
प्रशांत किशोर ने चुप्पी तोड़ी, हार की जिम्मेदारी ली; बोले- जन सुराज विश्वास नहीं जीत सकी
प्रशांत किशोर ने इस हार की जिम्मेदारी अपने ऊपर खुद ली और कहा कि मैं लोगों का विश्वास नहीं जीत सका। प्रशांत किशोर ने कहा, ‘हमने ईमानदार कोशिश, लेकिन यह पूरी तरह से असफल रहा। इसे मानने में कोई नुकसान नहीं है।’
बिहार चुनाव में करारी हार के बाद जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर पहली बार सामने आए। मीडिया के सामने प्रशांत किशोर ने चुनाव में पार्टी की हार पर खुलकर अपनी बात रखी। प्रशांत किशोर ने इस हार की जिम्मेदारी अपने ऊपर खुद ली और कहा कि मैं लोगों का विश्वास नहीं जीत सका। प्रशांत किशोर ने कहा, ‘हमने ईमानदार कोशिश, लेकिन यह पूरी तरह से असफल रहा। इसे मानने में कोई नुकसान नहीं है।’
प्रशांत किशोर ने कहा कि जिस दल को सिर्फ साढ़े तीन फीसदी वोट मिली है उसकी प्रेस वार्ता में इतने साथी आए हैं तो इससे यह पता चलता है कि इस चुनाव में हमने कुछ तो सही काम किया होगा। हमलोग आज से साढ़े तीन साल पहले बिहार में व्यवस्था परिवर्तन की सोच के साथ आए थे। इसमें हमने एक ईमानदार प्रयास किया। इसमें हमको बिल्कुल सफलता नहीं मिली। यह मानने में कोई गुरेज नहीं है। व्यवस्था परिवर्तन के जिस अभियान को लेकर हम चले थे तो व्यवस्था परिवर्तन की बात तो छोड़िए हमलोग सत्ता परिवर्तन भी नहीं करा सके।
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की राजनीत को बदलने में हमलोगों की थोड़ी-बहुत भूमिका जरुर बनी है। हमलोगों की सोच में, हमारे प्रयास में जरुर कोई गलती रही होगी तब ही जनता ने हमलोगों को नहीं चुना औऱ हमलोगों पर विश्वास नहीं जताया। इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से मेरी है, प्रशांत किशोर की है। मैं इसकी जिम्मेदारी लेता हूं कि मैं अपने साथियों को जनता का विश्वास नहीं दिला सका। अपने उम्मीदवारों की हार पर पीके ने कहा कि उन्होंने एक से एक बेहतर उम्मीदवार दिए, लेकिन जनता ने उन्हें हराकर किसी और को जीतवा दिया। अब कोई खिचड़ी खाना चाहे तो उसे कोई पुलाव कैसे खिला सकता है।
प्रायश्चित करेंगे प्रशांत किशोर
प्रशांत किशोर ने कहा कि जिन लोगों ने जनसुराज की सोच और प्रयास से जुडकर एक सपना देखा था, एक आशा की किरण जगी थी कि बिहार में एक नई व्यवस्था बनाई जा सकती है। उन सभी की आशाओं पर खरा नहीं उतर पाने के लिए जो दोष है वो मेरा है। इसके लिए मैं विनम्रता से आपसे माफी मांगता हूं कि मैं आपके सपनों और सोच के अनुसार व्यवस्था नहीं बना सका। प्रायश्चित के तौर पर मैं आज से दो दिन बाद गांधी भितिहरवा आश्रम में एक दिन का मौन उपवास रखूंगा।
जो भी जनसुराज के साथी जहां हैं वो वहीं पर एक दिन का उपवास रख सकते हैं। गलती हमलोगों से हुई होगी। कमी होगी। लेकिन हमलोगों ने गुनाह नहीं की है। मैं बिहार की जनता के सामने अपने साथियों के साथ बिल्कुल सिर उठा कर यह कह सकता हूं कि हमलोगों ने कोई गुनाह नहीं किया। जिस बिहार में 30-35 साल से सिर्फ जाति की राजनीति हुई वहां जाति का जहर फैलाने का गुनाह नहीं किया है।
संन्यास पर क्या बोले पीके…
जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने कहा है कि नीतीश कुमार सरकार बनने के बाद 6 महीने के अंदर डेढ़ करोड़ महिलाओं को दो-दो लाख रुपये दे दें तो वो राजनीति से संन्यास ले लेंगे। पीके ने कहा कि वे आज भी इस बात पर कायम हैं कि नीतीश कुमार को 25 से अधिक सीट नहीं आ सकती है। उनकी क्षमता इतनी ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में वोट की खरीद की गई। 40 हजार करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई। हर विधानसभा क्षेत्र में 60-62 हजार महिलाओं को 10-10 हजार दिया गया। सिर्फ सितंबर और अक्टूबर में ही 18 योजनाओं की घोषणा की गई है।
उन्होंने कहा कि जनसुराज महिलाओं को दो-दो लाख रुपये दिलाने की लड़ाई लड़ेंगी। पीके ने कहा कि वे बिहार नहीं छोड़ने वाले। वे अब दोगुनी मेहनत करेंगे और व्यापक अभियान चलाएंगे। पीके ने वोटिंग पर भी सवाल उठाया और कहा कि मधुबनी में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी और उनके सिम्बल को कोई नहीं जानता, पर उन्हें एक लाख से अधिक वोट आया। य़ह कैसे सम्भव हुआ? इस तरह कई सीटों का मामला है।





