर पीड़ितों को चुप कराया जा रहा है। प्रशासन ने अशोक धाम की व्यवस्था को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। सात लोगों को मौत का जिम्मेदार कौन है, उसकी पहचान करने और जिम्मेदारी तय करने पर सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की।
ललन सिंह, विजय सिन्हा को भी पीके ने लपेटा
पीके ने कहा कि जब हादसा हुआ तो सदर अस्पताल में एक आयुष के डॉक्टर थे। आज यहां एक भी मरीज नहीं हैं क्योंकि सदर अस्पताल में न्यूनतम सुविधाएं भी नहीं है। शाम होते होते सभी घायल या तो घर चले गए या फिर प्राइवेट में शिफ्ट हो गए। बिहार में घटना के बाद अधिकारी या मंत्री सब पल्ला झाड़ लेते हैं। अशोक धाम में सावन की सोमवारी पर इतनी भीड़ हमेशा होती है। लेकिन, मैनेजमेंट का इंतजाम नहीं रहता है। घटना के बाद घायलों का ठीक से इलाज भी सरकार ने नहीं करवाया। विजय सिन्हा आए पर किसी को जिम्मेदार ठहराने से बचकर निकल गए। यहीं के नेता ललन सिंह केंद्र में मंत्री हैं। उनकी संजीदगी भी नहीं दिख रही है।
सोमवार को हुआ था भीषण भगदड़
लखीसराय स्थित अशोक धाम शिव मंदिर सोमवार को दर्दनाक हादसे का गवाह बना। तीसरी सोमवारी को मंदिर में जलाभिषेक के लिए इतनी भीड़ उमड़ गई कि प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की पूरी व्यवस्था नाकाफी साबित हो गई। एक बीजली का पोल गिरने से करंट फैलने के अफवाह में भगदड़ मच गई। जान बचाने के लिए लोग भागने लगे। इस दौरान बड़ी संख्या में शिवभक्त जमीन पर गिर गए। उन्हें कुचलते हुए भीड़ में शामिल लोग भागने लगे। इस भगदड़ में सात महिला शिवभक्तों की मौत हो गई और 25 से अधिक जख्मी हो गए। खबर मिलते ही डीएम शैलेंद्र कुमार और एसपी प्रेरणा कुमार मौके पर पहुंचे और अतिरिक्त बलों की तैनाती करके हालात को संभाला गया।
विजय सिन्हा ने मानी लापरवाही की बात
हादसे की जानकारी मिलने पर स्थानीय विधायक और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा आनन फानन में लखीसराय पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले अस्पताल में इलाजरत घायलों से मुलाकात की और जिला प्रशासन को उनका समुचित खयाल रखने का निर्देश दिया। विजय सिन्हा ने मृतकों के परिजनों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी। मीडिया को दिए बयान में उन्होंने स्वीकार किया कि प्रशासन ने लापरवाही बरती। तीसरी सोमवारी पर जुटने वाली भीड़ और प्रेशर का अनुमान लगाने में प्रशासन विफल रहा। कहा कि घटना के वक्त अगर हमारे लोग मौजूद होते तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों को चिन्हित कर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया।
सीएम सम्राट चौधरी ने जताया शोक
हादसे को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दुख जताया। सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर उन्होंने मृतकों के प्रति संवेदना जताई और उनके परिजनों को ढाढस बंधाया। सीएम ने सभी मरने वालों के आश्रितों के लिए चार-चार लाख की सहायता राशि का ऐलान किया।
पीएम मोदी भी हादसे से दुखी
लखीसराय में भगदड़ में सात शिवभक्तों की मौत और दो दर्जन से अधिक के घायल होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक प्रकट किया। एक्स हैंडल पर पोस्ट डालकर उन्होंने कहा कि लखीसराय में बहुद हृदयविदाकर घटना हुई है। ईश्वर हादसे में जान गंवाने वाले भक्तों की आत्मा को शांति प्रदान करें और घायलों को शीघ्र स्वस्थ करें।
घटना के बाद सदर अस्पताल रोड में बवाल
हादसे में प्रशासनिक लापरवाही उजागर होने पर स्थानीय लोग आक्रोशित हो गए। लोगों ने करीब 30 मिनट तक सदर अस्पताल के पास सड़क जाम कर दिया। आरोप लगाया कि प्रशासन ने जो दावा किया उस पर खड़ी नहीं उतरी। मंदिर परिसरऔर आसपास की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर थी।


