पॉकेट पॉलिटिक्स में फंसी BJP; बांकीपुर में बंटी-नीरज एपिसोड पर सियासत गर्म, राजद-कांग्रेस हमलावर
बांकीपुर में एनडीए कैंडिडेट बदलने पर बिहार की सियासत गर्म हो गई है। राजद ने कहा है कि बीजेपी पॉकेट पॉलिटिक्स के मकरजाल में फंस गई।

Bankipur By-Election: बांकीपुर उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर चौंका दिया। पूरे लाव लश्कर के साथ जिस अभिषेक बंटी का नामांकन कराया गया वे 24 घंटे के भीतर मैदान से बाहर हो गए और उनकी सीट पर 28 साल से बूथ अध्यक्ष नीरज सिन्हा को नितिन नवीन की सीट पर उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। भाजपा के इस स्टेप पर बिहार की सियासत गर्म हो गई है। विपक्षी राजद और कांग्रेस इस मौके को भुनाने में एक पल भी नहीं रुके। राजद ने इसे पार्टी की पॉकेट पॉलिटिक्स की विफलता बताया है तो कांग्रेस ने इसे शीर्ष स्तर पर गुटबाजी करार दिया है। प्रशांत किशोर भी पीछे नहीं हैं।
राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा है कि भाजपा में पॉकेट पॉलिटिक्स चल रही है। पहले राष्ट्रीय नेतृत्व ने पॉकेट से निकालकर नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया तो अब नितिन नवीन ने अपने पॉकेट के नेता अभिषेक बंटी को अपनी सीट पर उम्मीदवार बना दिया। लेकिन, यह फॉर्मूला फेल हो गया। भाजपा अपने ही मकरजाल में उलझकर रह गई है। अभी आगे बहुत कुछ होना बाकी है।
इधर, कांग्रेस प्रवक्ता असीतनाथ तिवारी ने कहा है कि शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर गुटबाजी सतह पर आ गई है। अभिषेक सिन्हा ने नामांकन वापसी के लिए जो तर्क दिया है वह बहुत ही बचकाना है। एक साधारण कार्यकर्ता को टिकट मिलने से 24 घंटे पहले पूरा परिवार खुशी में ढोल नगारे पीट रहा था। फिर पारिवारिक कारण कौन सा आ गया? बहाने की स्क्रिप्ट भी अच्छी लिखवा लेते। इस प्रकरण में पार्टी की आंतरिक गुटबाजी भी सतह पर आ गई है। राष्ट्रीय अध्यक्ष को भ्रम हो गया था कि अमित शाह की परमिशन के बगैर भी किसी को टिकट दे सकते हैं। वह भ्रम टूट गया।
बताया जा रहा है कि नीरज कुमार 13 जुलाई को बांकीपुर उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करेंगे। इस बीच अभिषेक कुमार ने भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पार्टी कैंडिडेट के लिए काम करने का वादा किया है। लेकिन, इस प्रकरण ने एनडीए के विरोधियों को बैठे बठाए बड़ा हथियार दे दिया है। कैंडिडेट वापस लेने का मुद्दा पूरे चुनाव के दौरान विपक्ष का हथियार बना रहेगा। चर्चा चल रही है कि अभिषेक के माता-पिता का नाम चारा घोटाले से जुड़ा है। इस चर्चा से विपक्षियों को मानसिक उर्जा मिल गई है।
लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
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