
प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी का नाम शिल्पी-गौतम केस से जोड़ा, 1999 में मौत से हिल गया था बिहार
प्रशांत किशोर ने तारापुर सामूहिक हत्याकांड में सम्राट चौधरी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए उनका नाम पटना के बहुचर्चित शिल्पी-गौतम केस से जोड़ दिया है। 1999 में शिल्पी जैन और गौतम सिंह की मौत से बिहार हिल गया गया था।
जन सुराज पार्टी के सुप्रीमो प्रशांत किशोर ने 1995 के तारापुर सामूहिक हत्याकांड में गलत उम्र का सर्टिफिकेट देकर जेल से छूटने का आरोप लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता और उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बर्खास्त करने और गिरफ्तार करने की मांग की है। प्रशांत ने इसके साथ ही अब सम्राट का नाम पटना के बहुचर्चित शिल्पी-गौतम केस से जोड़ते हुए उनसे कुछ सवालों के जवाब मांगे हैं। 1999 में शिल्पी जैन और गौतम सिंह की मौत ने बिहार को हिला दिया था। तब राबड़ी देवी की सरकार थी। केस में उनके भाई साधु यादव का नाम आ गया था। गौतम राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का नेता और साधु का करीबी था। सीबीआई जांच के बाद दोनों मौत को आत्महत्या बताकर क्लोजर रिपोर्ट लगा दी गई थी।
प्रशांत किशोर ने सोमवार को पटना में पत्रकार सम्मेलन बुलाकर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के मंत्री अशोक चौधरी और सम्राट चौधरी को फिर से निशाना बनाया। प्रशांत ने पिछली बार भी भाजपा नेता मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल और संजय जायसवाल के साथ-साथ इन दोनों पर अलग-अलग तरह के आरोप लगाए थे। उन आरोपों को लेकर अशोक चौधरी ने प्रशांत किशोर को 100 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा है, जबकि संजय जायसवाल ने केस कर दिया है।
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प्रशांत ने शिल्पी-गौतम केस से सम्राट को जोड़ते हुए कहा- “ये सिर्फ हत्या के अभियुक्त नहीं हैं। आपने शिल्पी-गौतम की कहानी सुनी होगी। जब लालू यादव के जंगलराज का चरम था, तब का वह केस याद करिए। आरोप लगा था कि एक डॉक्टर के लड़के (गौतम) को और शिल्पी के साथ सामूहिक बलात्कर के बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। साधु यादव पर उसका आरोप लगा था। बड़ा हंगामा हुआ। सीबीआई में केस गया। क्या उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उर्फ राकेश कुमार उर्फ सम्राट कुमार मौर्य उस केस में संदिग्ध अभियुक्त के तौर पर नामजद थे या नहीं, ये मीडिया को वो बता दें। उसके बाद हम दस्तावेज जारी करेंगे।”
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प्रशांत ने सम्राट से आगे पूछा- “सीबीआई ने अभियुक्त के तौर पर इनकी जांच की थी या नहीं, उस मुकदमा में उनको नामजद संदिग्ध बनाया था या नहीं, ये बताएं। ये पूरा केस भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने उठाया था। तब सम्राट चौधरी साधु यादव और राजद गैंग का हिस्सा थे। वो बताएं कि सीबीआई ने आपकी जांच अभियुक्त के तौर पर की थी या नहीं, आपके सैंपल टेस्ट लिए गए थे या नहीं। आपकी घटना में क्या संलिप्तता है, नहीं है, ये बताइए। लालू का प्रभाव था, साधु यादव को बचाने के लिए केस को बंद कर दिया गया। तब के राकेश और आज के सम्राट बताएं कि उस केस में क्या भूमिका थी, वह नामजद थे या नहीं थे, और थे तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की।”
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3 जुलाई 1999 में पटना के एक फ्लैट के गैराज में पटना के कपड़ा व्यापारी की बेटी शिल्पी जैन और लंदन में डॉक्टर की प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टर बीएन सिंह के बेटे गौतम सिंह का लगभग नग्न शव एक कार में बरामद हुआ था। एक दिन पहले 2 जुलाई को शिल्पी जैन कॉलेज जाने के लिए घर से निकली थीं, लेकिन शाम में नहीं लौटने पर केस दर्ज किया गया था। गौतम सिंह आरजेडी में सक्रिय थे और साधु यादव के करीबी थे। पुलिस ने इसे सुसाइड केस बताया, जिसकी जांच पर सवाल उठे तो राबड़ी देवी ने केस सीबीआई को सौंप दिया। सीबीआई ने 2003 में दोनों मौत को आत्महत्या बताकर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट लगा दिया।
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तब राज्य में विपक्ष का बड़ा चेहरा रहे भाजपा नेता सुशील मोदी ने शिल्पी-गौतम केस को लेकर कई तरह के आरोप लगाए थे। आरोप लगा था कि शिल्पी के कपड़ों पर एक से अधिक पुरुषों के वीर्य के निशान मिले। सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट में इसे पसीने का निशान बताया। सीबीआई ने साधु से डीएनए सैंपल मांगा था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। शिल्पी जैन के परिवार ने इस केस को ऊपरी अदालत में ले जाने की बात कही थी। 2006 में उनके भाई प्रशांत जैन को अगवा कर लिया गया था। वो कुछ दिन बाद छूटकर आ गए थे। शिल्पी-गौतम केस में सीबीआई रिपोर्ट को परिवार ने चुनौती दी या नहीं, इसकी कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है।





