54 साल पहले 15 अगस्त को ही लागू हुई थी पिन कोड की व्यवस्था, क्या-क्या बताते हैं PIN के 6 अंक

हिन्दुस्तान, पटना, कार्यालय संवाददाता
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15 अगस्त 1947 को देश को आजादी मिली और इसके ठीक 25 साल बाद इसी तारीख को भारतीय डाक विभाग को छह अंकों वाली पिन कोड व्यवस्था मिली।

क्या-क्या बताते हैं PIN के 6 अंक
क्या-क्या बताते हैं PIN के 6 अंक

PIN Code System: छह अंकों का पिन कोड आपकी चिट्ठी या पार्सल को सटीक स्थान पर पहुंचा देता है। क्या आपको पता है कि इसकी शुरुआत कब हुई और किसी क्षेत्र का पिन कोड कैसे बनता है। पिन कोड क्या-क्या बताता है? इस खबर में आपको पूरी जानकारी मिलेगी।

15 अगस्त 1947 को देश को आजादी मिली और इसके ठीक 25 साल बाद इसी तारीख को भारतीय डाक विभाग को छह अंकों वाली पिन कोड व्यवस्था मिली। आज जब देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, वहीं पिन कोड व्यवस्था भी 54 साल पूरे कर चुकी है। डाक कर्मियों और अधिकारियों के अनुसार पिन कोड ने डाक सेवा को नई पहचान और दिशा दी।

किस अधिकारी ने पिन कोड सिस्टम लागू किया था

15 अगस्त 1972 को संचार मंत्रालय के तत्कालीन अतिरिक्त सचिव श्रीराम भीकाजी वेलणकर ने छह अंकों वाली इस व्यवस्था को लागू किया था। इससे पहले डाक वितरण में काफी परेशानी होती थी। एक जैसे नाम वाले कई गांव और कस्बे होने के कारण पत्र अक्सर गलत जगह पहुंच जाते थे। पिन कोड ने इस समस्या का स्थायी समाधान किया।

ऐसे बनता है पिन कोड

छह अंकों का यह कोड किसी भी पते की सटीक पहचान बन गया। इसमें पहला अंक क्षेत्र, दूसरा उप-क्षेत्र, तीसरा सॉर्टिंग जिला और अंतिम तीन अंक संबंधित डाकघर को दर्शाते हैं। इस व्यवस्था से डाक विभाग की कार्यक्षमता में बड़ा बदलाव आया और आम लोगों तक संदेश पहुंचाने की प्रक्रिया आसान, तेज और सटीक हुई।

डिजीपिन से सटीक लोकेशन की पहचान संभव

15 अगस्त को पिन कोड व्यवस्था के 54 साल पूरे हो गए। अब डाक विभाग ने इस व्यवस्था को और आधुनिक रूप देते हुए डिजीपिन की नई प्रणाली शुरू की है। यह छह अंकों वाले पिन कोड के साथ अतिरिक्त डिजिटल पहचान उपलब्ध कराती है। डिजीपिन चार गुणा चार मीटर के ग्रिड को एक विशिष्ट कोड प्रदान करता है। इसे बड़े संस्थानों के तकनीकी सहयोग से विकसित किया गया है।

नो योर डिजीपिन

इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी सटीक लोकेशन की पहचान संभव हो सकेगी। खास बात यह है कि डिजीपिन पुराने छह अंकों वाले पिन कोड की जगह नहीं लेगा, बल्कि उसके साथ मिलकर काम करेगा। विभाग ने इसके लिए ‘नो योर पिन कोड’ और ‘नो योर डिजीपिन’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी शुरू किए हैं।

Sudhir Kumar

लेखक के बारे में

Sudhir Kumar

टीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।

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