बिहार हुआ नक्सल मुक्त, पुलिस का बड़ा दावा; इस अंतिम नक्सली ने कर दिया सरेंडर
नक्सली कोड़ा ने मुंगेर में बिहार एसटीएफ और डीआईजी मुंगेर के समक्ष हथियार डाले। आत्मसमर्पण करने के साथ ही उसने एक-एक एके 47 व एके 56 राइफल, दो इंसास राइफल और 505 कारतूस भी जमा कराए हैं। उसे आत्मसमर्पण सह पुनर्वास योजना का लाभ मिलेगा।

तीन लाख के इनामी नक्सली सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम के बुधवार को मुंगेर में आत्मसमर्पण कर दिया। इसके साथ ही पुलिस मुख्यालय ने बिहार के पूरी तरह नक्सल मुक्त होने का दावा किया है। पुलिस मुख्यालय ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसकी घोषणा की है। सुरेश कोड़ा मुंगेर इलाके में सक्रिय अंतिम हथियारबंद नक्सल दस्ते का नेतृत्व कर रहा था। अब कोई भी हथियारबंद नक्सल दस्ता बिहार में शेष नहीं बचा है। 2012 में राज्य के 22 जिले नक्सल प्रभावित हुआ करते थे।
आत्मसमर्पण करने वाला नक्सली सुरेश कोड़ा स्पेशल एरिया कमेटी का सक्रिय सदस्य है और पिछले 25 वर्षों से फरार था। पिछले साल एसटीएफ की नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में वह बाल-बाल बचा और भागने में सफल रहा था। उसके विरुद्ध मुंगेर, लखीसराय एवं जमुई जिला के विभिन्न थानों में कुल 60 नक्सल कांड दर्ज हैं। नक्सली कोड़ा ने मुंगेर में बिहार एसटीएफ और डीआईजी मुंगेर के समक्ष हथियार डाले। आत्मसमर्पण करने के साथ ही उसने एक-एक एके 47 व एके 56 राइफल, दो इंसास राइफल और 505 कारतूस भी जमा कराए हैं। उसे आत्मसमर्पण सह पुनर्वास योजना का लाभ मिलेगा।
पुलिस मुख्यालय ने बताया कि सुरेश कोड़ा लगभग दर्जनभर हत्या सहित पुलिस से मुठभेड़, अपहरण व लेवी वसूली आदि कांडों का आरोपी है। उस पर एसएसबी जवान, मुखिया, उप मुखिया व चौकीदार सहित अन्य की हत्या का आरोप है। पांच जुलाई 2025 को एसटीएफ एवं कुख्यात नक्सली सुरेश कोड़ा के बीच हवेली खड़गपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में सर्च अभियान के दौरान मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान करीब 150 राउंड गोलियां चलीं। सुरेश कोड़ा इसमें अंधेरे का फायदा उठा कर भागने में सफल रहा था। कभी नक्सलगढ़ कहे जाने वाले मुंगेर क्षेत्र से भी नक्सलियों का सफाया हो गया है।
सुरेश कोड़ा पर दर्ज कुछ प्रमुख कांड
2008 में मुंगेर के धरहरा अंतर्गत कुमरपुर गांव के चौकीदार की टांगी से गला काटकर हत्या
● 2010 में जमुई जिले के चरकापत्थर थानान्तर्गत ढाकोटांड़ के चौकीदार की हत्या
● 2012 में खैरा थानान्तर्गत प्रखंड कार्यालय खैरा में विस्फोट एवं आगजनी
● 2017 में लखीसराय के कजरा थाना इलाके में उपमुखिया के पति सुनील यादव को गोली मारकर हत्या
● 2018 में कजरा थानान्तर्गत एक ग्रामीण महिला बसंती देवी की गला रेत कर हत्या, जमुई के बरहट थानान्तर्गत कुमरतरी गांव के दो सगे भाई प्रमोद कोड़ा और मदन कोड़ा की गोली मार कर हत्या। कोथवा ग्राम के पास एसएसबी जवान की हत्या।
● 2019 में लखीसराय के चानन थानान्तर्गत मननपुर बस्ती में मदन यादव एवं छोटु साव की हत्या।
● 2020 में खड़गपुर (शामपुर) थाना क्षेत्र के गरम-पनिया के निकट नक्सलियों एवं पुलिस बलों (एसटीएफ) के बीच मुठभेड़।
● 2021 में मुंगेर के लड़ैयाटांड़ थाना क्षेत्र के ग्राम मथुरा के समीप अजीमगंज पंचायत के नव निर्वाचित मुखिया परमानंद टुडू की गला रेतकर हत्या।
● 2022 में कुरवा पहाड़ी पर नक्सलरोधी अभियान में लगे सुरक्षा बलों पर गोलीबारी एवं एम्बुश में फंसाकर जानलेवा हमला।



