बिहार चुनाव के दौरान खर्चे से अधिक दलों की आमदनी, 88 करोड़ की बचत
एडीआर की रिपोर्ट में एक दिलचस्प तथ्य यह भी सामने आया है कि विश्लेषण किए गए दलों में बहुजन समाज पार्टी (BSP) एकमात्र ऐसी पार्टी रही, जिसने बिहार चुनाव अवधि के दौरान अपने केंद्रीय मुख्यालय या राज्य इकाई स्तर पर किसी भी प्रकार का फंड मिलने की घोषणा नहीं की।

वर्ष 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाली संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव लड़ने वाले प्रमुख राजनीतिक दलों ने कुल 281.32 करोड़ का फंड जुटाया, जिसमें से 193.47 करोड़ चुनाव के दौरान खर्च किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, कुल खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा प्रचार-प्रसार पर लगाया गया। एडीआर ने अपनी इस रिपोर्ट में 5 राष्ट्रीय दलों भाजपा, कांग्रेस, आप, बसपा और माकपा सहित 5 क्षेत्रीय दलों राजद, जदयू, लोजपा (रामविलास), एआईएमआईएम और भाकपा के खर्च के ब्योरे का विश्लेषण किया है।
रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, इन 10 प्रमुख दलों ने मिलकर कुल 281.323 करोड़ का फंड इकट्ठा किया था। इसके मुकाबले उनका कुल घोषित चुनावी खर्च 193.466 करोड़ रहा। इसका सीधा मतलब है कि राजनीतिक दलों द्वारा जुटाए गए फंड और घोषित खर्च के बीच करीब 88 करोड़ का बड़ा अंतर देखा गया है।
कहां कितना हुआ खर्च?
चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों ने अलग-अलग मदों में करोड़ों रुपये बहाए। प्रचार में सबसे अधिक खर्च किया गया। पार्टियों ने अपने प्रचार-प्रसार पर कुल 100.429 करोड़ खर्च किए, जो कि कुल चुनावी खर्च का 36.68 प्रतिशत है। चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं के दौरों और यात्राओं पर 79.539 करोड़ खर्च किए गए। यह कुल घोषित खर्च का 29.05 प्रतिशत है, जो इसे दूसरा सबसे बड़ा खर्च बनाता है।
राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों को एकमुश्त राशि के रूप में कुल 62.072 करोड़ दिए। सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों से किए गए वर्चुअल प्रचार पर 13.074 करोड़ का खर्च आया।
चुनाव आयोग के अनिवार्य दिशानिर्देशों का पालन करते हुए, उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास को सार्वजनिक करने और विज्ञापनों पर 3.886 करोड़ खर्च किए गए। इसके अलावा अन्य खर्चों में 14.804 करोड़ की राशि दिखाई गई।
बसपा ने घोषित किया शून्य फंड
एडीआर की रिपोर्ट में एक दिलचस्प तथ्य यह भी सामने आया है कि विश्लेषण किए गए दलों में बहुजन समाज पार्टी (BSP) एकमात्र ऐसी पार्टी रही, जिसने बिहार चुनाव अवधि के दौरान अपने केंद्रीय मुख्यालय या राज्य इकाई स्तर पर किसी भी प्रकार का फंड मिलने की घोषणा नहीं की।
सिर्फ 10 दलों का ही विश्लेषण क्यों?
बिहार विधानसभा चुनाव में कुल 161 राजनीतिक दलों ने किस्मत आजमाई थी, जिनमें 6 राष्ट्रीय पार्टियां, 10 क्षेत्रीय पार्टियां और 145 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल शामिल थे। हालांकि, एडीआर की यह रिपोर्ट केवल उन्हीं 10 प्रमुख दलों के विश्लेषण तक सीमित रही जिनके खर्च के आधिकारिक बयान उपलब्ध हो पाए थे।
नियम क्या कहता है?
एडीआर के मुताबिक, नियमानुसार सभी राजनीतिक दलों के लिए यह अनिवार्य है कि वे चुनाव समाप्त होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने केंद्रीय मुख्यालयों और राज्य इकाइयों द्वारा जुटाए गए फंड और किए गए खर्च का पूरा ब्योरा भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के समक्ष प्रस्तुत करें। यह रिपोर्ट उन्हीं आधिकारिक दस्तावेजों पर आधारित है।
लेखक के बारे में
Himanshu Jhaबिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।
एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।
हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।
काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।
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