
पुलिस की भयानक लापरवाही; 10 सालों में नहीं कर पाई यह काम, बड़े नक्सली को हाईकोर्ट से मिला बेल
10 साल से मुजफ्फरपुर जेल में बंद नक्सली कमांडर सुधीर भगत को पुलिस की लापरवाही का लाभ मिला। एक बड़े कांड में हाईकोर्ट से उसे जमानत मिल गई।
बिहार पुलिस की बड़ी उजागर हुई है। नक्सली वारदातों में वर्षों तक अभियोजन स्वीकृति लटकाने का लाभ नक्सलियों को मिलने लगा है। 10 साल से मुजफ्फरपुर जेल में बंद नक्सली कमांडर सुधीर भगत को सकरा कांड में इसका लाभ मिला है। हाईकोर्ट ने उसे इस मामले में जमानत दे दी है। सुधीर बीते 10 साल से जेल में बंद है। इतनी बड़ी अवधि में भी सुधीर के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का आदेश नहीं लेने से पुलिस की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।
पटना हाईकोर्ट के जस्टिस चंद्रशेखर झा ने सुधीर भगत की जमानत मंजूर करते हुए आदेश में अंकित किया है कि मामले के ताजा स्थिति के बारे में रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट से मांगी गई थी। सेशन जज सह स्पेशल जज के कोर्ट से जारी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि मामला अभी आरोप गठन को लेकर चल रहा है। अभियोजन स्वीकृति आदेश की कमी के कारण अब तक आरोप का गठन नहीं किया जा सका है। आरोपित बीते 10 साल से ज्यादा समय से जेल में बंद है। इससे साफ पता चलता है कि इस केस का ट्रायल जल्द खत्म होने की उम्मीद नहीं है। यह आरोपित के बुनियादी अधिकार का उल्लंघन है। इसलिए आरोपित को बेल पर रिहा करने का निर्देश दिया जाता है।
सात नक्सली पर लिया आदेश, सुधीर को भूल गई पुलिस
कांड में सात नक्सली नक्सली रेणू भारती उर्फ भारती, रामू कुमार, रोहित सहनी उर्फ सकलू सहनी, रेखा भारती उर्फ जानकी, रामप्रवेश बैठा उर्फ सतीश जी, रामप्रवेश मिश्रा और राजीव रंजन के खिलाफ सेशन ट्रायल चल रहा है। पुलिस ने इन सातों नक्सलियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति आदेश गृह विभाग लिया है। लेकिन, 10 साल से जेल में बंद सुधीर के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति लेना पुलिस भूल गई। इससे कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
हथियार से लैस 30-40 नक्सलियों ने बोला था हमला
सकरा के मिश्रौलिया में 11 साल पहले नक्सलियों ने निर्माण कंपनी के बेस कैंप पर हमला बोला था। सात अगस्त की रात 12.30 बजे हथियार से लैस 30 से 40 नक्सलियों ने बेस कैंप पर हमला किया था। प्लांट में घुस कर कंपनी के कर्मी को डराकर उन्हें काबू में कर लिया था। पेट्रोल डालकर वाहनों में आग लगा दी थी। एक दर्जन से अधिक गाड़ियां और निर्माण कंपनी के उपकरण जल दिए गए थे। उसके बाद सभी हमलावर नक्सली नारा लगाते हुए दक्षिण दिशा की ओर फरार हो गए थे। कंपनी को एनएच-28 के निर्माण का ठेका मिला था। इससे नक्सलियों ने लेवी की मांग की थी। लेवी नहीं देने पर माओवादी नक्सली संगठन ने हमला बोला था।





